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मृत किसान पर ही दर्ज कर लिया फाने जलाने का केस
ब्यूरो/कुरुक्षेत्र,अमर उजाला
Updated Sat, 06 May 2017 12:15 AM IST
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farmers gives information
- फोटो : अमर उजाला
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कृषि विभाग का एक अजीब कारनामा सामने आया है। विभाग ने फाने जलाने के आरोप में एक साल पहले मृत किसान के खिलाफ मामला दर्ज करवा दिया। इतना ही नहीं विभाग ने इस कार्रवाई को जिला लोक संपर्क सूचना विभाग के जरिये समाचार पत्रों में भी प्रकाशित करवा दिया। अब मामला सामने आने पर विभाग के अधिकारी सकते में हैं। अब दूसरी रिपोर्ट तैयार कर अपनी लापरवाही छिपाने की कोशिश में जुट गया है।
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गत दिनों कुरुक्षेत्र रोड स्थित गांव बीबीपुर कलां में खेतों के फानों में आग लगी हुई थी। इसकी सूचना मिलते ही राजस्व और कृषि विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचकर कार्रवाई के लिए किसानों के नाम लिख लिए। इसके बाद अधिकारियों की शिकायत पर कई किसानों के खिलाफ फानों में आग लगाने पर दर्ज किया गया। इसमें एक किसान तेजपाल के खिलाफ भी मामला दर्ज हुआ, लेकिन उसकी मौत लगभग एक साल पहले ही हो चुकी थी। वहीं तेजपाल के पुत्र संजीव ने बताया कि उसके पिता की मृत्यु 13 मई 2016 को हो चुकी है। उनका मृत्यु प्रमाण पत्र भी ऑनलाइन देखा जा सकता है। पिता की मौत के बाद उन्होंने अपनी जमीन ठेके पर दे दी थी।
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बैंक मैनेजर और पटवारी पर भी मामला दर्ज
विभाग का कारनामा यहीं नहीं थमा। इस मामले में विभाग की ओर से एक्साइज विभाग के एक उच्चाधिकारी, एक बैंक मैनेजर सहित एक पटवारी पर भी मामला दर्ज करवाया गया है। एक्साइज अधिकारी सुगमपाल का कहना है कि उन्हें अपने खेत में गए ही सालों ही बीत गए हैं। पिछले कई दशकों से उन्होंने अपनी जमीन ठेके पर दी हुई है। वहीं उन्हें इस मामले के बारे में भी कोई जानकारी नहीं है।
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किसान यूनियन खफा
कृषि विभाग की इस लापरवाही से किसान यूनियन खफा है। भाकियू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बलविंद्र सिंह बाजवा ने कहा कि सरकार पहले ही फसल बीमा योजना के नाम पर बीमा कंपनियों से मिलकर किसानों को ठग रही है और अब वहीं निर्दोष किसानों को फंसाने के लिए झूठे मुकदमे दर्ज करवाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार बेवजह किसानों को परेशान करना बंद करे और इस मामले में लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए अन्यथा भाकियू सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने को मजबूर होगी।
पटवारी की रिपोर्ट पर हुआ मामला दर्ज : मदन
कृषि अधिकारी मदन राणा ने कहा कि मामला पटवारी की दी गई रिपोर्ट के आधार पर दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि उन्हें पता चला था कि किसानों ने फानों में आग लगाई थी। इसके बाद विभाग की टीम और पटवारी कार्रवाई करने पहुंचे। वहां किसी ने उन्हें फाने जलाने वालों के नाम नहीं बताए। इसके बाद पटवारी ने रिकॉर्ड देखकर नाम दिए और मामला दर्ज करवाया गया। वहीं जब उन्हें इस बात का पता चला तो उन्होंने रिपोर्ट में संशोधन करके रिपोर्ट पुलिस को दे दी है।