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Kurukshetra News: ब्रह्मसरोवर में श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी, पितरों की शांति के लिए किया पिंडदान
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कुरुक्षेत्र। सोमवती अमावस्या के अवसर पर सुबह ही श्रद्धालुओं ने पवित्र ब्रह्मसरोवर में आस्था की डुबकी लगाई। गोवर्धन पूजा व सोमवार को होने के चलते हजारों श्रद्धालु इस सुखद संयोग में भागीदार बनने के लिए उमड़ पड़े। अल सुबह ही श्रद्धालु ब्रह्मसरोवर और पिहोवा के सरस्वती तीर्थ पर स्नान करने पहुुंचे। श्रद्धालुओं ने घाटों पर स्नान करने के बाद अपने परिजनों के साथ पूर्वजों के लिए पिंडदान के लिए पूजा कराई।
सोमवती अमावस्या होने के चलते सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं की ओर से भी कार्यक्रमों आयोजन किया गया था। कई मंदिरों में श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का भी आयोजन किया गया था, जिसमें दूर दराज से आए हुए श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। सोमवती अमावस्या के चलते ब्रह्मसरोवर, पिहोवा के सरस्वती तीर्थ पर दिनभर मेले जैसा माहौल बना रहा। सोमवती अमावस्या को लेकर ब्रह्मसरोवर पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए बंदोबस्त किए गए थे। वहीं पुलिसकर्मी भी यात्रियों की सुरक्षा के लिए चप्पे-चप्पे पर नजर बनाए हुए थे।
सोमवती अमावस्या लगना शुभ : कौशिक
पंडित रामराज कौशिक का कहना है कि गोवर्धन के दिन सोमवती अमावस्या का होना बहुत शुभ माना गया है। इस दिन स्नान, ध्यान और दान करने से सौभाग्य में वृद्धि होती है। इस दिन पितरों के लिए पिंडदान, तर्पण व दान किया जाता है। सोमवती अमावस्या का लगना फलदायी माना गया है। इस संयोग के बनने से महालक्ष्मी, गणेश, भगवान शिव और माता पार्वती की भी कृपा प्राप्त होती है।
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सोमवती अमावस्या होने के चलते सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं की ओर से भी कार्यक्रमों आयोजन किया गया था। कई मंदिरों में श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का भी आयोजन किया गया था, जिसमें दूर दराज से आए हुए श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। सोमवती अमावस्या के चलते ब्रह्मसरोवर, पिहोवा के सरस्वती तीर्थ पर दिनभर मेले जैसा माहौल बना रहा। सोमवती अमावस्या को लेकर ब्रह्मसरोवर पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए बंदोबस्त किए गए थे। वहीं पुलिसकर्मी भी यात्रियों की सुरक्षा के लिए चप्पे-चप्पे पर नजर बनाए हुए थे।
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सोमवती अमावस्या लगना शुभ : कौशिक
पंडित रामराज कौशिक का कहना है कि गोवर्धन के दिन सोमवती अमावस्या का होना बहुत शुभ माना गया है। इस दिन स्नान, ध्यान और दान करने से सौभाग्य में वृद्धि होती है। इस दिन पितरों के लिए पिंडदान, तर्पण व दान किया जाता है। सोमवती अमावस्या का लगना फलदायी माना गया है। इस संयोग के बनने से महालक्ष्मी, गणेश, भगवान शिव और माता पार्वती की भी कृपा प्राप्त होती है।
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