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नोटबंदी पर छलका एनआरआई का दर्द
ब्यूरो/अमर उजाला, कुरूक्षेत्र
Updated Wed, 14 Dec 2016 12:22 AM IST
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नोटबंदी पर छलका एनआरआई का दर्द
- फोटो : Amar Ujala
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अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती पर दो सप्ताह पहले आए भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक नरेंद्र जोशी का कहना है कि वह डालर लेकर घूम रहे हैं, लेकिन भारतीय करेंसी नहीं मिल रही। यूएस की करेंसी एक्सचेंज कराने में उन्हें खासी दिक्कत हो रही है। हालांकि उनके कुछ साथियों के कारण वह रोजमर्रा के कार्यों के लिए बमुश्किल करेंसी जुटाने में सफल हुए।
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उन्होंने कहा कि खुद के पास कैश होने के बावजूद उन्हें जिस तरह की दिक्कत का सामना करना पड़ा, ऐसी नौबत उन विदेशी नागरिकों को अधिक हो रही होगी, जिनके संपर्क भारत में नहीं हैं और जो यहां भारत भ्रमण के लिए आए हुए हैं। जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री की नीयत अच्छी है। मगर तरीका इसलिए गलत है,क्योंकि नोटबंदी से पहले सरकार ने करेंसी का पूरा इंतजाम नहीं किया। इसका कारण है कि आज बैंकों के बाहर लंबी कतारें लगी हैं। आज तीन दिन बाद बैंक खुले हैं। लोग कैश लेने के लिए बैंक खुलने से कई घंटे पहले बाहर कतारबद्ध नजर आ रहे हैं। उनमें वह भी शामिल होते अगर उन्हें अपने मित्रों से सहयोग नहीं मिलता।
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उन्हाेंने कहा कि भारत में हर महीने अमेरिका, आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, कनाडा, जर्मनी और दुनियाभर के देशों से लाखों इनमें इन देशों के मूल नागरिक और अप्रवासी भारतीय भी यहां आते हैं। पत्नी सुनीता जोशी के साथ अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव-2016 में विशेष रूप से आए नरेंद्र जोशी ने बताया कि विदेशों से भारत आने वाले लोग अमूमन लौटते समय अपने पास कुछ ना कुछ इंडियन करेंसी अपने साथ हमेशा लेकर जाते हैं, क्योंकि जाते समय एयरपोर्ट पर एक्स्ट्रा लगेज पेमेंट के अलावा जलपान व अन्य उपयोगी कार्यों के लिए इसकी आवश्यकता पड़ती है। प्रत्येक पर्यटक अपने साथ कम से कम 50 हजार से एक लाख रुपये तक अपने पास ऐसी करेंसी रखता है। लेकिन नोटबंदी के बाद अप्रवासी भारतीयों की ह्वाइट मनी किसी काम की नहीं रहेगी। इन हालात से निपटने के लिए सरकार ने कोई प्रबंध नहीं किया।
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क्रेडिट कार्ड कल्चर पूरी तरह लागू नहीं
सरकार ने एयरपोर्ट पर विदेशी पर्यटकों के लिए प्रति पर्यटक पांच हजार रुपये इंडियन करेंसी एक्सचेंज की व्यवस्था की थी,जो बहुत कम है। भारत में घूमने आने वाले व्यक्ति के लिए इतनी राशि तो टैक्सी पर खर्च होती है। उन्होंने कहा कि अभी तक भारत में क्रेडिट कार्ड मशीन कल्चर पूरी तरह लागू नहीं है। अधिकांश दुकानों पर यह सुविधा नहीं है। इस परेशानी का सामना उन्हें दिल्ली से हिसार जाते समय करना पड़ा। जोशी ने बताया कि उनकी फ्लाइट दिल्ली में रात को 12 बजे पहुंची थी। यहां से हिसार जाते समय उन्हें रास्ते में खाना खाने व चाय तक लिए मोहताज होना पड़ा।
18 घंटे की यात्रा के बाद चार घंटे लगा लाइन में
जोशी ने बताया कि जब एयरपोर्ट पर पर्यटक उतरते हैं तो वहां भी पांच हजार की मनी एक्सचेंज के लिए लंबी लाइनों में लगने के लिए विवश होना पड़ता है। लोगों को यहां लाइनों में घंटों तक खड़े होने को मजबूर होना पड़ता है। वह स्वयं चार घंटे तक लाइन में लगे रहे। करीब 18 घंटे की हवाई यात्रा के बाद यह उनका पीड़ादायक अनुभव रहा।