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गोमाता को मात्र वोट हथियाने का जरिया न बनाया जाए : संत गोपाल दास
ब्यूरो/अमर उजाला कुरुक्षेत्र
Updated Sun, 18 Oct 2015 11:50 PM IST
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गोवंश की रक्षा के लिए अपना जीवन लगा देने वाले संत गोपाल दास ने कहा कि गोमाता को मात्र वोट हथियाने का जरिया न बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि चुनावों के समय वोट हासिल करने के लिए राजनीतिक पार्टियां गोमाता की आड़ लेती हैं और सत्ता में आने के बाद गोमाता को दरकिनार कर देती हैं। वर्तमान में राजनीतिक पार्टियों द्वारा बिहार चुनावों में जीत हासिल करने के लिए पूरा पाखंड रचा जा रहा है।
देश के अधिकतर मुस्लिम समुदाय के लोग गोमांस नहीं खाते। गोमांस निर्यात करने के लिए गोवंश का कत्ल किया जा रहा है। संत गोपाल दास रविवार को लाडवा में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह अच्छी बात है कि अनिल विज जैसे मंत्री इस कार्य के लिए आगे आए हैं।
इस काम के लिए उनका प्रदेश की जनता द्वारा सहयोग करना जरूरी है। अनिल विज इसके लिए पहले प्रदेश में गाय को प्रदेश सरकार से राज्य के पशु का दर्जा दिलाकर केंद्र के सामने उदाहरण पेश करें। उन्होंने कहा कि जब नेपाल गोमाता को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दे सकता है, तो भारत क्यों नहीं।
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उन्होंने कहा कि देश के कई राज्यों में गोहत्या पर प्रतिबंध लगने के बावजूद देश से गोमांस का निर्यात हर वर्ष बढ़ रहा है। अधिकतर मुस्लिम समुदाय भी चाहता है कि गोमाता न कटे और इसे राष्ट्रीय पशु का दर्जा मिले। भारत को फिर से विश्व गुरु बनाने के लिए गोमाता को सर्वोपरी रखना ही होगा, अन्यथा यह सपना कभी पूरा नहीं हो सकता है।
अब समय आ गया है कि सरकार इस मामले में सख्ती बरते और पूरे देश में गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने के साथ गोचरान भूमि को कब्जा मुक्त कराए और गोमाता को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दे।
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उन्होंने कहा कि चुनावों के समय वोट हासिल करने के लिए राजनीतिक पार्टियां गोमाता की आड़ लेती हैं और सत्ता में आने के बाद गोमाता को दरकिनार कर देती हैं। वर्तमान में राजनीतिक पार्टियों द्वारा बिहार चुनावों में जीत हासिल करने के लिए पूरा पाखंड रचा जा रहा है।
देश के अधिकतर मुस्लिम समुदाय के लोग गोमांस नहीं खाते। गोमांस निर्यात करने के लिए गोवंश का कत्ल किया जा रहा है। संत गोपाल दास रविवार को लाडवा में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह अच्छी बात है कि अनिल विज जैसे मंत्री इस कार्य के लिए आगे आए हैं।
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इस काम के लिए उनका प्रदेश की जनता द्वारा सहयोग करना जरूरी है। अनिल विज इसके लिए पहले प्रदेश में गाय को प्रदेश सरकार से राज्य के पशु का दर्जा दिलाकर केंद्र के सामने उदाहरण पेश करें। उन्होंने कहा कि जब नेपाल गोमाता को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दे सकता है, तो भारत क्यों नहीं।
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उन्होंने कहा कि देश के कई राज्यों में गोहत्या पर प्रतिबंध लगने के बावजूद देश से गोमांस का निर्यात हर वर्ष बढ़ रहा है। अधिकतर मुस्लिम समुदाय भी चाहता है कि गोमाता न कटे और इसे राष्ट्रीय पशु का दर्जा मिले। भारत को फिर से विश्व गुरु बनाने के लिए गोमाता को सर्वोपरी रखना ही होगा, अन्यथा यह सपना कभी पूरा नहीं हो सकता है।
अब समय आ गया है कि सरकार इस मामले में सख्ती बरते और पूरे देश में गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने के साथ गोचरान भूमि को कब्जा मुक्त कराए और गोमाता को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दे।