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कुरुक्षेत्र के इन स्थानों से होती है आसानी से गौ तस्करी
ब्यूरो/अमर उजाला/ कुरुक्षेत्र
Updated Mon, 30 Nov 2015 12:34 AM IST
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धर्मनगरी में कई ऐसे निर्जन स्थान है, जहां से गो तस्करी आसानी से हो जाती है। इन रास्तों की भनक पुलिस तक को नहीं होती। इस वजह से गो तस्कर आसानी से गायों का यूपी में ले जाते हैं। कुरुक्षेत्र के उमरी रोड, पिपली-लाडवा रोड को प्रयोग गो तस्कर ज्यादा ही करते हैं।
क्योंकि, इन मार्गों पर कुछ किलोमीटर चलने के बाद ही यूपी की सीमा शुरू हो जाती है और तस्कर पकड़ से बाहर हो जाते हैं।
कुरुक्षेत्र के उमरी गावं से सटी सड़क सीधी जीटी रोड पर आकर मिलती है। इसका फायदा अक्सर गो तस्कर उठाते है। तस्कर उमरी गावं से होते हुए जीटी रोड फिर वहां से इंद्री केवल 15 किलोमीटर दूर रह जाता है। इंद्री से मात्र 10 किलोमीटर के बाद यूपी बॉर्डर शुरू हो जाता है।
यहां से तस्कर पकड़ से बाहर हो जाते हैं। ऐसा नहीं है कि जिला पुलिस गो तस्करों के पीछे नहीं जाती। पुलिस उनका पीछा तो करती है, लेकिन यूपी की सीमा शुरू होते ही हरियाणा की पुलिस के हाथ बंध जाते हैं।
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दूसरी ओर पिपली-लाडवा मार्ग सीधे ही यूपी सीमा की ओर जाता है। इस रोड पर आए दिन गो तस्करी का खुलासा होता रहता है। इस रूट पर तस्कर कुरुक्षेत्र और उसके आसपास के क्षेत्र से पशुओं की तस्करी करते हैं। वे पशुओं को लकर पहले कुरुक्षेत्र से पिपली, पिपली से लाडवा और फिर लाडवा से सीधे रादौर से होते हुए यूपी की सीमा पर स्थित गांवों में प्रवेश कर जाते हैं।
इस बीच यमुना नदी का पुल भी आता है, लेकिन इसका प्रयोग गो तस्कर कम ही करते हैं। हालांकि, अन्य गैरकानूनी कार्यों के लिए यह मुफीद है। इस पुल के दूसरी ओर यूपी बॉर्डर और इस ओर हरियाणा बार्डर के गांव पड़ते हैं।
गो तस्करों के काम करने का समय भी अधिकतर देर शाम या रात का होता है। इस समय शहर की आबादी या तो सो चुकी होती है या फिर सोने की तैयारी कर रही होती है।
इसीका लाभ उठाकर गो तस्कर रात के समय शहर में घूमने वाली गायों, कटड़ो आदि को लादकर यूपी की तरफ भाग जाते हैं।
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क्योंकि, इन मार्गों पर कुछ किलोमीटर चलने के बाद ही यूपी की सीमा शुरू हो जाती है और तस्कर पकड़ से बाहर हो जाते हैं।
कुरुक्षेत्र के उमरी गावं से सटी सड़क सीधी जीटी रोड पर आकर मिलती है। इसका फायदा अक्सर गो तस्कर उठाते है। तस्कर उमरी गावं से होते हुए जीटी रोड फिर वहां से इंद्री केवल 15 किलोमीटर दूर रह जाता है। इंद्री से मात्र 10 किलोमीटर के बाद यूपी बॉर्डर शुरू हो जाता है।
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यहां से तस्कर पकड़ से बाहर हो जाते हैं। ऐसा नहीं है कि जिला पुलिस गो तस्करों के पीछे नहीं जाती। पुलिस उनका पीछा तो करती है, लेकिन यूपी की सीमा शुरू होते ही हरियाणा की पुलिस के हाथ बंध जाते हैं।
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दूसरी ओर पिपली-लाडवा मार्ग सीधे ही यूपी सीमा की ओर जाता है। इस रोड पर आए दिन गो तस्करी का खुलासा होता रहता है। इस रूट पर तस्कर कुरुक्षेत्र और उसके आसपास के क्षेत्र से पशुओं की तस्करी करते हैं। वे पशुओं को लकर पहले कुरुक्षेत्र से पिपली, पिपली से लाडवा और फिर लाडवा से सीधे रादौर से होते हुए यूपी की सीमा पर स्थित गांवों में प्रवेश कर जाते हैं।
इस बीच यमुना नदी का पुल भी आता है, लेकिन इसका प्रयोग गो तस्कर कम ही करते हैं। हालांकि, अन्य गैरकानूनी कार्यों के लिए यह मुफीद है। इस पुल के दूसरी ओर यूपी बॉर्डर और इस ओर हरियाणा बार्डर के गांव पड़ते हैं।
गो तस्करों के काम करने का समय भी अधिकतर देर शाम या रात का होता है। इस समय शहर की आबादी या तो सो चुकी होती है या फिर सोने की तैयारी कर रही होती है।
इसीका लाभ उठाकर गो तस्कर रात के समय शहर में घूमने वाली गायों, कटड़ो आदि को लादकर यूपी की तरफ भाग जाते हैं।