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गाड़ियों व मोटरसाइकिल के काफिले के साथ किसानों ने किया दिल्ली कूच

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 17 Aug 2021 01:14 AM IST
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Farmers traveled to Delhi with a convoy of vehicles and motorcycles
पिपली अनाज मंडी से गाड़ियों व मोटरसाइकिल पर तिरंगे लगाकर किसानों द्वारा भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी के नेतृत्व में तिरंगा यात्रा निकालकर दिल्ली की और कूच किया गया। सुबह ही भारी संख्या हजारों की संख्या में किसान काफिले बनाकर गाड़ियों व मोटरसाइकिल पर तिरंगे लगाकर पहुंचे। सबसे पहले यात्रा का शुभारंभ शहीद उधम सिंह के स्मारक शाहाबाद में माल्यार्पण करने उपरांत 9 बजे चढूनी द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रगान गाकर ध्वजारोहण किया गया। उसके बाद पिपली में जहां पर किसानों पर 10 सितंबर, 2020 को लाठीचार्ज हुआ था और किसान आंदोलन की नीव रखी गई थी, वहां पर गुरनाम चढ़ूनी द्वारा किसान क्रांति चोक का शिलान्यास किया गया। तिरंगा यात्रा का नेतृत्व करते हुए गुरनाम चढूनी ने कहा की राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा हमारी आन, बान और शान है। हमने अंग्रेजो से तो 15 अगस्त 1947 से आजादी प्राप्त कर ली थी, लेकिन कृषि कानूनों से कमेरा वर्ग दोबारा आर्थिक रूप से गुलाम होने जा रहा है और ये किसान आंदोलन किसानों का उनकी आर्थिक आजादी के लिए बजाया गया बिगुल है। चढूनी ने आरोप लगाया कि सरकार तिरंगा यात्रा की आड़ में लोगों में घुसना चाह रही है, जबकि आरएसएस की विचारधारा से चलने वाली इस पार्टी को तिरंगे के सम्मान से कोई मतलब नहीं है। आरएसएस ने तो 52 वर्ष तक अपने मुख्यालय पर तिरंगा नहीं फहराया। किसानों ने तिरंगा यात्रा के दौरान हजारों की संख्या में शामिल होकर एक बार फिर दिखा दिया है कि किसान कृषि कानूनों के खिलाफ है व दिलो जान से तिरंगे सम्मान करते हैं। कृषि कानूनों की वापसी व एमएसपी की कानूनी गारंटी के लिए देशभर के किसान 25 नवंबर से दिल्ली के बॉर्डर पर डेरा डाले हुए है, लेकिन केंद्र सरकार ने किसानों की जायज मांगों को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई है वहीं किसान भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। इसी कड़ी में आंदोलन को मजबूत करने के लिए कुरुक्षेत्र जिला से किसानों द्वारा विशाल तिरंगा यात्रा लेकर दिल्ली कूच किया गया है। भाकियू के मीडिया प्रभारी राकेश बैंस ने कहा कि किसान आंदोलन सरकार के गले की फांस बन गया है। 650 से ज्यादा शहादत हो चुकी हैं, लेकिन समझ से बाहर है कि केंद्र सरकार किस अहंकार में चूर है, जो किसानों की बात नहीं मान रही। वहीं वरिष्ठ किसान नेता जसबीर मामूमाजरा में कहा कि आंदोलन कानूनों की वापसी व एमएसपी की लिखित गारंटी मिलने के बाद ही खत्म होगा। अगर सरकार किसी वहम में है तो वहम से बाहर आ जाए और अन्नदाता की आवाज सुने। जिला प्रधान कृष्ण कलाल माजरा ने कहा कि महाभारत में बाद ये दूसरा धर्मयुद्ध है जो कुरुक्षेत्र से शुरू हुआ था और आज फिर कुरुक्षेत्र ने इसे मजबूत करने का काम किया है और इस धर्मयुद्ध में जीत किसानों की ही होगी।
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