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Kurukshetra News: समरसता, सद्भावना उत्सव में उमड़ी श्रद्धा की भीड़

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 22 Oct 2025 01:03 AM IST
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Crowds of devotees gathered at the festival of harmony and goodwill.
शाहाबाद। समरसता, सद्भावना उत्सव कार्यक्रम में गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महापुरूषों के जीवन पर
शाहाबाद। महर्षि वाल्मीकि जयंती के उपलक्ष्य में नगर पालिका प्रधान गुलशन कवातरा की ओर से देवी मंदिर ग्राउंड में समरसता, सद्भावना उत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद के सान्निध्य में कार्यक्रम में स्वामी नित्यानंद, संत संगम नाथ, नंगली कुटिया से संत त्याग पुरी, गुमटी वाले माता देवा जी व जागो जी एवं सिख धर्म के प्रख्यात कथावाचक ज्ञानी साहब सिंह विशेष रूप से उपस्थित हुए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी ने शिरकत की।
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स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि की दिव्यता आज भी वही गौरव लिए हुए है। उन्होंने कहा कि महापुरुषों की ओर से दिए गए अलौकिक ज्ञान की बदौलत समरसता हमारी रगों में है। प्रेम, सद्भाव व समरसता की आज भी जरूरत है। गीता मनीषी ने कहा कि महापुरुष किसी एक समाज के नहीं होते बल्कि पूरी मानवता की धरोहर होते हैं।
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उन्होंने सर्वसमाज को एकजुट होने का आह्वान करते हुए हम एक बनें, हम नेक बनें के उद्घोष भी लगवाए। इससे पूर्व मंच पर उपस्थित तमाम संत जनों ने भी अपने प्रवचनों के माध्यम से उपस्थिति को सराबोर किया।
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कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी ने कहा कि हजारों लाखों वर्ष पूर्व आदि कवि महर्षि वाल्मीकि जी ने जिस महाकाव्य की रचना करके जो संदेश दिया उसे आज तक कोई झुठला नहीं पाया। समाज में बहुत विचारधाराएं और पद्धतियां आईं और चली गईं जिनकी आज कहीं कोई चर्चा नहीं होती। लेकिन महर्षि वाल्मीकि की रचना आज भी याद की जाती है और युगों-युगों तक याद की जाएगी। वाल्मीकि समाज की ओर से शैली कंडारा की अगुवाई में स्वामी ज्ञानानंद सहित मंच पर उपस्थित तमाम संतों को कलम भेंट की गई। शैली कंडारा ने कहा कि केवल सफाई के लिए जाना जाने वाला वाल्मीकि समाज वास्तव में विशुद्ध लेखनी के लिए जाना जाता है। महर्षि वाल्मीकि ने रामायण जैसे महाकाव्य की रचना कर पूरे विश्व को जो अनूठा एवं अद्भुत संदेश दिया, वह आज भी जन-जन की प्रेरणा बना हुआ है।
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