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दावा हवा हवाई, डॉक्टर लिख रहे बाहर की दवाई
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कुरुक्षेत्र। सरकार की ओर से फ्री इलाज का दावा सिविल अस्पताल में हवा हवाई साबित हो रहा है। अस्पताल की डिस्पेंसरी में दवाइयों का टोटा है, जिसके चलते मरीज बाहर से महंगे दामों पर कई प्रकार की दवाइयां खरीदने को मजबूर हो रहे हैं।
पांच रुपये की पर्ची पर इलाज कराने की उम्मीद लिए मरीजों को उस समय झटका लग रहा है जब चिकित्सक कई प्रकार की दवाइयां लिख देते हैं, लेकिन ये सरकारी डिस्पेंसरी में नहीं मिलती। वहीं सिविल अस्पताल आए मरीजों ने सवाल उठाए कि जब सरकार दवाएं उपलब्ध करवाने का दावा कर रही है तो बाहर की दवाई लिखने के पीछे वजह क्या है। सरकार जांच करवाए कि आखिर बाहर की दवाइयां लिखकर मरीजों की जेब क्यों काटी जा रही है।
बाहर से दवाई खरीदना मजबूरी
गांव छोटा स्याना की सतवंत कौर ने बताया कि डॉक्टर ने पांच प्रकार की दवाइयां लिखी, लेकिन जब वह अस्पताल की डिस्पेंसरी से लेने गई उसे बताया गया कि ये दवाईयां यहां नहीं है। उन्हें बाहर से ही खरीदनी होंगी।
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तीन में से दो दवाइयां बाहर से खरीदी
गांव गजलाना के राजेश कुमार का कहना था कि वह सिविल अस्पताल में एलर्जी का इलाज कराने पहुंचा था, जहां चिकित्सक ने उनकी पर्ची पर तीन प्रकार की दवाई लिखी, लेकिन इनमें से दो दवाईयां उन्हें बाहर से ही खरीद करनी पड़ी।
किसी को नहीं मिल रही पूरी दवाई
मिर्जापुर निवासी बलबीर सिंह ने कहा कि वह बीपी और बुखार का इलाज करवाने के लिए सरकारी अस्पताल में आया था। डॉक्टर ने चार प्रकार की दवाईयां लिखी। अस्पताल की डिस्पेंसरी से दो ही दवाइयां मिलीं।
दवाइयां मंगवाने के लिए भेजा पत्र
चिकित्सा अधिकारी डॉ. साराह अग्रवाल का कहना है कि अस्पताल में कुछ दवाइयों की कमी है, जिसकी पूर्ति के लिए वेयर हाउस करनाल से मंगवाने को लेकर पांच माह से पत्र लिख चुके हैं। अभी भी दवाईयां आने का इंतजार है।
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पांच रुपये की पर्ची पर इलाज कराने की उम्मीद लिए मरीजों को उस समय झटका लग रहा है जब चिकित्सक कई प्रकार की दवाइयां लिख देते हैं, लेकिन ये सरकारी डिस्पेंसरी में नहीं मिलती। वहीं सिविल अस्पताल आए मरीजों ने सवाल उठाए कि जब सरकार दवाएं उपलब्ध करवाने का दावा कर रही है तो बाहर की दवाई लिखने के पीछे वजह क्या है। सरकार जांच करवाए कि आखिर बाहर की दवाइयां लिखकर मरीजों की जेब क्यों काटी जा रही है।
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बाहर से दवाई खरीदना मजबूरी
गांव छोटा स्याना की सतवंत कौर ने बताया कि डॉक्टर ने पांच प्रकार की दवाइयां लिखी, लेकिन जब वह अस्पताल की डिस्पेंसरी से लेने गई उसे बताया गया कि ये दवाईयां यहां नहीं है। उन्हें बाहर से ही खरीदनी होंगी।
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तीन में से दो दवाइयां बाहर से खरीदी
गांव गजलाना के राजेश कुमार का कहना था कि वह सिविल अस्पताल में एलर्जी का इलाज कराने पहुंचा था, जहां चिकित्सक ने उनकी पर्ची पर तीन प्रकार की दवाई लिखी, लेकिन इनमें से दो दवाईयां उन्हें बाहर से ही खरीद करनी पड़ी।
किसी को नहीं मिल रही पूरी दवाई
मिर्जापुर निवासी बलबीर सिंह ने कहा कि वह बीपी और बुखार का इलाज करवाने के लिए सरकारी अस्पताल में आया था। डॉक्टर ने चार प्रकार की दवाईयां लिखी। अस्पताल की डिस्पेंसरी से दो ही दवाइयां मिलीं।
दवाइयां मंगवाने के लिए भेजा पत्र
चिकित्सा अधिकारी डॉ. साराह अग्रवाल का कहना है कि अस्पताल में कुछ दवाइयों की कमी है, जिसकी पूर्ति के लिए वेयर हाउस करनाल से मंगवाने को लेकर पांच माह से पत्र लिख चुके हैं। अभी भी दवाईयां आने का इंतजार है।