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सत्संग में मन की एकाग्रता जरूरी : संत मनदीप
Sat, 04 Oct 2025 11:09 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sat, 04 Oct 2025 11:09 PM IST
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पिपली। सत्संग मे प्रवचन देते मनदीप दास। विज्ञप्ति
संवाद न्यूज एजेंसी
पिपली। किशनपुरा में शनिवार को शंकर कॉलोनी में सत्संग का आयोजन किया गया, जिसमें डेरा श्री गुरु रविदास आश्रम सिरसगढ़ से संत मनदीप दास मुख्य रूप से पधारे। इस दौरान संत मनदीप दास का फूल-मालाओं से भव्य स्वागत किया गया। उन्होंने सत्संग का महात्म्य बताया। कहा कि सत्संग में मन की एकाग्रता जरूरी है।
संत मनदीप दास ने अपने प्रवचन में कहा कि गुरुओं और महापुरुषों का आशीर्वाद लेकर शुरू किए गए सभी कार्य सफल होते हैं। उन्होंने सतगुरु रविदास महाराज के वचनों को उद्धृत किया। उन्होंने सत्संग में मन की एकाग्रता पर जोर देते हुए कहा कि, हम इस तन को लेकर सत्संग में आए हैं, तो मन को भी यहीं रहना चाहिए। मन की गति को बताते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया में सबसे तेज गति मन की है, इसलिए गुरु रविदास महाराज कहते हैं, मन चंगा तो कठौती में गंगा। संत मनदीप ने मन की शुद्धि पर बल देते हुए समझाया कि जैसे हम कपड़ों और शरीर को साफ करने के लिए साबुन लगाते हैं, उसी प्रकार मन को साफ करने के लिए पूर्ण गुरु से राम नाम का साबुन लगाने से मन पवित्र हो जाता है। इस दौरान संत गुरपाल दास ने भी शिरोमणि सतगुरु रविदास जी की महिमा का गुणगान किया और भक्तों को प्रेरणा दी।
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पिपली। किशनपुरा में शनिवार को शंकर कॉलोनी में सत्संग का आयोजन किया गया, जिसमें डेरा श्री गुरु रविदास आश्रम सिरसगढ़ से संत मनदीप दास मुख्य रूप से पधारे। इस दौरान संत मनदीप दास का फूल-मालाओं से भव्य स्वागत किया गया। उन्होंने सत्संग का महात्म्य बताया। कहा कि सत्संग में मन की एकाग्रता जरूरी है।
संत मनदीप दास ने अपने प्रवचन में कहा कि गुरुओं और महापुरुषों का आशीर्वाद लेकर शुरू किए गए सभी कार्य सफल होते हैं। उन्होंने सतगुरु रविदास महाराज के वचनों को उद्धृत किया। उन्होंने सत्संग में मन की एकाग्रता पर जोर देते हुए कहा कि, हम इस तन को लेकर सत्संग में आए हैं, तो मन को भी यहीं रहना चाहिए। मन की गति को बताते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया में सबसे तेज गति मन की है, इसलिए गुरु रविदास महाराज कहते हैं, मन चंगा तो कठौती में गंगा। संत मनदीप ने मन की शुद्धि पर बल देते हुए समझाया कि जैसे हम कपड़ों और शरीर को साफ करने के लिए साबुन लगाते हैं, उसी प्रकार मन को साफ करने के लिए पूर्ण गुरु से राम नाम का साबुन लगाने से मन पवित्र हो जाता है। इस दौरान संत गुरपाल दास ने भी शिरोमणि सतगुरु रविदास जी की महिमा का गुणगान किया और भक्तों को प्रेरणा दी।
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