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उन तीन अनजान राहगीरों के जज्बे को सलाम,जिन्होंने निकाला सैन्य अधिकारियों को
Updated Wed, 25 Jul 2018 12:46 AM IST
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उन तीन अनजान राहगीरों के जज्बे को सलाम, जिन्होंने निकाला सैन्य अधिकारियों को
- मगर इंसानियत को शर्मसार किया उन अनगिनत राहगीरों ने जो तमाशबीन बनकर चले गये
- 500 मीटर की दूरी पर था थाना, मगर राहगीरों की मदद से निकाल एंबुलेंस में भेजा अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। मंगलवार तड़के चार बजे जीटी रोड से गुजर रहे उन तीन अनजान राहगीरों के जज्बे को सलाम है, जिन्होंने हादसे के बाद गाड़ी में फंसे सेना के दो अधिकारियों को बाहर निकाल कर अस्पताल तक पहुंचाने में मदद की। हालांकि इस बीच शर्मनाक स्थिति उन राहगीरों की भी रही, जो तमाशबीन बनकर यह सब कुछ होता देख, मुंह मोड़कर गंतव्य की ओर निकल लिए। संकट की घड़ी में यह हालात सेना के उन दो अधिकारियों के साथ पेश आए,जो देश की रक्षा और सेवा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। पुलिस की स्थिति भी ज्यादा संतोषजनक नहीं कही जा सकती, क्योंकि जब तक पुलिस मौके पर पहुंची, तब तक दोनों सैन्य अधिकारी दुर्घटनाग्रस्त हुई कार से राहगीरों की मदद से बाहर निकाले जा चुके थे। यहां यह बताना भी लाजिमी है कि दुर्घटनास्थल से थाना सदर पिपली की दूरी महज करीब 500 मीटर है। सड़क हादसों के बाद पहले भी इस तरह के हालात और एमरजेंसी सुविधा मिलने में लेटतलीफी कई बार सामने आ चुके हैं।
केयू के प्रोफेसर डॉ. सुनील ढींगड़ा के रिश्तेदार थे कैप्टन कालिया
कैप्टन कालिया के रिश्तेदार एवं केयू के प्रोफेसर डॉ. सुनील ढींगड़ा ने बताया कि इस हादसे के पश्चात मिलिट्री यूनिट को सूचित किया गया था, जहां क्षितिज कालिया के परिजनों को दिल्ली इस घटना की जानकारी दी गई। बताया गया है कि कैप्टन क्षितिज कालिया केयू प्रोफेसर डॉ. ढींगड़ा के ससुराल परिवार के नजदीकी रिश्तेदार थे, इसकी वजह से कालिया के परिजनों ने सुबह करीब पांच बजे इस घटना की जानकारी प्रोफेसर ढींगड़ा की पत्नी को दी थी। बताया गया है कि कैप्टन कालिया मूल रुप से पंजाब के आदमपुर क्षेत्र के रहने वाले थे।
मृत्यु के 10 मिनट बाद पहुंचा था हेलीकॉप्टर
कैप्टन क्षितिज कालिया की जान बचाने के लिए कुरुक्षेत्र के निजी अस्पताल में न्यूरो सर्जन करीब दो घंटे तक संघर्ष करते रहे। डॉ. ढींगड़ा ने बताया कि कैप्टन कालिया की हालत काफी गंभीर थी। उनके मुताबिक डॉक्टरों ने साढ़े नौ बजे कैप्टन कालिया को मृत घोषित कर दिया था, इधर करीब 9 बजकर 4 0 मिनट पर सेना का हेलीकॉप्टर कुरुक्षेत्र के थीम पार्क में प्राइवेट अस्पताल के ठीक सामने उतरा था, लेकिन हेलीकॉप्टर में दिल्ली ले जाने से पहले ही कैप्टन कालिया की मृत्यु हो चुकी थी।
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अविवाहित थे कैप्टन कालिया, चल रही थी रिश्ते की बात
बताया गया है कि कैप्टन क्षितिज कालिया अविवाहित थे। उनके रिश्ते की बात चल रही थी। हालांकि अभी तक कहीं रिश्ता तय नहीं हुआ था। उनके माता पिता अगले दो माह में क्षितिज का विवाह करने की योजना बना रहे थे। बेटे को शादी को जोड़े में देखने से पहले उसका शव देखकर माता-पिता रो रोकर बेसुध हो गए। उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि उनकी इकलौती संतान उन्हें छोड़ कर बहुत दूर जा चुकी है, जहां से उसकी अब कभी वापसी नहीं होगी।
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- मगर इंसानियत को शर्मसार किया उन अनगिनत राहगीरों ने जो तमाशबीन बनकर चले गये
- 500 मीटर की दूरी पर था थाना, मगर राहगीरों की मदद से निकाल एंबुलेंस में भेजा अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। मंगलवार तड़के चार बजे जीटी रोड से गुजर रहे उन तीन अनजान राहगीरों के जज्बे को सलाम है, जिन्होंने हादसे के बाद गाड़ी में फंसे सेना के दो अधिकारियों को बाहर निकाल कर अस्पताल तक पहुंचाने में मदद की। हालांकि इस बीच शर्मनाक स्थिति उन राहगीरों की भी रही, जो तमाशबीन बनकर यह सब कुछ होता देख, मुंह मोड़कर गंतव्य की ओर निकल लिए। संकट की घड़ी में यह हालात सेना के उन दो अधिकारियों के साथ पेश आए,जो देश की रक्षा और सेवा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। पुलिस की स्थिति भी ज्यादा संतोषजनक नहीं कही जा सकती, क्योंकि जब तक पुलिस मौके पर पहुंची, तब तक दोनों सैन्य अधिकारी दुर्घटनाग्रस्त हुई कार से राहगीरों की मदद से बाहर निकाले जा चुके थे। यहां यह बताना भी लाजिमी है कि दुर्घटनास्थल से थाना सदर पिपली की दूरी महज करीब 500 मीटर है। सड़क हादसों के बाद पहले भी इस तरह के हालात और एमरजेंसी सुविधा मिलने में लेटतलीफी कई बार सामने आ चुके हैं।
केयू के प्रोफेसर डॉ. सुनील ढींगड़ा के रिश्तेदार थे कैप्टन कालिया
कैप्टन कालिया के रिश्तेदार एवं केयू के प्रोफेसर डॉ. सुनील ढींगड़ा ने बताया कि इस हादसे के पश्चात मिलिट्री यूनिट को सूचित किया गया था, जहां क्षितिज कालिया के परिजनों को दिल्ली इस घटना की जानकारी दी गई। बताया गया है कि कैप्टन क्षितिज कालिया केयू प्रोफेसर डॉ. ढींगड़ा के ससुराल परिवार के नजदीकी रिश्तेदार थे, इसकी वजह से कालिया के परिजनों ने सुबह करीब पांच बजे इस घटना की जानकारी प्रोफेसर ढींगड़ा की पत्नी को दी थी। बताया गया है कि कैप्टन कालिया मूल रुप से पंजाब के आदमपुर क्षेत्र के रहने वाले थे।
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मृत्यु के 10 मिनट बाद पहुंचा था हेलीकॉप्टर
कैप्टन क्षितिज कालिया की जान बचाने के लिए कुरुक्षेत्र के निजी अस्पताल में न्यूरो सर्जन करीब दो घंटे तक संघर्ष करते रहे। डॉ. ढींगड़ा ने बताया कि कैप्टन कालिया की हालत काफी गंभीर थी। उनके मुताबिक डॉक्टरों ने साढ़े नौ बजे कैप्टन कालिया को मृत घोषित कर दिया था, इधर करीब 9 बजकर 4 0 मिनट पर सेना का हेलीकॉप्टर कुरुक्षेत्र के थीम पार्क में प्राइवेट अस्पताल के ठीक सामने उतरा था, लेकिन हेलीकॉप्टर में दिल्ली ले जाने से पहले ही कैप्टन कालिया की मृत्यु हो चुकी थी।
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अविवाहित थे कैप्टन कालिया, चल रही थी रिश्ते की बात
बताया गया है कि कैप्टन क्षितिज कालिया अविवाहित थे। उनके रिश्ते की बात चल रही थी। हालांकि अभी तक कहीं रिश्ता तय नहीं हुआ था। उनके माता पिता अगले दो माह में क्षितिज का विवाह करने की योजना बना रहे थे। बेटे को शादी को जोड़े में देखने से पहले उसका शव देखकर माता-पिता रो रोकर बेसुध हो गए। उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि उनकी इकलौती संतान उन्हें छोड़ कर बहुत दूर जा चुकी है, जहां से उसकी अब कभी वापसी नहीं होगी।