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भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए शिक्षा बड़ा हथियार : गुलाब चंद कटारिया
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कुरुक्षेत्र। भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए शिक्षा ही सबसे बड़ा हथियार है। वर्ष 2047 तक भारत पूरी दुनिया की अगुवाई करते हुए फिर से विश्व गुरु बनेगा लेकिन इसके लिए सभी देशवासियों को एकजुटता के साथ आगे बढ़ना होगा।
यह आह्वान पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने किया। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत व स्वदेशी अभियान को उत्साह के साथ सफल बनाने पर भी जोर दिया। वे रविवार को धर्मनगरी पहुंचे थे, जहां महर्षि दयानंद सरस्वती की जन्म शताब्दी समारोह के तहत आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि एक बेहतर भारत के निर्माण के लिए शिक्षा को ही सबसे ज्यादा बढ़ावा देने की जरूरत है, जिसके साथ संस्कार भी हो। महर्षि दयानंद भी मानते थे कि व्यक्ति के जीवन, समाज व देश में बदलाव के लिए शिक्षा का बड़ा महत्व है। इसी पर चलते हुए उन्होंने वेदों की ओर लौटने का आह्वान किया था। उन्हें पता था कि वेदों में शिक्षा भी है और संस्कार भी। यह ज्ञान होने पर हर देशवासी ज्ञानवान होगा और फिर हर सामाजिक बुराई समाप्त की जा सकेगी।
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उन्होंने कहा कि आने वाली पीढि़यों के लिए हमें बेहतर माहौल पैदा करना होगा, तभी वे देश को और ज्यादा बेहतर बना सकेंगे। राज्यपाल ने कहा कि जब भी धरती पर अन्याय बढ़ता है तो कोई न कोई महापुरुष जन्म लेता है और महर्षि दयानंद भी ऐसे ही समय पर पैदा हुए, जहां पूरा देश अशिक्षा से लेकर अनेक सामाजिक बुराइयों से घिरा हुआ था। हालांकि आज भी उनके दर्शन का भारत नहीं बन पाया है लेकिन इस तरह के कार्यक्रमों के जरिए उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए लोगों को शिक्षित किया जा सकता है। 2047 में भारत को विश्वगुरु बनाना है तो महर्षि दयानंद सरस्वती के विचारों पर चलना होगा। समारोह की अध्यक्षता सीकर के पूर्व सांसद स्वामी अवधेशानंद ने की। इस दौरान स्वामी संपूर्णानंद, मणीनंद जैन आदि ने भी संबोधित किया।
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यह आह्वान पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने किया। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत व स्वदेशी अभियान को उत्साह के साथ सफल बनाने पर भी जोर दिया। वे रविवार को धर्मनगरी पहुंचे थे, जहां महर्षि दयानंद सरस्वती की जन्म शताब्दी समारोह के तहत आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि संबोधित किया।
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उन्होंने कहा कि एक बेहतर भारत के निर्माण के लिए शिक्षा को ही सबसे ज्यादा बढ़ावा देने की जरूरत है, जिसके साथ संस्कार भी हो। महर्षि दयानंद भी मानते थे कि व्यक्ति के जीवन, समाज व देश में बदलाव के लिए शिक्षा का बड़ा महत्व है। इसी पर चलते हुए उन्होंने वेदों की ओर लौटने का आह्वान किया था। उन्हें पता था कि वेदों में शिक्षा भी है और संस्कार भी। यह ज्ञान होने पर हर देशवासी ज्ञानवान होगा और फिर हर सामाजिक बुराई समाप्त की जा सकेगी।
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उन्होंने कहा कि आने वाली पीढि़यों के लिए हमें बेहतर माहौल पैदा करना होगा, तभी वे देश को और ज्यादा बेहतर बना सकेंगे। राज्यपाल ने कहा कि जब भी धरती पर अन्याय बढ़ता है तो कोई न कोई महापुरुष जन्म लेता है और महर्षि दयानंद भी ऐसे ही समय पर पैदा हुए, जहां पूरा देश अशिक्षा से लेकर अनेक सामाजिक बुराइयों से घिरा हुआ था। हालांकि आज भी उनके दर्शन का भारत नहीं बन पाया है लेकिन इस तरह के कार्यक्रमों के जरिए उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए लोगों को शिक्षित किया जा सकता है। 2047 में भारत को विश्वगुरु बनाना है तो महर्षि दयानंद सरस्वती के विचारों पर चलना होगा। समारोह की अध्यक्षता सीकर के पूर्व सांसद स्वामी अवधेशानंद ने की। इस दौरान स्वामी संपूर्णानंद, मणीनंद जैन आदि ने भी संबोधित किया।