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रिश्तों की कड़वाहट के परिणाम से रूबरू कराया

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 24 Apr 2022 01:24 AM IST
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Faced with the consequences of the bitterness of relationships, Kurukshetra
जब मैं सिर्फ एक औरत होती हूं नाटक का मंचन करते कलाकार। संवाद - फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। कला कीर्ति भवन की भरतमुनि रंगशाला में जातीय दंगों की पीड़ा को दिखाते हुए सार्थक सांस्कृतिक मंच करनाल के कलाकारों ने पाली भूपिंद्र के लिखे नाटक जब मैं सिर्फ एक औरत होती हूं का मंचन संजीव लखनपाल के निर्देशन में किया। नाटक में इंसानी रिश्तों की कड़वाहट का परिणाम दिखाई दिया।
नाटक में हिंदू-मुस्लिम के आपसी मतभेदों को दिखाते हुए नारी की अच्छे और खराब स्वरूप को दिखाया गया। सामाजिक व पारिवारिक शोषण एवं दमन का सजीव चित्रण करते हुए कलाकारों ने दिखाया कि किसी युद्ध या दंगों में औरत की भूमिका न होते हुए भी उस पर किस प्रकार अत्याचार होता है। औरत पर होने वाले अत्याचार में खुद औरत की भूमिका भी कई बार संदिग्ध दिखाई देती है। औरत के खिलाफ औरत का खड़ा होना हमारे देश काल की दुखद स्थिति रही है। जब एक औरत सिर्फ औरत होकर सोचती है तो इंसानियत की लकीर को कई गुणा बड़ा कर देती है।
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नाटक में एक हिंदू रईस अपनी पत्नी और बहन के साथ अपने मुस्लिम नौकर के घर में विभाजन के दौरान हुए दंगों के समय शरण लेता है, लेकिन मुस्लिम परिवार की महिला सैंदा हिंदुओं से नफरत करती है और हिंदू परिवार को पनाह देने से इंकार कर देती हैं। सैंदा का पति अपनी पत्नी को मनाकर हिंदू मालिक को घर में रख लेता है। सैदां अपनी बेटी की हत्या का बदला हिंदू परिवार से लेना चाहती है और हिंदू व्यक्ति की बहन को अपने बेटे से निकाह करने की शर्त पर उन्हें पनाह देती है।
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हिंदू परिवार के मना करने पर सैंदा का बेटा ननकू हिंदू युवती पर जबरदस्ती दबाव बनाता है। अपनी ननद की अस्मत को लुटती देख हिंदू की पत्नी कुल्हाड़ी से ननकू पर वार कर हत्या कर देती है। इस प्रकार 1947 में भारत और पाकिस्तान के विभाजन के समय हुए दंगों की त्रासदी का चित्रण कलाकारों ने किया।

इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ न्यू उत्थान थियेटर ग्रुप कुरुक्षेत्र के अध्यक्ष नीरज सेठी, रंगकर्मी शिवकुमार किरमिच, कला परिषद के कार्यालय प्रभारी धर्मपाल गुगलानी, पूर्व समन्वयक वीरेंद्र तथा रमेश सुखीजा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। संचालन मीडिया प्रभारी विकास शर्मा नेा किया। कार्यक्रम अंत में नाटक निर्देशक संजीव लखनपाल को हरियाणा कला परिषद की ओर से स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
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