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Kurukshetra News: रवि योग और सर्वार्थ सिद्ध योग में वसंत पंचमी का त्योहार, विद्या की देवी की होगी पूजा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 02 Feb 2025 01:23 AM IST
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Festival of Vasant Panchami, goddess of knowledge will be worshiped in Ravi Yoga and Sarvartha Siddha Yoga.
कुरुक्षेत्र। डॉ. दीपक राय बब्बर।
कुरुक्षेत्र। माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को विद्या और बुद्धि की देवी मां सरस्वती की उपासना की जाती है, जिसे वसंत पंचमी त्योहार के तौर पर उत्साह के साथ मनाया जाता है। दो फरवरी रविवार को वसंत पंचमी धूमधाम से मनाई जाएगी। गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के संचालक रामराज कौशिक ने बताया कि इस बार वसंत पंचमी सर्वार्थ सिद्ध योग और रवि योग में आ रही है, जिसका ज्योतिष में विशेष महत्व है। इसे अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है, जिसमें विवाह, निर्माण और अन्य सभी शुभ कार्य किए जा सकते हैं।
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उन्होंने कहा कि ज्योतिषीय उपायों के अनुसार यदि कुंडली में बुध ग्रह कमजोर हो तो बुद्धि में कमी आ सकती है। ऐसी स्थिति में वसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की उपासना हरे फल अर्पित करके करनी चाहिए। बृहस्पति के कमजोर होने पर विद्या प्राप्ति में बाधा आती है। इस दिन पीले वस्त्र पहनकर, पीले फूल और फल अर्पित करके मां सरस्वती की पूजा लाभकारी होती है। शुक्र ग्रह के कमजोर होने पर मन की चंचलता बढ़ती है और कॅरियर के चयन में कठिनाई होती है। ऐसी दशा में सफेद फूलों से मां सरस्वती की उपासना करनी चाहिए।
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ऐसे करें मां सरस्वती की उपासना
पंडित रामराज कौशिक ने बताया कि पूजा के लिए पीले, वसंती या सफेद वस्त्र धारण करें और पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजा प्रारंभ करें। सूर्योदय के बाद ढाई घंटे या सूर्यास्त के बाद के ढाई घंटे का समय पूजा के लिए उपयुक्त होता है। मां सरस्वती को श्वेत चंदन, पीले और सफेद फूल अर्पित करें। प्रसाद में पीले चावल, मिश्री, दही और लावा अर्पित करें। केसर मिश्रित खीर सर्वोत्तम मानी जाती है। इसके बाद मां सरस्वती के मूल मंत्र का जाप करें तथा प्रसाद ग्रहण करें।
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जानें, वसंत पंचमी पर पूजा का मुहूर्त
पंडित रामराज कौशिक ने बताया कि दो फरवरी को सुबह पंचमी तिथि की शुरुआत नौ बजकर 14 मिनट से होगी, जिसका समापन तीन फरवरी को सुबह छह बजकर 52 मिनट पर होगा। मां सरस्वती की पूजा का मुहूर्त सुबह सात बजकर नौ मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा।
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