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Kurukshetra News: गुरुद्वारों में अव्यवस्था पर जताई चिंता
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कुरुक्षेत्र। बैठक के बाद जानकारी देने के दौरान श्री गुरु तेग बहादुर सेवक सभा के सदस्य व मिशन इं
शाहाबाद। मीरी-पीरी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम के बाद श्री गुरु तेग बहादुर सेवक सभा और हरियाणा सिख पंथक दल के सदस्यों ने एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की।
बैठक में हरियाणा सिख मिशन इंचार्ज (एसजीपीसी) सुखविंदर सिंह विशेष रूप से पहुंचे। बैठक में शाहाबाद के ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिबान की वर्तमान दुर्दशा और सिख समाज से जुड़े अहम मुद्दों पर गहन चर्चा की गई।
हरियाणा सिख पंथक दल के प्रवक्ता जगदेव सिंह गाबा ने हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (एचएसजीएमसी) के कार्यों पर सवाल उठाए और कहा कि कमेटी के सदस्य एसजीपीसी की इमारतों और संपत्तियों पर अपनी नजरें गड़ाए हुए है जबकि उनके द्वारा संचालित गुरुद्वारों की हालत अत्यंत दयनीय है।
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उन्होंने बताया कि शाहाबाद के दोनों ऐतिहासिक गुरुद्वारों में सेवादारों की भारी कमी है और सारा जिम्मा केवल ग्रंथी सिंह निभा रहे हैं। इससे सेवा कार्य प्रभावित हो रहे हैं। गाबा ने स्पष्ट कहा कि पहले एचएसजीएमसी को अपने अधीन आने वाले गुरुद्वारों की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना चाहिए, उसके बाद ही उन्हें अन्य संस्थाओं में दखल देने की बात करनी चाहिए। एसजीपीसी के कार्यकाल में कभी भी गुरुद्वारों की यह स्थिति नहीं रही, वहां सेवाओं की उचित व्यवस्था बनी रहती थी। बैठक में बहादुर सिंह, गुरलाल सिंह, मलकीत सिंह, शेर सिंह, मनजीत सिंह खालसा, सुरेंद्र सिंह हंस, हरजीत सिंह राणा, नवनीत सिंह गाबा सहित कई अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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बैठक में हरियाणा सिख मिशन इंचार्ज (एसजीपीसी) सुखविंदर सिंह विशेष रूप से पहुंचे। बैठक में शाहाबाद के ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिबान की वर्तमान दुर्दशा और सिख समाज से जुड़े अहम मुद्दों पर गहन चर्चा की गई।
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हरियाणा सिख पंथक दल के प्रवक्ता जगदेव सिंह गाबा ने हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (एचएसजीएमसी) के कार्यों पर सवाल उठाए और कहा कि कमेटी के सदस्य एसजीपीसी की इमारतों और संपत्तियों पर अपनी नजरें गड़ाए हुए है जबकि उनके द्वारा संचालित गुरुद्वारों की हालत अत्यंत दयनीय है।
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उन्होंने बताया कि शाहाबाद के दोनों ऐतिहासिक गुरुद्वारों में सेवादारों की भारी कमी है और सारा जिम्मा केवल ग्रंथी सिंह निभा रहे हैं। इससे सेवा कार्य प्रभावित हो रहे हैं। गाबा ने स्पष्ट कहा कि पहले एचएसजीएमसी को अपने अधीन आने वाले गुरुद्वारों की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना चाहिए, उसके बाद ही उन्हें अन्य संस्थाओं में दखल देने की बात करनी चाहिए। एसजीपीसी के कार्यकाल में कभी भी गुरुद्वारों की यह स्थिति नहीं रही, वहां सेवाओं की उचित व्यवस्था बनी रहती थी। बैठक में बहादुर सिंह, गुरलाल सिंह, मलकीत सिंह, शेर सिंह, मनजीत सिंह खालसा, सुरेंद्र सिंह हंस, हरजीत सिंह राणा, नवनीत सिंह गाबा सहित कई अन्य सदस्य मौजूद रहे।