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Kurukshetra News: महंगे कीटनाशक, यूरिया, पेस्टीसाइड से किसान को बनाया कर्जदार
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कुरुक्षेत्र। गुरुकुल कुरुक्षेत्र आयोजित बैठक को संबोधित करते गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत
कुरुक्षेत्र। रासायनिक खेती के महंगे कीटनाशक, यूरिया, पेस्टीसाइड से किसान को कर्जदार बना दिया है। इन कीटनाशकों के कारण खाद्यान्न विषैले हो गए, जिस कारण बीपी, शुगर, हार्ट अटैक, किडनी फेल जैसी बीमारियों ने लोगों को भी अपनी चपेट में ले लिया। आज भारत में ऐसा कोई घर नहीं है जहां इन बीमारियों से कोई प्रभावित न हो। यह सब रासायनिक खेती में डाले जा रहे यूरिया और कीटनाशकों के प्रयोग से हुआ है।
यह बात गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने गुरुकुल कुरुक्षेत्र में कुरुक्षेत्र भ्रमण के लिए पहुंचे गुजरात से प्रतिनिधिमंडल से कहीं। इस प्रतिनिधिमंडल में गुजरात के मुख्य सचिव राजकुमार, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के ज्वाइंट सेक्रेटरी पीडी पलसाना, आत्मा के डायरेक्टर श्रीप्रकाश राबड़ी, डिप्टी डायरेक्टर केके पटेल, एचके जिंदल, डीएन पटेल सहित 30 जिलों के विकास अधिकारी शामिल है। गुरुकुल में पहुंचने पर ओएसडी टू गवर्नर डॉ. राजेंद्र विद्यालंकार, प्रधान राजकुमार गर्ग, निदेशक ब्रिगेडियर प्रवीण कुमार, प्राचार्य सूबे प्रताप और व्यवस्थापक रामनिवास आर्य, कृषि वैज्ञानिक डॉ. हरिओम ने फूल-मालाओं से उनका अभिनंदन किया।
आचार्य ने बताया कि पिछले दिनों हुई भारी बरसात में जहां पड़ोसी किसानों के खेत पानी से लबालब भर गये और उनकी पूरी फसल बर्बाद हो गई थी, वहीं गुरुकुल के फार्म पर कोई नुकसान नहीं हुआ। इसमें बचाने में बहुत बड़ा योगदान केंचुओं का रहा। प्राकृतिक खेती से गुरुकुल के खेतों में लाखों की संख्या में केंचुआ है जो दिन-रात मिट्टी को भुरभुरा बनाने का महत्वपूर्ण कार्य करता है। जब बारिश हुई तो खेतों में जितना पानी आया, वह केंचुओं द्वारा बनाये गए असंख्य छिद्रों के माध्यम से धरती में चला गया। बताया कि केंचुओं ने गुरुकुल के फार्म पर नेचुरल हार्वेस्टिंग सिस्टम बना दिया है जिससे भूमि की सेहत सुधारने के साथ-साथ वाटर लेवल ठीक रहता है, मगर अज्ञानता के कारण किसानों ने रासायनिक खेती कर-करके केचुओं जैसे अपने अनेक मित्र जीवों मार दिया। अब प्राकृतिक खेती के माध्यम से ही पुन: खेतों में आ सकते हैं।
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कृषि वैज्ञानिक डॉ. हरिओम ने बताया कि रासायनिक खेती के कारण गुरुकुल के खेत बंजर हो चुका था। फिर इसमें गोमूत्र और जीवामृत डालकर प्राकृतिक खेती की गई जिससे अब फिर से ये खेत हरे-भरे हो गए। प्राकृतिक खेती ही किसान, प्रकृति और पर्यावरण को बचा सकती है, अत: देशभर में अधिक से अधिक किसानों को इसे अपनाना चाहिए।
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यह बात गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने गुरुकुल कुरुक्षेत्र में कुरुक्षेत्र भ्रमण के लिए पहुंचे गुजरात से प्रतिनिधिमंडल से कहीं। इस प्रतिनिधिमंडल में गुजरात के मुख्य सचिव राजकुमार, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के ज्वाइंट सेक्रेटरी पीडी पलसाना, आत्मा के डायरेक्टर श्रीप्रकाश राबड़ी, डिप्टी डायरेक्टर केके पटेल, एचके जिंदल, डीएन पटेल सहित 30 जिलों के विकास अधिकारी शामिल है। गुरुकुल में पहुंचने पर ओएसडी टू गवर्नर डॉ. राजेंद्र विद्यालंकार, प्रधान राजकुमार गर्ग, निदेशक ब्रिगेडियर प्रवीण कुमार, प्राचार्य सूबे प्रताप और व्यवस्थापक रामनिवास आर्य, कृषि वैज्ञानिक डॉ. हरिओम ने फूल-मालाओं से उनका अभिनंदन किया।
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आचार्य ने बताया कि पिछले दिनों हुई भारी बरसात में जहां पड़ोसी किसानों के खेत पानी से लबालब भर गये और उनकी पूरी फसल बर्बाद हो गई थी, वहीं गुरुकुल के फार्म पर कोई नुकसान नहीं हुआ। इसमें बचाने में बहुत बड़ा योगदान केंचुओं का रहा। प्राकृतिक खेती से गुरुकुल के खेतों में लाखों की संख्या में केंचुआ है जो दिन-रात मिट्टी को भुरभुरा बनाने का महत्वपूर्ण कार्य करता है। जब बारिश हुई तो खेतों में जितना पानी आया, वह केंचुओं द्वारा बनाये गए असंख्य छिद्रों के माध्यम से धरती में चला गया। बताया कि केंचुओं ने गुरुकुल के फार्म पर नेचुरल हार्वेस्टिंग सिस्टम बना दिया है जिससे भूमि की सेहत सुधारने के साथ-साथ वाटर लेवल ठीक रहता है, मगर अज्ञानता के कारण किसानों ने रासायनिक खेती कर-करके केचुओं जैसे अपने अनेक मित्र जीवों मार दिया। अब प्राकृतिक खेती के माध्यम से ही पुन: खेतों में आ सकते हैं।
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कृषि वैज्ञानिक डॉ. हरिओम ने बताया कि रासायनिक खेती के कारण गुरुकुल के खेत बंजर हो चुका था। फिर इसमें गोमूत्र और जीवामृत डालकर प्राकृतिक खेती की गई जिससे अब फिर से ये खेत हरे-भरे हो गए। प्राकृतिक खेती ही किसान, प्रकृति और पर्यावरण को बचा सकती है, अत: देशभर में अधिक से अधिक किसानों को इसे अपनाना चाहिए।