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Kurukshetra News: मुआवजे की मांग के लिए किसानों ने बुलंद की आवाज
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुुरुक्षेत्र। नेशनल हाईवे-152 के लिए अधिकृत जमीन का बकाया मुआवजा किसानों को आज तक नहीं मिल पाया है, जिसके चलते रोष गहरा गया है। शुक्रवार को किसानों ने जिला सचिवालय परिसर में धरना देकर नारेबाजी की।
किसानों ने मुआवजा न मिलने पर हाईवे जाम करने की चेतावनी भी दी है। भारतीय किसान यूनियन अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी के नेतृत्व में गुस्साए किसानों ने लघु सचिवालय परिसर में धरना दिया और जिला उपायुक्त नेहा सिंह को ज्ञापन भी सौंपा।
धरने की अगुवाई कर रहे भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने सरकार और प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए प्रशासन को बकाया भुगतान न करने पर हाईवे जाम करने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर 20 फरवरी को पिहोवा रेस्ट हाउस में अहम बैठक बुलाई जाएगी, जहां बड़ा फैसला लिया जाएगा।
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चढूनी ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि 2014 में सरकार ने नेशनल हाईवे 152 के निर्माण के लिए जिले के 11 गांवों के किसानों की जमीन को अधिगृहीत किया था। इन जमीन को नए एक्ट के तहत एक्वायर कर 100 प्रतिशत हर्जाना (सोलेशियम) और ब्याज के साथ करीब 66 लाख रुपये किसानों को चार महीने के अंदर देना तय किया था।
उसी दौरान ही नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने 66 लाख रुपये में से 45 लाख रुपये किसानों को दिए थे लेकिन बाकी राशि आज तक नहीं मिल पाई है जबकि अधिकारी सिर्फ भरोसा ही देते आ रहे हैं। पिछले साल फरवरी में भी किसानों ने इस मांग को लेकर हाईवे जाम किया था तो उस समय भी प्रशासन की ओर से 54 करोड़ रुपये दिलाने पर समझौता कराया था। इसके बावजूद भी किसानों को अपना हक नहीं मिल पाया है। ऐसे में किसान अदालत में भी लड़ाई लड़ रहे हैं।
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कुुरुक्षेत्र। नेशनल हाईवे-152 के लिए अधिकृत जमीन का बकाया मुआवजा किसानों को आज तक नहीं मिल पाया है, जिसके चलते रोष गहरा गया है। शुक्रवार को किसानों ने जिला सचिवालय परिसर में धरना देकर नारेबाजी की।
किसानों ने मुआवजा न मिलने पर हाईवे जाम करने की चेतावनी भी दी है। भारतीय किसान यूनियन अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी के नेतृत्व में गुस्साए किसानों ने लघु सचिवालय परिसर में धरना दिया और जिला उपायुक्त नेहा सिंह को ज्ञापन भी सौंपा।
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धरने की अगुवाई कर रहे भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने सरकार और प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए प्रशासन को बकाया भुगतान न करने पर हाईवे जाम करने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर 20 फरवरी को पिहोवा रेस्ट हाउस में अहम बैठक बुलाई जाएगी, जहां बड़ा फैसला लिया जाएगा।
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चढूनी ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि 2014 में सरकार ने नेशनल हाईवे 152 के निर्माण के लिए जिले के 11 गांवों के किसानों की जमीन को अधिगृहीत किया था। इन जमीन को नए एक्ट के तहत एक्वायर कर 100 प्रतिशत हर्जाना (सोलेशियम) और ब्याज के साथ करीब 66 लाख रुपये किसानों को चार महीने के अंदर देना तय किया था।
उसी दौरान ही नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने 66 लाख रुपये में से 45 लाख रुपये किसानों को दिए थे लेकिन बाकी राशि आज तक नहीं मिल पाई है जबकि अधिकारी सिर्फ भरोसा ही देते आ रहे हैं। पिछले साल फरवरी में भी किसानों ने इस मांग को लेकर हाईवे जाम किया था तो उस समय भी प्रशासन की ओर से 54 करोड़ रुपये दिलाने पर समझौता कराया था। इसके बावजूद भी किसानों को अपना हक नहीं मिल पाया है। ऐसे में किसान अदालत में भी लड़ाई लड़ रहे हैं।