फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kurukshetra News ›   dont touch wound which gave pain

उन जख्मों को क्या छेड़ें जो दर्द देंगे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 15 Jun 2021 01:57 AM IST
विज्ञापन
dont touch wound which gave pain
अपनों से आहत और बेसहारा हुए बुजुर्गों के लिए धर्मनगरी स्थित प्रेरणा वृद्ध आश्रम सहारा बना है। विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस पर अमर उजाला ने आश्रम के बुजुर्गों का हाल जानने का प्रयास किया तो अपनों को याद कर उनकी आंखें नम हो गई। कुछ बुजुर्गों ने भावुक होकर अपनी बीती जिंदगी के दर्द को साझा किये तो कुछ का कहना था कि उन जख्मों को क्या छेड़ें जो फिर दर्द देंगे।
विज्ञापन

ऐसा लगता है कि अपने घर में ही हूं: वीना शर्मा
हरिद्वार से यहां आश्रम में पांच साल से रह रही 70 वर्षीय वीना शर्मा ने कहा कि इन पांच सालों में उन्हें कभी महसूस नहीं हुआ कि यह उनका घर नहीं है। बुजुर्ग आदर सम्मान का ही भूखा होता है, जो हमें यहां भरपूर मिल रहा है। आश्रम के संस्थापक उन्हें अपनी माता के समान समझते हैं।
विज्ञापन

तीन साल से बच्चों ने फोन करके हाल-चाल तक नहीं जाना : सीता
पिहोवा वासी 62 वर्षीय सीता ने दर्द भरी दास्तां को बयां करते हुए बताया कि उनके दो बेटे और एक बेटी है। तीनों की शादी हो चुकी है। बहुत पहले पति का देहांत हो गया था। बेटों की शादी के बाद उनके साथ लड़ाई झगड़ा होने लगा। बात कई बार मारपीट पर भी उतर आई। घर पर कोई सम्मान नहीं करता था। अंत में यहां आश्रम में आने का निर्णय लिया। जिन बच्चों को पाल पोसकर बड़ा किया, उन्होंने बीते तीन सालों में आज तक फोन करके हालचाल तक नहीं जाना। बेटी कभी कभार मिलने के लिए आ जाती है। पुराना सब कुछ याद करके बहुत दुख होता है। अब तीन साल से यहां पर जीवन बिता रही हूं। यहां पूरा मान सम्मान मिलता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

दो भाई थे, वे अपने-अपने परिवार में मशगूल हो गए: सुधा
दिल्ली वासी सुधा गुप्ता ने बताया कि उन्होंने शादी नहीं की। करीब 30 साल पहले उनके पिता का देहांत हो गया था। उनके दो बड़े भाई थे, वे अपने-अपने परिवार में मशगूल हो गए। अकेला महसूस हुआ तो अंत में यूट्यूब पर सर्च किया। फिर प्रेरणा वृद्ध आश्रम के बारे में पता चला। यहां उन्हें सुरक्षा और सम्मान मिला है।
बहनों की शादी की बाद अकेली रह गई थी : शमा
65 वर्षीय शमा मल्होत्रा ने बताया कि उन्होंने शादी नहीं की। वह बनारस से हैं और पिछले चार माह से यहीं रह रही हैं। वे तीन बहनें थीं, कोई भाई नहीं था। शादी के बाद बहनें अपने-अपने ससुराल चली गईं और वह अकेली रह गईं। उसके बाद आश्रम में आ गई। यहां का माहौल परिवार वाला है। सब एक दूसरे की परिवार के सदस्य की तरह देखभाल करते हैं।
बेटे की मृत्यु के बाद नहीं था कोई सहारा: शकुंतला
69 वर्षीय शकुंतला रानी ने बताया कि वह शाहाबाद से हैं और पिछले 4 साल से इस आश्रम में हैं। उसके बेटे की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद उसका कोई सहारा नहीं रहा। अब यहीं उनका घर है और यही परिवार। यहां उन्हें बेटा व बेटी सहित सारे रिश्ते मिल गए। सब बहुत प्यार करते हैं। आज तक उसे अकेलेपन का अहसास नहीं होने दिया।
सेवा, सुरक्षा और सम्मान लक्ष्य: सिंगला
प्रेरणा वृद्ध आश्रम के संस्थापक व संचालक जयभगवान सिंगला ने बताया कि बुजुर्गों के लिए सेवा, सुरक्षा और सम्मान यह तीन चीजें सबसे ज्यादा महत्व रखती हैं। आश्रम में सबसे ज्यादा ध्यान इन्हीं तीन बातों पर दिया जाता है। सिंगला ने कहा कि हमें अपने घरों से बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए। उनके आशीर्वाद से बड़े से बड़ा कष्ट भी हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता। बुजुर्गों को समय दो, पास बैठकर उनका हाल-चाल जानो। ऐसा करोगे तो वे तुमसे अपने दिल की बात करेंगे। किसी बुजुर्ग का दिल जीत लेना बहुत बड़ी बात होती है। आश्रम में हम सब बुजुर्गों के साथ खेलते भी हैं।

बच्चों की तरह करती हूं बुजुर्गों की देखभाल: रेणू
आश्रम की अध्यक्ष रेणू खुंगर ने कहा कि आश्रम के संचालक जहां सभी बुजुर्गों को अपना माता-पिता समझते हैं। वहीं मैं इन्हें बच्चा समझकर इनकी देखभाल करती हूं। जो औलाद बुजुर्ग माता-पिता को अपने पास रखेगी उसे जिंदगी में कभी किसी चीज की कमी नहीं आएगी। आश्रम में बहुत से बुजुर्ग ऐसे भी आए जिन्होंने अपनी जीवन यात्रा के अंतिम पल भी यहीं बिताए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed