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‘सफलता के लिए अनुशासन जरूरी’
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के अखिल भारतीय सेवा कोचिंग संस्थान की ओर से शनिवार को सिविल सेवा परीक्षा कोचिंग सह परामर्श कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस ऑनलाइन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डीन एकेडमिक अफेयर प्रो. मंजुला चौधरी ने विद्यार्थियों को बताया कि सफलता ग्लैमरस की तरह दिखती है, लेकिन ग्लैमर नहीं है। जीवन में सफलता के लिए अनुशासन का होना बहुत जरूरी है।
उन्होंने राजा ब्रूस और मकड़ी की कहानी सुना कर कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प की अवधारणा को समझाया। उन्होंने एक व्यवसायी की घटना भी सुनाई, जिसने अपनी सफलता के पीछे के कारणों एवं क्षमता के महत्व को पहचाना। इससे पूर्व संस्थान की निदेशिका प्रो. निर्मला चौधरी ने बताया कि वर्ष 1982 में स्थापित महात्मा गांधी अखिल भारतीय सेवा कोचिंग संस्थान का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विभागों और संस्थानों के स्नातकोत्तर छात्र और शोध छात्रों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोचिंग प्रदान कर उन्हें रोजगारोन्मुखी बनाना है।
दूसरे सत्र में मुख्य वक्ता मुद्रण विज्ञापन स्टेशनरी हरियाणा सरकार से सेवानिवृत्त अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. राजरूप फुलिया ने कहा कि केवल किसी पद या उसके द्वारा प्रदान किए जाने वाले लाभ पर ध्यान केंद्रित न करें और पद के अनुसार समाज, परिवार से जुड़े लोगों के लिए शक्ति स्तंभ स्वरूप कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिविल सेवा के लिए निर्णय का संतुलन और सामान्य ज्ञान का होना जरूरी है। उन्होंने छात्रों को असफलता को सफलता की सीढ़ी के रूप में लेने का आग्रह किया।
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तीसरे सत्र में मुख्य वक्ता अतिरिक्त उपायुक्त राहुल नरवाल ने कहा कि यूपीएससी से परे भी जीवन है। उन्होंने बताया कि वह कैसे आईएएस परीक्षा पास करने के बाद भी हिसार में कार्यरत नव चेतना वेलफेयर सोसायटी से जुड़े हुए हैं। उन्होंने विषय चुनने के मापदंडों को रेखांकित करते हुए बताया कि इसके लिए आपको विषय में रुचि होनी चाहिए, विषय सामग्री की उपलब्धता व विषय की कुछ पृष्ठभूमि का ज्ञान होना चाहिए। आईएएस एक अंत का साधन होना चाहिए अपने आप में एक अंत नहीं होना चाहिए। इस अवसर पर संस्थान के उपनिदेशक डॉ. ज्ञान चहल, डॉ. अनिल कुमार आदि उपस्थित रहे।
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के अखिल भारतीय सेवा कोचिंग संस्थान की ओर से शनिवार को सिविल सेवा परीक्षा कोचिंग सह परामर्श कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस ऑनलाइन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डीन एकेडमिक अफेयर प्रो. मंजुला चौधरी ने विद्यार्थियों को बताया कि सफलता ग्लैमरस की तरह दिखती है, लेकिन ग्लैमर नहीं है। जीवन में सफलता के लिए अनुशासन का होना बहुत जरूरी है।
उन्होंने राजा ब्रूस और मकड़ी की कहानी सुना कर कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प की अवधारणा को समझाया। उन्होंने एक व्यवसायी की घटना भी सुनाई, जिसने अपनी सफलता के पीछे के कारणों एवं क्षमता के महत्व को पहचाना। इससे पूर्व संस्थान की निदेशिका प्रो. निर्मला चौधरी ने बताया कि वर्ष 1982 में स्थापित महात्मा गांधी अखिल भारतीय सेवा कोचिंग संस्थान का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विभागों और संस्थानों के स्नातकोत्तर छात्र और शोध छात्रों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोचिंग प्रदान कर उन्हें रोजगारोन्मुखी बनाना है।
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दूसरे सत्र में मुख्य वक्ता मुद्रण विज्ञापन स्टेशनरी हरियाणा सरकार से सेवानिवृत्त अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. राजरूप फुलिया ने कहा कि केवल किसी पद या उसके द्वारा प्रदान किए जाने वाले लाभ पर ध्यान केंद्रित न करें और पद के अनुसार समाज, परिवार से जुड़े लोगों के लिए शक्ति स्तंभ स्वरूप कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिविल सेवा के लिए निर्णय का संतुलन और सामान्य ज्ञान का होना जरूरी है। उन्होंने छात्रों को असफलता को सफलता की सीढ़ी के रूप में लेने का आग्रह किया।
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तीसरे सत्र में मुख्य वक्ता अतिरिक्त उपायुक्त राहुल नरवाल ने कहा कि यूपीएससी से परे भी जीवन है। उन्होंने बताया कि वह कैसे आईएएस परीक्षा पास करने के बाद भी हिसार में कार्यरत नव चेतना वेलफेयर सोसायटी से जुड़े हुए हैं। उन्होंने विषय चुनने के मापदंडों को रेखांकित करते हुए बताया कि इसके लिए आपको विषय में रुचि होनी चाहिए, विषय सामग्री की उपलब्धता व विषय की कुछ पृष्ठभूमि का ज्ञान होना चाहिए। आईएएस एक अंत का साधन होना चाहिए अपने आप में एक अंत नहीं होना चाहिए। इस अवसर पर संस्थान के उपनिदेशक डॉ. ज्ञान चहल, डॉ. अनिल कुमार आदि उपस्थित रहे।