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भगवान श्री कृष्ण की प्रिय गो माता हैं भारतीय संस्कृति का आधार : रणबीर भारद्वाज
Fri, 19 Sep 2025 01:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Fri, 19 Sep 2025 01:39 AM IST
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कुरुक्षेत्र। कथा के दौरान झूमते श्रद्वालु। विज्ञप्ति
कुरुक्षेत्र। श्री जयराम विद्यापीठ में पितृ पक्ष में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन व्यासपीठ से कथा वाचक आचार्य पं. रणबीर भारद्वाज ने भगवान श्री कृष्ण की बाल-लीलाओं, विशेषकर गोवर्धन लीला और माता यशोदा के चरित्र का वर्णन किया।
उन्होंने कथा में बताया कि किस प्रकार भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर धारण किया और इंद्र देव का अभिमान तोड़ा। आचार्य पं. रणबीर भारद्वाज ने पितृ पक्ष में कथा का उद्देश्य बताया कि पितरों के उद्धार और उनकी आत्मा की शांति मिलती है, इसलिए पितृ पक्ष में पूर्वजों के निमित्त कथा का श्रवण और रसपान किया जाता है। उन्होंने बताया कि इन लीलाओं से भक्ति और श्रद्धा का संचार होता है। भगवान श्री कृष्ण की ओर से गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाना और इंद्र का अभिमान चूर करना, जो दैवीय शक्ति और प्रभु के प्रति समर्पण को दर्शाता है। उन्होंने कथा में माता यशोदा के प्रेम एवं घटनाओं का भी सुंदर वर्णन किया कि इनमें माता यशोदा के अद्भुत प्रेम के साथ भक्ति और ममता का प्रतीक है।
भगवान की कथा सुनने से व्यक्ति को आत्मिक शांति मिलती है और कष्टों से छुटकारा मिलता है। आचार्य प. रणबीर भारद्वाज ने कथा में कहा कि भगवान श्री कृष्ण की प्रिय गौ माता भारतीय संस्कृति का आधार है। भगवान श्री कृष्ण ने गौ अपनी ही विभूति बताया व सदा ही गोरोचन का तिलक अपने मस्तक पर सुशोभित किया। आचार्य रणबीर भारद्वाज ने कथा में कहा कि गोदान करने वाला सभी कष्टों, दुष्कर्मों और सब प्रकार के पापों से मुक्त हो जाता है। कथा समापन पर आरती हुई। इस अवसर पर श्रवण गुप्ता, कुलवंत सैनी, केके कौशिक, खरैती लाल सिंगला, राजेंद्र सिंघल, डाॅ. नरेंद्र पाल गुप्ता, सुरेंद्र गुप्ता, राजेश सिंगला, सतबीर कौशिक, रोहित कौशिक, यशपाल राणा, केसी रंगा भी मौजूद रहे।
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उन्होंने कथा में बताया कि किस प्रकार भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर धारण किया और इंद्र देव का अभिमान तोड़ा। आचार्य पं. रणबीर भारद्वाज ने पितृ पक्ष में कथा का उद्देश्य बताया कि पितरों के उद्धार और उनकी आत्मा की शांति मिलती है, इसलिए पितृ पक्ष में पूर्वजों के निमित्त कथा का श्रवण और रसपान किया जाता है। उन्होंने बताया कि इन लीलाओं से भक्ति और श्रद्धा का संचार होता है। भगवान श्री कृष्ण की ओर से गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाना और इंद्र का अभिमान चूर करना, जो दैवीय शक्ति और प्रभु के प्रति समर्पण को दर्शाता है। उन्होंने कथा में माता यशोदा के प्रेम एवं घटनाओं का भी सुंदर वर्णन किया कि इनमें माता यशोदा के अद्भुत प्रेम के साथ भक्ति और ममता का प्रतीक है।
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भगवान की कथा सुनने से व्यक्ति को आत्मिक शांति मिलती है और कष्टों से छुटकारा मिलता है। आचार्य प. रणबीर भारद्वाज ने कथा में कहा कि भगवान श्री कृष्ण की प्रिय गौ माता भारतीय संस्कृति का आधार है। भगवान श्री कृष्ण ने गौ अपनी ही विभूति बताया व सदा ही गोरोचन का तिलक अपने मस्तक पर सुशोभित किया। आचार्य रणबीर भारद्वाज ने कथा में कहा कि गोदान करने वाला सभी कष्टों, दुष्कर्मों और सब प्रकार के पापों से मुक्त हो जाता है। कथा समापन पर आरती हुई। इस अवसर पर श्रवण गुप्ता, कुलवंत सैनी, केके कौशिक, खरैती लाल सिंगला, राजेंद्र सिंघल, डाॅ. नरेंद्र पाल गुप्ता, सुरेंद्र गुप्ता, राजेश सिंगला, सतबीर कौशिक, रोहित कौशिक, यशपाल राणा, केसी रंगा भी मौजूद रहे।
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