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Kurukshetra News: श्रद्धालुओं ने भजनों से किया शनि भगवान की महिमा का गुणगान

Sun, 17 May 2026 03:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र Updated Sun, 17 May 2026 03:04 AM IST
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Devotees sang hymns praising Lord Shani.
कुरुक्षेत्र। श्री दुख निवारण शनिदेव मंदिर में दीया जलाते श्रद्धालु। संवाद
कुरुक्षेत्र। न्याय के देवता शनिदेव की जयंती शनिवार को जिलेभर में श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने सुबह से ही मंदिरों में पहुंचकर माथा टेका और आरती-आराधना कर शनि शिला पर अभिषेक कर तेल अर्पित किया। इसके बाद गायकों ने भजनों से भगवान शनि की महिमा का गुणगान किया।
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धर्मनगरी के अलावा शहर, कस्बों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बने विभिन्न शनि मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भक्तों ने कष्टों से मुक्ति के लिए उपाय कर कर्मों के न्यायदाता शनिदेव से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दाैरान श्री दुख निवारण शनिदेव मंदिर में भक्तों ने शनि शिला पर तेल अर्पित किया।
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श्री हंस योग आश्रम में भी मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में वट सावित्री अमावस्या, शनिश्चरी अमावस्या, वड़मावस एवं सूर्यपुत्र शनि देव जयंती मनाई। सुभद्रा, सुनिधि एवं अर्चना ने सत्संग एवं भजनों से भक्तों को आनंद विभोर कर दिया।
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आश्रम प्रभारी महात्मा अंतर्मुखी ने सुनाया वट सावित्री अमावस्या के दिन सावित्री अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस ले आई थी।
सावित्री को पहले मालूम हो चुका था कि एक साल के बाद सत्यवान के प्राण निकल जाएंगे। सावित्री आत्मज्ञानी थी। उसने भोग विलास को त्याग भगवान के नाम का निरंतर सुमिरन किया। जिस दिन सत्यवान के प्राण निकलने थे, सावित्री वन में सत्यवान के साथ गई। जब सत्यवान को चक्कर आने शुरू हुए, वट वृक्ष के नीचे लेट गया। सावित्री यमराज के पीछे चल पड़ी। यमराज ने मना किया। जब सावित्री नहीं हटी तो यमराज ने कहा बेटी जाओ। सावित्री ने कहा पति के प्राणों को लेकर जा रहे हैं तो पीछे कैसे हटूं।

सावित्री ने सूझबूझ से ऐसा वरदान मांगा कि यमराज ने उसके पति के प्राणों को वापस छोड़ना पड़ा। सावित्री ने वरदान मांगा कि सास-ससुर अपनी पौत्रों को सोने के कटोरे में दूध पीता देखें। बताया कि एक वरदान में सावित्री ने पति के प्राण, पुत्र, सास ससुर की आंखें, खोया हुआ राज्य सब प्राप्त कर लिया। प्रभु के नाम सुमिरन में बड़ी शक्ति है। सद्गुरुदेव की शरण में जाकर प्रभु के सच्चे नाम और ज्योति स्वरूप का ज्ञान प्राप्त करना चाहिए। सत्संग के बाद विशाल भंडारे में भक्तों ने महाप्रसाद का आनंद लिया। इस अवसर पर नरेश खुराना, बलदेव, नरेश, पवन, राहुल, तेजपाल, कृष्ण, रेखा, सुनीता, नेहा, नीलम, सुमन, संतलाल और बनारसी दास सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे। संवाद
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