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शिग योग की साक्षी में एक मार्च को मनाया जाएगा महाशिवरात्रि का पर्व
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महाशिवरात्रि का पर्व इस साल शिव योग की साक्षी में मनाया जाएगा। इस संयोग में वार, तिथि, योग, नक्षत्र, करण तथा ग्रहों के संचरण का यह समय विशिष्ट अनुक्रम बना रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार ग्रहों की इस प्रकार की विशिष्ट स्थित एक शताब्दी में एक या दो बार ही बनती है।
विशेष ग्रह स्थिति व योग नक्षत्र की साक्षी में महाशिवरात्रि पर की गई शिव साधना का भक्त को पांच गुना अधिक पुण्य फल प्राप्त होगा। महाशिवरात्रि पर ऐतिहासिक संगमेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव का 21 किलोग्राम भस्म से भव्य शृंगार किया जाएगा। इसके लिए मंदिर प्रबंधन की ओर से विशेष तैयारी की जा रही है। वहीं मंदिर में जलाभिषेक के लिए सेवादल की ओर से विशेष तैयारी की गई है। दर्शन व जलाभिषेक के लिए सेवादल की ओर से टोकन सिस्टम लागू किया जाएगा। महाशिवरात्रि (एक मार्च) से पूर्व 25 फरवरी को मंदिर प्रबंधन की ओर भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी।
संगमेश्वर महादेव मंदिर के सचिव महंत विश्वनाथ गिरी ने बताया कि महाशिवरात्रि पर गाय के गोबर से बने उपलों की भस्म से भगवान शिव का शृंगार किया जाएगा। महाशिवरात्रि पर रात 12 बजे संगमेश्वर महादेव का भस्म अभिषेक कर महाआरती की जाएगी। इस दौरान श्रद्धालुओं को जल चढ़ाने के लिए द्वार पर ही रोका जाएगा। इस भस्म को तैयार करने में कई दिन लगते हैं। गाय के गोबर से बने उपलों को जलाकर भस्म तैयार की जाती है, जिसे बाद में कपड़े से छानकर शुद्ध किया जाता है। कहा कि महाशिवरात्रि से पूर्व त्रयोदशी पर भी धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
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सेवादल प्रबंधक भूषण गौतम ने बताया कि महाशिवरात्रि पर अरुणाय धाम में विशाल मेला लगेगा। इसे देखते हुए सेवादल की ओर से विशेष तैयारी की गई है। मंदिर में दर्शनों व जलाभिषेक के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए टोकन सिस्टम लागू होगा। इसके लिए तीन बैज तैयार किए गए हैं। इस बैच के अनुसार पहले 1500 श्रद्धालुओं को मंदिर में दर्शन व जलाभिषेक लिए मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा। दूसरे बैज में 1500 श्रद्धालु कतारबद्ध होकर प्रतीक्षा करेंगे। वहीं तीसरे बैज के श्रद्धालुओं को टोकन देकर समय दिया जाएगा और दिन-रात यह क्रम चलेगा। भूषण गौतम ने बताया कि सेवादल की ओर से कांवड़ियों, बुजुर्गों व दिव्यांगों के लिए अलग से व्यवस्था की जाएगी।
मंदिर के पुजारी एवं ज्योतिषाचार्य शंभू दत्त गौतम ने बताया कि महाशिवरात्रि पर इस साल धनिष्ठा योग लगेगा। धनिष्ठा योग के बाद शतभिषा नक्षत्र रहेगा। उसके बाद शिव और पंचग्रही योग लग जाएगा। मान्यता है कि इस योग में भगवान शिव की पूजा करने से सभी कार्यों में सफलता मिलती है।
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विशेष ग्रह स्थिति व योग नक्षत्र की साक्षी में महाशिवरात्रि पर की गई शिव साधना का भक्त को पांच गुना अधिक पुण्य फल प्राप्त होगा। महाशिवरात्रि पर ऐतिहासिक संगमेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव का 21 किलोग्राम भस्म से भव्य शृंगार किया जाएगा। इसके लिए मंदिर प्रबंधन की ओर से विशेष तैयारी की जा रही है। वहीं मंदिर में जलाभिषेक के लिए सेवादल की ओर से विशेष तैयारी की गई है। दर्शन व जलाभिषेक के लिए सेवादल की ओर से टोकन सिस्टम लागू किया जाएगा। महाशिवरात्रि (एक मार्च) से पूर्व 25 फरवरी को मंदिर प्रबंधन की ओर भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी।
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संगमेश्वर महादेव मंदिर के सचिव महंत विश्वनाथ गिरी ने बताया कि महाशिवरात्रि पर गाय के गोबर से बने उपलों की भस्म से भगवान शिव का शृंगार किया जाएगा। महाशिवरात्रि पर रात 12 बजे संगमेश्वर महादेव का भस्म अभिषेक कर महाआरती की जाएगी। इस दौरान श्रद्धालुओं को जल चढ़ाने के लिए द्वार पर ही रोका जाएगा। इस भस्म को तैयार करने में कई दिन लगते हैं। गाय के गोबर से बने उपलों को जलाकर भस्म तैयार की जाती है, जिसे बाद में कपड़े से छानकर शुद्ध किया जाता है। कहा कि महाशिवरात्रि से पूर्व त्रयोदशी पर भी धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
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सेवादल प्रबंधक भूषण गौतम ने बताया कि महाशिवरात्रि पर अरुणाय धाम में विशाल मेला लगेगा। इसे देखते हुए सेवादल की ओर से विशेष तैयारी की गई है। मंदिर में दर्शनों व जलाभिषेक के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए टोकन सिस्टम लागू होगा। इसके लिए तीन बैज तैयार किए गए हैं। इस बैच के अनुसार पहले 1500 श्रद्धालुओं को मंदिर में दर्शन व जलाभिषेक लिए मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा। दूसरे बैज में 1500 श्रद्धालु कतारबद्ध होकर प्रतीक्षा करेंगे। वहीं तीसरे बैज के श्रद्धालुओं को टोकन देकर समय दिया जाएगा और दिन-रात यह क्रम चलेगा। भूषण गौतम ने बताया कि सेवादल की ओर से कांवड़ियों, बुजुर्गों व दिव्यांगों के लिए अलग से व्यवस्था की जाएगी।
मंदिर के पुजारी एवं ज्योतिषाचार्य शंभू दत्त गौतम ने बताया कि महाशिवरात्रि पर इस साल धनिष्ठा योग लगेगा। धनिष्ठा योग के बाद शतभिषा नक्षत्र रहेगा। उसके बाद शिव और पंचग्रही योग लग जाएगा। मान्यता है कि इस योग में भगवान शिव की पूजा करने से सभी कार्यों में सफलता मिलती है।