कुरुक्षेत्र। बैरागी सभा हरियाणा की ओर से आयोजित सेक्टर-8 के पार्क में संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के दौरान भक्ति प्रवचन हुए। इस दौरान अनिल शास्त्री ने बताया कि तुंगभंगा नदी के किनारे के एक गांव था। वहां आत्मदेव नाम का ब्राह्मण और उसकी पत्नी धुंधली रहती थी। आत्मदेव सज्जन थे लेकिन उसकी पत्नी दुष्ट प्रवृत्ति की थी।
आत्मदेव की कोई संतान नहीं थी। आत्मदेव को ऋषि ने पत्नी के लिए एक फल दिया। धुंधली सोचती कि बच्चा हुआ तो कष्ट झेलना पड़ेगा। उसने पति के सामने गर्भावस्था का नाटक किया और बहन से बच्चा लेकर आ गई। आत्मदेव ने खुशियां मनाकर उसका नाम ब्रह्मदेव रखना चाहा लेकिन धुंधली ने झगड़ कर धुंधकारी नाम रखा। धुंधली ने जो फल गाय को खिलाया था, उसके गर्भ से लंबे कान वाले मनुष्य का बालक हुआ। उसका नाम आत्मदेव ने गोकर्ण रखा।
सभा के प्रदेशाध्यक्ष शिवकुमार बैरागी ने विधिवत भागवत पूजन करके व्यासपीठ से आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि जहां भागवत कथा होती है, उस स्थान पर कलयुग वास नहीं करता। भागवत कथा सुनने से मनुष्य को बैकुंठ की प्राप्ति होती है। इस अवसर पर संरक्षक हरियाणा बैरागी सभा सुशील चित्रा, पंडित पुरुषोत्तम शर्मा, गीता शर्मा, सुषमा देवी, संदीप नैन, प्रवीण बैरागी, सुरेंद्र यादव और वंश चित्रा सहित अन्य मौजूद रहे।