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Kurukshetra News: हजारा सिंह हत्याकांड में तत्कालीन डीएसपी समेत तीन को क्लीन चिट
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कुरुक्षेत्र। जिला व सत्र न्यायाधीश दिनेश कुमार मित्तल की अदालत ने हजारा सिंह हत्याकांड में निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखते हुए पुलिस अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी। हजारा की पत्नी ने तीन पुलिस अफसरों पर आरोपियों की मदद करने का आरोप लगाया था। अदालत ने अपने फैसले में माना कि पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कोई प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता।
इस्माईलाबाद निवासी सरोज बाला ने प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के 15 फरवरी 2019 के आदेश के खिलाफ दायर की थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि उनके पति हजारा सिंह की 30 दिसंबर 2014 को हत्या कर दी गई थी। वह सुरेश कंसल और बिट्टू कंसल के लिए चालक का काम करते थे। सरोज ने दावा किया कि उनके पति का शव एक वाहन में लाया गया। शव के चेहरे पर सूजन थी और दांत टूटे थे। शिकायतकर्ता ने तीन अज्ञात व्यक्तियों के साथ-साथ तत्कालीन उप पुलिस अधीक्षक पिहोवा, सहायक उप-निरीक्षक नरेश पाल और उप-निरीक्षक सुरेंद्र सिंह पर अपर्याप्त जांच और मुख्य आरोपियों की सहायता करने का आरोप लगाया। शिकायतकर्ता ने कहा कि पुलिस ने निष्पक्ष जांच नहीं की और 1 जून 2017 को मामले को रद्द करने की रिपोर्ट दाखिल की। असंतुष्ट होकर सरोज बाला ने प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत दर्ज की जिसे खारिज कर दिया गया।
इसके बाद उन्होंने सत्र न्यायालय में अपील दायर की। अपील की सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपी सुरेश और बिट्टू कंसल की मृत्यु हो जाने के कारण उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई। अपील में न्याय मित्र (एमिकस क्यूरी) ने तर्क दिया कि मजिस्ट्रेट ने प्रथम दृष्टया साक्ष्यों को नजरअंदाज किया जिसके परिणामस्वरूप उचित न्याय नहीं हुआ। वहीं प्रतिवादी पुलिस अधिकारियों के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि जांच निष्पक्ष थी और शिकायतकर्ता के आरोपों का कोई ठोस साक्ष्य नहीं था।
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इस्माईलाबाद निवासी सरोज बाला ने प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के 15 फरवरी 2019 के आदेश के खिलाफ दायर की थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि उनके पति हजारा सिंह की 30 दिसंबर 2014 को हत्या कर दी गई थी। वह सुरेश कंसल और बिट्टू कंसल के लिए चालक का काम करते थे। सरोज ने दावा किया कि उनके पति का शव एक वाहन में लाया गया। शव के चेहरे पर सूजन थी और दांत टूटे थे। शिकायतकर्ता ने तीन अज्ञात व्यक्तियों के साथ-साथ तत्कालीन उप पुलिस अधीक्षक पिहोवा, सहायक उप-निरीक्षक नरेश पाल और उप-निरीक्षक सुरेंद्र सिंह पर अपर्याप्त जांच और मुख्य आरोपियों की सहायता करने का आरोप लगाया। शिकायतकर्ता ने कहा कि पुलिस ने निष्पक्ष जांच नहीं की और 1 जून 2017 को मामले को रद्द करने की रिपोर्ट दाखिल की। असंतुष्ट होकर सरोज बाला ने प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत दर्ज की जिसे खारिज कर दिया गया।
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इसके बाद उन्होंने सत्र न्यायालय में अपील दायर की। अपील की सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपी सुरेश और बिट्टू कंसल की मृत्यु हो जाने के कारण उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई। अपील में न्याय मित्र (एमिकस क्यूरी) ने तर्क दिया कि मजिस्ट्रेट ने प्रथम दृष्टया साक्ष्यों को नजरअंदाज किया जिसके परिणामस्वरूप उचित न्याय नहीं हुआ। वहीं प्रतिवादी पुलिस अधिकारियों के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि जांच निष्पक्ष थी और शिकायतकर्ता के आरोपों का कोई ठोस साक्ष्य नहीं था।
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