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प्रगतिशील देश के विकास को प्रभावित करतीं है आपदाएं
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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा है कि किसी भी प्रगतिशील देश के विकास में आपदा बड़ी बाधा है। आपदा की घटनाएं स्वास्थ्य, स्वच्छता, पेयजल, आवास और शिक्षा क्षेत्रों को प्रभावित करती हैं। इससे सामाजिक विकास कमजोर होता है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन को लेकर भारत सरकार प्रयासरत है। वे वीरवार को कुवि के यूजीसी मानव संसाधन विकास केंद्र और जियोलॉजी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ‘आपदा प्रबंधन’ विषय पर ऑनलाइन द्वि-साप्ताहिक अंतर्विषयक रिफ्रेशर कोर्स के उद्घाटन के बाद बतौर मुख्यातिथि लोगों को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन एक विषय नहीं है अपितु इसकी जानकारी सभी को होनी चाहिए। आपदा से पहले, इसके दौरान और बाद में क्या प्रयास हो सकते हैं, इसका गहन अध्ययन करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पुनर्वास में योग का योगदान इस विषय से ही संबंधित है क्योंकि योग द्वारा ही लोगों को कोविड-19 के समय काफी लाभ मिला था। इस अवसर पर जियोलॉजिकल सर्वें ऑफ इंडिया, चंडीगढ़ के उप-महानिदेशक डॉ. जीएस तिवारी ने जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के कार्यक्षेत्र और आपदा प्रबंधन की वर्तमान समय में जरूरत के बारे में बताया।
रिफ्रेशर कोर्स के पहले सत्र के मुख्य वक्ता सजोय मोलिक, उपमंडल आपदा प्रबंधन अधिकारी ने कहा कि आपदा बढ़ने के कई कारण हैं जिनमें लगातार बढ़ती जनसंख्या द्वारा अनियोजित शहरीकरण, औद्योगीकरण में वृद्धि, ज्यादा खतरे वाले क्षेत्रों में विकास, पर्यावरणीय असंतुलन, जलवायु परिवर्तन व पर्यावरण नियमों का उल्लंघन आदि शामिल है। डीन एकेडमिक अफेयर्स व यूजीसी मानव संसाधन विकास केन्द्र की निदेशिका प्रो. मंजूला चौधरी ने रिफ्रेशर कोर्स की अध्यक्षता की। उन्होंने बताया कि पर्यटन और आपदा का गहरा संबंध है। इस मौके पर कोर्स कोऑर्डिनेटर एवं जियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. नरेश कुमार ने बताया कि इस कोर्स में देश के विभिन्न राज्यों पश्चिम बंगाल, दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश व उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों के 44 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। रिफ्रेशर कोर्स में अंतिम व्याख्यान डॉ. किशोर कुमार, पूर्व मुख्य वैज्ञानिक, सीआरआरआई, नई दिल्ली देंगे। इस मौके पर कोर्स को-कोआर्डिनेटर डॉ. ओम प्रकाश ने सभी अतिथियों के आने पर उनका आभार जताया।
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उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन एक विषय नहीं है अपितु इसकी जानकारी सभी को होनी चाहिए। आपदा से पहले, इसके दौरान और बाद में क्या प्रयास हो सकते हैं, इसका गहन अध्ययन करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पुनर्वास में योग का योगदान इस विषय से ही संबंधित है क्योंकि योग द्वारा ही लोगों को कोविड-19 के समय काफी लाभ मिला था। इस अवसर पर जियोलॉजिकल सर्वें ऑफ इंडिया, चंडीगढ़ के उप-महानिदेशक डॉ. जीएस तिवारी ने जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के कार्यक्षेत्र और आपदा प्रबंधन की वर्तमान समय में जरूरत के बारे में बताया।
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रिफ्रेशर कोर्स के पहले सत्र के मुख्य वक्ता सजोय मोलिक, उपमंडल आपदा प्रबंधन अधिकारी ने कहा कि आपदा बढ़ने के कई कारण हैं जिनमें लगातार बढ़ती जनसंख्या द्वारा अनियोजित शहरीकरण, औद्योगीकरण में वृद्धि, ज्यादा खतरे वाले क्षेत्रों में विकास, पर्यावरणीय असंतुलन, जलवायु परिवर्तन व पर्यावरण नियमों का उल्लंघन आदि शामिल है। डीन एकेडमिक अफेयर्स व यूजीसी मानव संसाधन विकास केन्द्र की निदेशिका प्रो. मंजूला चौधरी ने रिफ्रेशर कोर्स की अध्यक्षता की। उन्होंने बताया कि पर्यटन और आपदा का गहरा संबंध है। इस मौके पर कोर्स कोऑर्डिनेटर एवं जियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. नरेश कुमार ने बताया कि इस कोर्स में देश के विभिन्न राज्यों पश्चिम बंगाल, दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश व उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों के 44 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। रिफ्रेशर कोर्स में अंतिम व्याख्यान डॉ. किशोर कुमार, पूर्व मुख्य वैज्ञानिक, सीआरआरआई, नई दिल्ली देंगे। इस मौके पर कोर्स को-कोआर्डिनेटर डॉ. ओम प्रकाश ने सभी अतिथियों के आने पर उनका आभार जताया।
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