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भौमवती अमावस पर लगाई आस्था की डुबकी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 29 Jun 2022 02:03 AM IST
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Dip of faith on Bhaumvati Amavas, Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। आषाढ़ मास की हलहारिणी एवं भौमवती अमावस के अवसर पर हजारों श्रद्धालु ब्रह्मसरोवर, सन्निहित सरोवर और पिहोवा के सरस्वती तीर्थ पर पहुंचे। यहां उन्होंने अपने पितरों की अक्षय मुक्ति के लिए पिंडदान, गति कर्म और तर्पण किया। भीषण गर्मी की परवाह किए बगैर श्रद्धालुओं ने श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना की।
अमावस की पूर्व संध्या पर ही श्रद्धालु तीर्थ पर पहुंचना शुरू हो गए थे। पूर्व संध्या पर पहुंचे श्रद्धालुओं ने सूर्योदय पर पितरों के लिए पूजा अर्चना की। इसके अलावा पुरोहितों से अपनी वंशावली की जानकारी भी प्राप्त की। कई श्रद्धालुओं ने अपनी वंशावली का रिकॉर्ड अपने मोबाइल में भी कैद किया। वहीं सरस्वती तीर्थ स्थित प्रेत पीपल पर श्रद्धालुओं ने जल अर्पित किया और सूत बांधकर सुख समृद्धि की कामना की। उसके बाद उन्होंने भगवान कार्तिकेय के मंदिर में साक्षी के रूप में उनको तेल व सिंदूर भी चढ़ाया। मंदिर में अभिषेक के लिए श्रद्धालुओं को काफी इंतजार करना पड़ा।
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तीर्थ पुरोहित विनोद पचौली ने बताया कि अमावस पर अपने दिवंगत परिजनों के निमित्त पिंडदान, गति कर्म व नारायण बलि जैसे धार्मिक कार्य करने का महत्व है। तीर्थ पर अन्न से बने पिंडों को मृतक जीव का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। इसके बाद उन पिंडों का तीर्थ के जल में तर्पण किया जाता है। भौमवती अमावस पर पवित्र नदियों, संगम और सरोवर में स्नान के बाद अपनी इच्छानुसार अन्न, वस्त्र, धन, गाय, भूमि तथा स्वर्ण दान करने का विधान है। इन नदियों में स्नान करने से अश्वमेध यज्ञ के समान फल मिलता है।
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