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सपेरा, जोगी एवं जंगम का संगम

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 31 Oct 2022 01:49 AM IST
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Confluence of snake charmer, jogi and jangam, Kurukshetra
रत्नावली महोत्सव में लोकवाद्य यंत्रों की धुन पर थिरकते कलाकार। - फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। रत्नावली समारोह में हरियाणा के लोक पारंपरिक वाद्यों की धुनों पर युवा कलाकार व विद्यार्थी थिरक कर रत्नावली समारोह में खूब रंग जमा रहे हैं। समारोह में सपेरा ग्रुप बीन और तुम्बे के माध्यम से, जोगी ग्रुप सारंगी और डफली के माध्यम से, जंगम जोगी झांज और खड़ताल के माध्यम से लोक स्वर लहरियों पर झूमने के लिए युवाओं को मजबूर कर रहे हैं।
युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक डॉ. महासिंह पूनिया ने बताया कि सपेरा ग्रुप तुम्बा, बीन, बांसली, ढोल-डफली वाद्यों के माध्यम से खूब रंग जमा रहा है। इसके साथ ही सपेरों की लोक पारम्परिक वेशभूषा भी कलाकारों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। कलाकार बीन के माध्यम से निकलने वाली लोक पारंपरिक धुनों पर नृत्य कर रत्नावली में खूब रंग जमा रहे हैं।
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जंगम जोगी ग्रुप भगवान शिव की आराधना के माध्यम से शिव और पार्वती की गाथा गाकर युवाओं को शैव दर्शन के साथ-साथ लोकजीवन में शिव और पार्वती की कथा कैसे गाई जाती है उस परम्परा को युवाओं के समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं। यूनिवर्सिटी सांस्कृतिक परिषद के अध्यक्ष डॉ. रामपाल सैनी ने बताया कि हरिकेश का सारंगी का ग्रुप भी युवाओं में विशेष लोकप्रिय हो रहा है।
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उन्होंने बताया सारंगी गायन की परंपरा धीरे-धीरे लोकजीवन में समाप्त हो रही है। हरियाणा के अलग-अलग स्थानों से 10 सारंगी पर गायन प्रस्तुत करने वाले लोक कलाकार रत्नावली समारोह में पहुंचे हैं, वे सारंगी के माध्यम से भजन, सबद, आल्हा, हीर-रांझा, साक्का तथा लोक पारंपरिक गाथाओं को गाकर रत्नावली में हरियाणवी सांस्कृतिक परम्पराओं के इतिहास को प्रस्तुत कर लोक कलाकारों में लोकप्रिय हो रहे हैं।

ब्याह, सगाई, फेरों के गीतों से दर्शक गदगद
समारोह में हरियाणवी लोकमंच पर गांव पपोसा से आई महिलाएं हरियाणा के लोक पारंपरिक गीत गाकर युवा पीढ़ी को लोक सांस्कृतिक परम्पराओं का परिचय दे रही हैं। ग्रामीण महिलाएं ब्याह के गीत, सगाई के गीत, फेरों के गीत, नृत्य के गीत, छठी के गीत, कार्तिक स्नान के गीत, खेती के गीत, विदाई के गीत, फागण के गीत, भात के गीत, जुहारी के गीत, साम्मण के गीत, अहोई के गीत, सांझी के गीत, रीति-रिवाजों के गीत, संस्कारों के गीत गाकर हरियाणा की लोक सांस्कृतिक परम्परा को युवाओं से जोड़ रही हैं। हरियाणा के लोक पारम्परिक सारंगी पर गायन करने वाले कलाकार भी लोक पारम्परिक आल्हा, साक्का गाकर हरियाणा की सांस्कृतिक परंपराओं से युवाओं को जोड़ रहे हैं।

 प्रस्तुति देती गुरुनानक कन्या महाविद्यालय संतपुरा यमुनानगर की कलाकार। संवाद

प्रस्तुति देती गुरुनानक कन्या महाविद्यालय संतपुरा यमुनानगर की कलाकार। संवाद- फोटो : Kurukshetra

रत्नावली महोत्सव में ग्रुप डांस रसिया की प्रस्तुति देते केयू के कलाकार।  संवाद

रत्नावली महोत्सव में ग्रुप डांस रसिया की प्रस्तुति देते केयू के कलाकार। संवाद- फोटो : Kurukshetra

नृत्य करती एसडी महिला महाविद्यालय नरवाना की कलाकार।  संवाद

नृत्य करती एसडी महिला महाविद्यालय नरवाना की कलाकार। संवाद- फोटो : Kurukshetra

ग्रुप डांस रसिया की प्रस्तुति देते आर के एसडी कॉलेज कैथल के कलाकार।  संवाद

ग्रुप डांस रसिया की प्रस्तुति देते आर के एसडी कॉलेज कैथल के कलाकार। संवाद- फोटो : Kurukshetra

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