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Kurukshetra News: चिकित्सक हर घर पर दस्तक देकर सेहत का रखेंगे ध्यान
Sun, 16 Nov 2025 01:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sun, 16 Nov 2025 01:38 AM IST
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कुरुक्षेत्र। एमओयू की प्रति दिखाते संस्थान सदस्य। स्वयं
कुरुक्षेत्र। एक ऐसा गांव, जहां बीमारी के आने का इंतजार नहीं, बल्कि चिकित्सक खुद आपके दरवाजे पर दस्तक देकर आपकी सेहत का ध्यान रखेंगे। ऐसा ही अभिनव और प्रेरणादायक मॉडल तैयार किया गया है श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान की ओर से।
संस्थान ने थानेसर के पांच गांवों कलाल माजरा, बीड़ मथाना, बीड़ पिपली, फतुहपुर और पलवल को गोद लेकर उन्हें आयुर्वेदिक आरोग्यम ग्राम बनाने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। इस पहल के तहत बीएएमएस के विद्यार्थी गांव-गांव जाकर घर-घर की सेहत की निगरानी करेंगे। हर विद्यार्थी 12-12 परिवारों को गोद लेकर उनका स्वास्थ्य रिकॉर्ड बनाएगा, उनके खानपान, दिनचर्या, मौसमी आहार, योग-प्राणायाम और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े पहलुओं की व्यक्तिगत गाइडलाइन तैयार करेगा। यह केवल एक शिविर आधारित योजना नहीं, बल्कि पूरे वर्ष चलने वाली सामुदायिक स्वास्थ्य मॉनिटरिंग प्रणाली होगी।
इसी को लेकर आयुष विश्वविद्यालय और पांचों ग्राम पंचायतों के बीच एमओयू हुआ। कार्यक्रम में संस्थान के प्राचार्य प्रो. आशीष मेहता, आयुर्वेदिक अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. राजा सिंगला, प्रो. शीतल सिंगला, डॉ. सुरेंद्र सिंह सहरावत, डॉ. मोहित शर्मा सहित संबंधित गांवों के सरपंच और प्रतिनिधि उपस्थित रहे। प्राचार्य प्रो. आशीष मेहता ने बताया कि विद्यार्थी नियमित रूप से गांवों में जाकर स्वास्थ्य आकलन करेंगे और समय-समय पर शिविरों का आयोजन होगा। साथ ही स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों और आशा वर्कर्स को भी आयुर्वेदिक जीवनशैली की ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि गांवों में एक मजबूत और सतत हेल्थ सपोर्ट सिस्टम तैयार हो सके। चिकित्सा अधीक्षक प्रो. राजा सिंगला ने कहा कि यह पहल किशोर स्वास्थ्य, मातृ-शिशु देखभाल, वृद्धजनों की निगरानी और स्कूल हेल्थ प्रोग्राम जैसी गतिविधियों को भी गति देगी। इसका उद्देश्य गांवों को स्वास्थ्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है।
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पहली बार विद्यार्थी रोग-निवारण दूत की भूमिका निभाएंगे : कुलपति
कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने मॉडल की सराहना करते हुए कहा कि पहली बार विद्यार्थी वास्तविक जीवन में रोग-निवारण दूत की भूमिका निभाएंगे। यह पहल न केवल शिक्षा का दायरा बढ़ाती है, बल्कि सेवा, संवेदना और समुदाय से जुड़ाव का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने इसे गांवों को रोग-मुक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया।
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संस्थान ने थानेसर के पांच गांवों कलाल माजरा, बीड़ मथाना, बीड़ पिपली, फतुहपुर और पलवल को गोद लेकर उन्हें आयुर्वेदिक आरोग्यम ग्राम बनाने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। इस पहल के तहत बीएएमएस के विद्यार्थी गांव-गांव जाकर घर-घर की सेहत की निगरानी करेंगे। हर विद्यार्थी 12-12 परिवारों को गोद लेकर उनका स्वास्थ्य रिकॉर्ड बनाएगा, उनके खानपान, दिनचर्या, मौसमी आहार, योग-प्राणायाम और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े पहलुओं की व्यक्तिगत गाइडलाइन तैयार करेगा। यह केवल एक शिविर आधारित योजना नहीं, बल्कि पूरे वर्ष चलने वाली सामुदायिक स्वास्थ्य मॉनिटरिंग प्रणाली होगी।
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इसी को लेकर आयुष विश्वविद्यालय और पांचों ग्राम पंचायतों के बीच एमओयू हुआ। कार्यक्रम में संस्थान के प्राचार्य प्रो. आशीष मेहता, आयुर्वेदिक अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. राजा सिंगला, प्रो. शीतल सिंगला, डॉ. सुरेंद्र सिंह सहरावत, डॉ. मोहित शर्मा सहित संबंधित गांवों के सरपंच और प्रतिनिधि उपस्थित रहे। प्राचार्य प्रो. आशीष मेहता ने बताया कि विद्यार्थी नियमित रूप से गांवों में जाकर स्वास्थ्य आकलन करेंगे और समय-समय पर शिविरों का आयोजन होगा। साथ ही स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों और आशा वर्कर्स को भी आयुर्वेदिक जीवनशैली की ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि गांवों में एक मजबूत और सतत हेल्थ सपोर्ट सिस्टम तैयार हो सके। चिकित्सा अधीक्षक प्रो. राजा सिंगला ने कहा कि यह पहल किशोर स्वास्थ्य, मातृ-शिशु देखभाल, वृद्धजनों की निगरानी और स्कूल हेल्थ प्रोग्राम जैसी गतिविधियों को भी गति देगी। इसका उद्देश्य गांवों को स्वास्थ्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है।
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पहली बार विद्यार्थी रोग-निवारण दूत की भूमिका निभाएंगे : कुलपति
कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने मॉडल की सराहना करते हुए कहा कि पहली बार विद्यार्थी वास्तविक जीवन में रोग-निवारण दूत की भूमिका निभाएंगे। यह पहल न केवल शिक्षा का दायरा बढ़ाती है, बल्कि सेवा, संवेदना और समुदाय से जुड़ाव का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने इसे गांवों को रोग-मुक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया।