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केवल ज्ञान नहीं, जीवन में संस्कार की सबसे ज्यादा अहमियत : रक्षामंत्री

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 21 Feb 2020 02:39 AM IST
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देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह संस्कार और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी कर्म के सिद्धांत की घुट्टी एनआईटी के विद्यार्थियों और शोधार्थियों को पिला गये। राजनीति क्षेत्र के ये दोनों धुरंधर बुधवार को भारत के अग्रणी राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कुरुक्षेत्र के 17 वें दीक्षांत समारोह में शिरकत करने पहुंचे थे। रक्षामंत्री ने कहा कि इस शिक्षण संस्थानों से डिग्री हासिल करने के बाद सभी विद्यार्थियों का सपना अच्छे पैकेज और स्वर्णिम भविष्य का होता है। ये इच्छा होना स्वाभाविक है। अपने चिरपरिचित अंदाज और भाषणशैली में राजनाथ सिंह ने तकनीकी शिक्षा के विद्यार्थियों को पैकेज से परमार्थ तक का दर्शन करा दिया। उन्होंने करीब 35 मिनट तक विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भले किसी भी शिक्षण संस्थान से शिक्षा पूरी कर ज्ञान प्राप्त किया हो, मगर उनका मानना है कि ज्ञान से बढ़ कर हमारे जीवन में संस्कार और जीवन मूल्यों की अहमियत होती है। दीक्षा संस्कार से जुड़ा एक शब्द है, क्योंकि दीक्षा के माध्यम से कोई भी व्यक्ति संस्कार प्राप्त करता है। यही संस्कार और जीवन के प्रति प्रतिबद्धता एक दिन सम्मानित स्थान दिलाती है। इसलिये केवल ज्ञान ही जीवन को आगे बढ़ाने के लिये काफी नहीं होता।
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रक्षामंत्री ने कहा कि दुनियाभर में फैले अधिकांश आतंकवादी अशिक्षित नहीं, बल्कि सुशिक्षित हैं। उन्होंने भी अपने जीवन में उच्च शिक्षा हासिल की है, लेकिन उनके पास संस्कार नहीं है। उन्होेंने बताया कि जीवन में संस्कार कितने और क्यों उपयोगी है। रक्षामंत्री बोले,बच्चों मैं फीजिक्स का टीचर रह चुका हूं, पर एक बात समझ लेना आप जहां भी रहना,जहां भी काम करना, वहां छोटे मन से काम नहीं, क्योंकि छोटे मन का व्यक्ति बड़ा नहीं हो सकता और टूटे मन का व्यक्ति कभी खड़ा नहीं हो सकता है। वहीं भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं राज्यसभा सांसद डॉ .सुधांशु त्रिवेदी ने भारत की संस्कृति से लेकर सवा सौ साल पुराने उस दौर के बारे में बताया, जब दुनिया में शोध के क्षेत्र में भारत काफी पीछे था,लेकिन अब विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर खड़ा है। डॉ. त्रिवेदी का संबोधन फोकस कर्म के सिद्धांत पर रहा। उन्होंने महाभारत के युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण के संदेश के जरिये कर्म के सिद्धांत को प्रस्तुत किया।
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15 अगस्त का दिन कहता कि आजादी अभी अधूरी है...
15 अगस्त का दिन कहता कि आजादी अभी अधूरी है...भारत रत्न अटल बिहारी बाजपेयी की इन पंक्तियों को दोहराते हुए भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं राज्यसभा सांसद डा. सुधांशु त्रिवेदी कर्म का सिद्धांत एनआईटी कुरुक्षेत्र में बता गये। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि बहुत विदेशी नकल कर ली, अब भारत को खुद को साबित करने के लिये आगे आकर काम करना है। उन्होंने कहा कि भारत के हर व्यक्ति को कर्म के सिद्धांत पर विश्वास करते हुए आगे बढ़ना होगा और अपनी दक्षता के बूते पर भारत को विश्वगुरु बनाना होगा।
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मै तो मेकेनिकल इंजीनियरिंग का छात्र रहा हूं
डॉ .त्रिवेदी जब यह बोले कि मैं तो मेकेनिकल इंजीनियरिंग का छात्र रहा हूं। उन्होंने कहा कि सौ सवा सौ साल पहले जो रिसर्च हो रही थी उसमें भारत कहीं नहीं था। जब बदलाव आया और प्लेन,जेट का दौर शुरु हुआ 1925 से 1950 तक हम थे कहीं मगर काफी पीछे खड़े। डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने 1950 से 1975 के उस समय को भी याद किया जब न्यूक्लर और स्पेसेज आई तो हम दुनिया में डट कर खड़े हो चुके थे, मगर जब सूचना प्रौद्योगिकी का दौर आया तो भारत विश्व में आईटी क्रांति में सबसे आगे खड़ा दिखा और अब 21 वीं सदी भारत की होने वाली है।
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