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साहब! कोरोना से मरे न मरे, यहां रहे तो भूखे जरूर मर जाएंगे
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Do not die from Corona, if you stay here, you will surely die
साहब! कोरोना वायरस से मरे या नहीं, लेकिन यहां रहे तो भूख से जरूर मर जाएंगे। सुबह से न चाय मिली है और न ही खाना। ऐसे में कैसे कोरोना से जंग जीत सकते हैं? यह पीड़ा एलएनजेपी अस्पताल और जाट धर्मशाला के आइसोलेशन वार्ड में उपचाराधीन कोरोना संक्रमित मरीजों की है, क्योंकि अप्रैल माह से मरीजों को परोसे गए भोजन के बिल का भुगतान न होने से खफा कैटरर्स ने शुक्रवार सुबह से खाना परोसने में असमर्थता जताई।
उधर, जिम्मेदारी लेने की बजाय जिला स्वास्थ्य विभाग ने भी मरीजों को खुद खाने की व्यवस्था करने की बात कहकर वीरवार शाम से ही हाथ खड़े कर दिया। अमर उजाला द्वारा शुक्रवार शाम को मामला उपायुक्त शरणदीप कौर बराड़ के संज्ञान में लाने के बाद कोरोना संक्रमितों के लिए रात के भोजन की व्यवस्था की गई।
बता दें कि अप्रैल माह से अब तक कोविड-19 केयर सेंटर और आइसोलेशन वार्ड में उपचाराधीन मरीजों को परोसे गए भोजन का करीब 25 लाख रुपये बिल का भुगतान करना जिला स्वास्थ्य विभाग के लिए गले की फांस बना हुआ है, क्योंकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक ने 25 सितंबर को जिला सिविल सर्जन डॉ. सुखबीर सिंह के नाम पत्र जारी कर कोरोना संक्रमित रोगियों को परोसे गए भोजन के बिल का भुगतान करने से साफ इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि कोरोना संक्रमित रोगियों के भोजन की व्यवस्था के लिए बजटीय प्रावधान नहीं है। इसीलिए उक्त बिल का भुगतान स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फंड से किया जाए।
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उधर, जिला राजस्व अधिकारी द्वारा बिल पर किसी कारणवश ऑब्जेक्शन लगाए जाने के बाद से अटके पड़े बिल का जिला प्रशासन अब तक समाधान निकलने में असफल रहा है। बताया गया है कि लॉकडाउन के दौरान से चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों और रोगियों के लिए भोजन की व्यवस्था करने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक कमेटी का गठन किया गया था, जिसमें डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. रमेश सभ्रवाल, डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. संदीप अग्रवाल सहित तीन सदस्य शामिल थे। इस कमेटी के फैसले के अनुसार अन्नपूर्णा और मोहित गुप्ता कैटरर्स की ओर से स्टाफ और कोरोना संक्रमितों के लिए खाना परोसा जा रहा था। बाक्स
200 रुपये प्रति मरीज के हिसाब से जा रही है डाइट
मिली जानकारी के अनुसार आईसोलेशन वार्ड एवं कोविड सेंटर में उपचाराधीन कोरोना संक्रमित मरीजों एवं स्टाफ के लिए रोजाना 200 रुपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से डाईट जा रही है। सुबह के नाश्ते में परांठे, चार और आचार। दोपहर के समय 2 सब्जी, चावल, रोटी और सलाद। दोपहर बाद चाय और फल। रात के भोजन में दाल, रोटी और सलाद परोसा जा रहा है।
14 अप्रैल से प्रतिदिन जा रहा रोगियों के लिए खाना : मोहित गुप्ता
कैटरर्स मोहित गुप्ता ने बताया कि एलएनजेपी अस्पताल, हिरमी, जाट धर्मशाला और आयुर्वेदिक कॉलेज स्थित कोविड सेंटर में पिछले दिनों रोजाना रोगियों को तीनों समय खाना परोसा जा रहा था। हाल ही में एलएनजेपी अस्पताल और जाट धर्मशाला में उपचाराधीन मरीजों के लिए भोजन उपलब्ध कराया जा रहा था, जिसका करीब 25 लाख रुपये बिल अटका पड़ा है। लगातार आश्वासन के बावजूद बिल का भुगतान न होने के कारण उन्होंने भोजन परोसने में असमर्थता जताई है, लेकिन आज फिर आश्वासन दिया गया है कि एक-दो दिन में बिल का भुगतान कर दिया जाएगा। इसके बाद उन्होंने मरीजों को भोजन उपलब्ध कराया है। इसके अलावा अन्नपूर्णा एक से डेढ़ लाख रुपये खाने का बिल अटका हुआ है।
स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फंड से प्रशासन ने नहीं किया भुगतान, कैटरर्स ने खाना परोसना किया बंद: डाङ्ख. सभ्रवाल
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. रमेश सभ्रवाल का कहना है कि एनएचएम निदेशक ने पत्र जारी कर कोरोना संक्रमितों को परोसे गए भोजन के बिल का भुगतान स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फंड से करने की बात कही थी, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। बिल का भुगतान न होने के कारण कैटरर्स ने उपचाराधीन मरीजों को खाना परोसना बंद कर दिया है। बताया कि इस संदर्भ में कई बार उपायुक्त सहित अन्य अधिकारियों से मुलाकात कर बिल के भुगतान करने की अपील की गई थी, लेकिन अभी तक बिल का भुगतान नहीं हुआ।
शीघ्र किया जाएगा कैटरर्स के बिल का भुगतान : डीसी
आईसोलेशन वार्ड में उपचाराधीन मरीजों को सुबह से खाना उपलब्ध न होने का मामला संज्ञान में आते ही उपायुक्त शरणदीप कौर बराड़ ने तत्काल जिला सिविल सर्जन डॉ. सुखबीर सिंह से बातचीत की और मरीजों के लिए खाने की व्यवस्था करने के लिए आदेश दिए। उपायुक्त ने अमर उजाला के विशेष बातचीत में कहा कि कैटरर्स के अटके पड़े बिल का भुगतान शीघ्र ही स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फंड से किया जाएगा। इस संदर्भ में सरकार की ओर से भी दिशा-निर्देश मिले हैं। कोरोना संक्रमित मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
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उधर, जिम्मेदारी लेने की बजाय जिला स्वास्थ्य विभाग ने भी मरीजों को खुद खाने की व्यवस्था करने की बात कहकर वीरवार शाम से ही हाथ खड़े कर दिया। अमर उजाला द्वारा शुक्रवार शाम को मामला उपायुक्त शरणदीप कौर बराड़ के संज्ञान में लाने के बाद कोरोना संक्रमितों के लिए रात के भोजन की व्यवस्था की गई।
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बता दें कि अप्रैल माह से अब तक कोविड-19 केयर सेंटर और आइसोलेशन वार्ड में उपचाराधीन मरीजों को परोसे गए भोजन का करीब 25 लाख रुपये बिल का भुगतान करना जिला स्वास्थ्य विभाग के लिए गले की फांस बना हुआ है, क्योंकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक ने 25 सितंबर को जिला सिविल सर्जन डॉ. सुखबीर सिंह के नाम पत्र जारी कर कोरोना संक्रमित रोगियों को परोसे गए भोजन के बिल का भुगतान करने से साफ इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि कोरोना संक्रमित रोगियों के भोजन की व्यवस्था के लिए बजटीय प्रावधान नहीं है। इसीलिए उक्त बिल का भुगतान स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फंड से किया जाए।
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उधर, जिला राजस्व अधिकारी द्वारा बिल पर किसी कारणवश ऑब्जेक्शन लगाए जाने के बाद से अटके पड़े बिल का जिला प्रशासन अब तक समाधान निकलने में असफल रहा है। बताया गया है कि लॉकडाउन के दौरान से चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों और रोगियों के लिए भोजन की व्यवस्था करने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक कमेटी का गठन किया गया था, जिसमें डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. रमेश सभ्रवाल, डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. संदीप अग्रवाल सहित तीन सदस्य शामिल थे। इस कमेटी के फैसले के अनुसार अन्नपूर्णा और मोहित गुप्ता कैटरर्स की ओर से स्टाफ और कोरोना संक्रमितों के लिए खाना परोसा जा रहा था। बाक्स
200 रुपये प्रति मरीज के हिसाब से जा रही है डाइट
मिली जानकारी के अनुसार आईसोलेशन वार्ड एवं कोविड सेंटर में उपचाराधीन कोरोना संक्रमित मरीजों एवं स्टाफ के लिए रोजाना 200 रुपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से डाईट जा रही है। सुबह के नाश्ते में परांठे, चार और आचार। दोपहर के समय 2 सब्जी, चावल, रोटी और सलाद। दोपहर बाद चाय और फल। रात के भोजन में दाल, रोटी और सलाद परोसा जा रहा है।
14 अप्रैल से प्रतिदिन जा रहा रोगियों के लिए खाना : मोहित गुप्ता
कैटरर्स मोहित गुप्ता ने बताया कि एलएनजेपी अस्पताल, हिरमी, जाट धर्मशाला और आयुर्वेदिक कॉलेज स्थित कोविड सेंटर में पिछले दिनों रोजाना रोगियों को तीनों समय खाना परोसा जा रहा था। हाल ही में एलएनजेपी अस्पताल और जाट धर्मशाला में उपचाराधीन मरीजों के लिए भोजन उपलब्ध कराया जा रहा था, जिसका करीब 25 लाख रुपये बिल अटका पड़ा है। लगातार आश्वासन के बावजूद बिल का भुगतान न होने के कारण उन्होंने भोजन परोसने में असमर्थता जताई है, लेकिन आज फिर आश्वासन दिया गया है कि एक-दो दिन में बिल का भुगतान कर दिया जाएगा। इसके बाद उन्होंने मरीजों को भोजन उपलब्ध कराया है। इसके अलावा अन्नपूर्णा एक से डेढ़ लाख रुपये खाने का बिल अटका हुआ है।
स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फंड से प्रशासन ने नहीं किया भुगतान, कैटरर्स ने खाना परोसना किया बंद: डाङ्ख. सभ्रवाल
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. रमेश सभ्रवाल का कहना है कि एनएचएम निदेशक ने पत्र जारी कर कोरोना संक्रमितों को परोसे गए भोजन के बिल का भुगतान स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फंड से करने की बात कही थी, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। बिल का भुगतान न होने के कारण कैटरर्स ने उपचाराधीन मरीजों को खाना परोसना बंद कर दिया है। बताया कि इस संदर्भ में कई बार उपायुक्त सहित अन्य अधिकारियों से मुलाकात कर बिल के भुगतान करने की अपील की गई थी, लेकिन अभी तक बिल का भुगतान नहीं हुआ।
शीघ्र किया जाएगा कैटरर्स के बिल का भुगतान : डीसी
आईसोलेशन वार्ड में उपचाराधीन मरीजों को सुबह से खाना उपलब्ध न होने का मामला संज्ञान में आते ही उपायुक्त शरणदीप कौर बराड़ ने तत्काल जिला सिविल सर्जन डॉ. सुखबीर सिंह से बातचीत की और मरीजों के लिए खाने की व्यवस्था करने के लिए आदेश दिए। उपायुक्त ने अमर उजाला के विशेष बातचीत में कहा कि कैटरर्स के अटके पड़े बिल का भुगतान शीघ्र ही स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फंड से किया जाएगा। इस संदर्भ में सरकार की ओर से भी दिशा-निर्देश मिले हैं। कोरोना संक्रमित मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी जाएगी।