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कारनामा : स्कूल से महिला कर्मी को सात माह पहले ही दे दी सेवानिवृत्ति
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। इस्माईलाबाद क्षेत्र के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की एक महिला कर्मी को सात माह पहले ही सेवानिवृत्त कर दिए जाने और फिर हलचल होने पर उसे ज्वाइन करवा लिए जाने का मामला सामने आया है। शिक्षा विभाग में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है जबकि स्कूल प्रबंधन से लेकर शिक्षा अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।
माली के पद पर कार्यरत महिला को गत 31 मार्च को सेवानिवृत्त कर दिया गया था जबकि उसकी सेवानिवृत्ति सात माह बाद होनी थी। महिला सेवानिवृत्त होने के बाद घर पर रहने लगी तो उन्हें भी इसका मलाल हुआ और शिकायत पत्र मुख्यमंत्री, शिक्षामंत्री व शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों को भेजी, इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने उन्हें गत 11 जुलाई को फिर से ज्वाइन करवा दिया गया। हालांकि सात माह पहले सेवानिवृत्ति के पीछे उनके रिकार्ड में रही गलती को माना जा रहा है। महिला पहले इसी गांव के प्राथमिक स्कूल में बतौर स्वीपर कार्य कर रही थी लेकिन वर्ष 2019 में स्थायी नियुक्ति देते हुए राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बतौर माली लगाया गया।
भेजे पत्र में महिला कर्मी ने स्पष्ट बताया कि स्कूल प्रशासन ने गत 31 मार्च 2025 को सेवानिवृत्त मानकर कार्यमुक्त कर दिया था, जबकि उनके कागजात के अनुसार असली सेवानिवृत्ति तिथि 31 अक्तूबर 2025 है, ऐसे में उन्हें सेवानिवृत्ति से पहले मिलने वाली सभी सरकारी सुविधाएं रुक गईं और आर्थिक परेशानी भी होने लगी। 11 जुलाई को फिर से स्कूल में ड्यूटी ज्वाइन करवा दी गई। उधर इस मामले पर स्कूल प्राचार्या ने चुप्पी साध ली है तो वहीं जिला शिक्षा अधिकारी विनोद कौशिक का कहना है कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं आया है लेकिन ऐसे सेवानिृवत्ति दी है तो गलत है। इस पर संज्ञान लिया जाएगा।
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कुरुक्षेत्र। इस्माईलाबाद क्षेत्र के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की एक महिला कर्मी को सात माह पहले ही सेवानिवृत्त कर दिए जाने और फिर हलचल होने पर उसे ज्वाइन करवा लिए जाने का मामला सामने आया है। शिक्षा विभाग में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है जबकि स्कूल प्रबंधन से लेकर शिक्षा अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।
माली के पद पर कार्यरत महिला को गत 31 मार्च को सेवानिवृत्त कर दिया गया था जबकि उसकी सेवानिवृत्ति सात माह बाद होनी थी। महिला सेवानिवृत्त होने के बाद घर पर रहने लगी तो उन्हें भी इसका मलाल हुआ और शिकायत पत्र मुख्यमंत्री, शिक्षामंत्री व शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों को भेजी, इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने उन्हें गत 11 जुलाई को फिर से ज्वाइन करवा दिया गया। हालांकि सात माह पहले सेवानिवृत्ति के पीछे उनके रिकार्ड में रही गलती को माना जा रहा है। महिला पहले इसी गांव के प्राथमिक स्कूल में बतौर स्वीपर कार्य कर रही थी लेकिन वर्ष 2019 में स्थायी नियुक्ति देते हुए राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बतौर माली लगाया गया।
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भेजे पत्र में महिला कर्मी ने स्पष्ट बताया कि स्कूल प्रशासन ने गत 31 मार्च 2025 को सेवानिवृत्त मानकर कार्यमुक्त कर दिया था, जबकि उनके कागजात के अनुसार असली सेवानिवृत्ति तिथि 31 अक्तूबर 2025 है, ऐसे में उन्हें सेवानिवृत्ति से पहले मिलने वाली सभी सरकारी सुविधाएं रुक गईं और आर्थिक परेशानी भी होने लगी। 11 जुलाई को फिर से स्कूल में ड्यूटी ज्वाइन करवा दी गई। उधर इस मामले पर स्कूल प्राचार्या ने चुप्पी साध ली है तो वहीं जिला शिक्षा अधिकारी विनोद कौशिक का कहना है कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं आया है लेकिन ऐसे सेवानिृवत्ति दी है तो गलत है। इस पर संज्ञान लिया जाएगा।
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