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नशे का अड्डा बने सेक्टरों के सामुदायिक केंद्र
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लोगों के सुविधा के लिए सेक्टरों में बनाए गए सामुदायिक केंद्र नगर परिषद की अनदेखी के चलते बदहाली के शिकार हो गए हैं। रखरखाव न होने के कारण इनकी हालत बहुत ही दयनीय हो चुकी है। वहीं कुछ सामुदायिक केंद्रों तो ऐसे हैं जो खंडहर नजर आने लगे हैं, ऐसे में सेक्टरवासी यहां रात को तो छोड़ो दिन में भी आने से कतराते हैं। ऐसे सामुदायिक केंद्रों में कोई चौकीदार भी तैनात नहीं है, जिस कारण यह शराबियों के अड्डे बन चुके हैं। सेक्टरवासियों का तो यह भी आरोप है कि इनमें अनैतिक काम भी होते हैं। शहर में आठ रिहायशी सेक्टर पड़ते हैं, जिसमें 30 को छोड़कर बाकि सभी सेक्टरों में सामुदायिक केंद्र बने हुए हैं। लोग इस समस्या की कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन समाधान नहीं हुआ। अमर उजाला टीम ने जब सभी केंद्रों में जाकर स्थिति जांची तो एक भी केंद्र ऐसा नजर नहीं मिला जिसकी हालत कुछ हद तक भी ठीक हो। सभी केंद्रों में गंदगी की भरमार है, शीशे व दरवाजे टूटे पड़े है। कईयों की छतें टपक रही हैं तो कुछ के सीवरेज अटे पड़े है।
यदि इन सामुदायिक केंद्रों में कोई कार्यक्रम की बुकिंग करवाता है तो नगर परिषद द्वारा करीब 6500 रुपये की पर्ची काटी जाती है, जिसमें से कार्यक्रम होने के बाद दो हजार रिफंड भी हो जाते हैं। ऐसे में एक कार्यक्रम मात्र 4500 रुपये में हो जाता है, लेकिन केंद्रों की खस्ताहाल होने के कारण लोंगों को इनका फायदा नहीं मिल रहा। उन्हें आस पास के निजी पैलेसों में लाखों रुपये खर्च करने पड़ रहे है।
सेक्टर तीन के सामुदायिक केंद्र का उद्घाटन 10 अक्तूबर 2003 में तत्काल मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने किया था। कई सालों तक इसका अच्छे से रखरखाव हुआ, लेकिन समय के साथ साथ अनदेखी के चलते इनकी हालत अब दयीनय हो चुकी है। सामुदायिक केंद्र के चारों ओर गंदगी के ढेर लगे हुए है। दीवारें सीलन के कारण जर्जर हो चुकी है। हॉल के शीशे टूटे पड़े है। इतना ही नहीं छत पर शराब की बोतलें पड़ी रहती हैं। इस सेक्टर में करीब साढ़े 4 हजार आबादी है, जिन्हें किसी भी प्रकार के कार्यक्रम के लिए होटलों में जेब खाली करनी पड़ती है।
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सेक्टर- 4 अमर उजाला टीम ने जब सेक्टर-4 के सामुदायिक केंद्र की स्थिति जांची तो सेक्टरवासियों ने बताया कि यह सामुदायिक केंद्र वर्ष 2008 में बना था। वर्ष 2012 तक तो सब ठीक चला। अब बीते नौ वर्ष से यहां कोई चौकीदार नहीं है, जिस कारण सामुदायिक केंद्र का बहुत सा सामान चोरी हो चुका है। सेक्टर के पूर्व प्रधान रामपाल डाबर ने बताया कि कई बार शिकायतें देने बाद कुछ माह पहले दरवाजे लगाए गए थे, लेकिन देखरेख न होने के कारण यह भी टूटने लगे है। बारिश के दौरान केंद्र की छत भी टपकती है।
सेक्टर 7 के सामुदायिक केंद्र का उद्घाटन 01 अगस्त 1997 को तत्कालीन राज्यपाल महावीर प्रसाद ने किया था। विधायक सहित कई बड़े नेता व अधिकारी इस सेक्टर में रहते है। केंद्र में फर्श पर जमी गंदगी से बदबू आ रही है। बदबू के चलते सामुदायिक केंद्र में अंदर सांस तक लेना मुश्किल हो रहा है। केंद्र में बने भवन के पीछे लीक सीवरेज से पानी मैदान में जा रहा है। इसके अलावा पूरे मैदान पड़ी गंदगी इसकी हालत को ब्यान कर रही है।
नगर परिषद के पास केंद्रों की देखरेख का जिम्मा है, लेकिन अपनी जिम्मेदारी निभाने की बजाए उलटा नप अव्यवस्था फैला रही है। सभी केंद्रों को नगर परिषद द्वारा पार्किंग के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं केंद्रों के हॉल में नगर परिषद का सामान रखा रहता है। कोई शादी समारोह होता तो तब भी यह गाड़ियां यूंही अंदर खड़ी रहती है। सेक्टर आठ के केंद्र में पार्किंग बनाई हुई है वहीं यहां लाइटें खराब पड़ी है और सीवरेज भी अटे रहते हैं।
सेक्टर-13 के केंद्र का उद्घाटन 01 अगस्त 1997 को तत्कालीन राज्यपाल महावीर प्रसाद ने किया था। अब इस केंद्र के छत टपकती है। वहीं हॉल की दिवारें सीलन से भरी हुई है। इतना ही नहीं हॉल में बने कीचन को नगर परिषद ने खुद का स्टोर बना लिया है, जिसमें नप के कूड़ेदान रखे हुए है।
नगर परिषद के सेनेटरी इंस्पेक्टर रूपरविंद्र बिश्नोई ने भी माना कि सेक्टरवासियों द्वारा सामुदायिक केंद्रों का इस्तेमाल न कर पाना उनकी जेब का बोझ बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि वह अधिकारियों के साथ बैठक कर जल्द इन सभी केंद्र को ठीक करवाएंगे। वहीं जिन केंद्रों में चौकीदार नहीं है यहां चौकीदार तैनात किए जाएंगे। सोमवार से साफ सफाई का काम शुरु हो जाएगा।
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यदि इन सामुदायिक केंद्रों में कोई कार्यक्रम की बुकिंग करवाता है तो नगर परिषद द्वारा करीब 6500 रुपये की पर्ची काटी जाती है, जिसमें से कार्यक्रम होने के बाद दो हजार रिफंड भी हो जाते हैं। ऐसे में एक कार्यक्रम मात्र 4500 रुपये में हो जाता है, लेकिन केंद्रों की खस्ताहाल होने के कारण लोंगों को इनका फायदा नहीं मिल रहा। उन्हें आस पास के निजी पैलेसों में लाखों रुपये खर्च करने पड़ रहे है।
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सेक्टर तीन के सामुदायिक केंद्र का उद्घाटन 10 अक्तूबर 2003 में तत्काल मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने किया था। कई सालों तक इसका अच्छे से रखरखाव हुआ, लेकिन समय के साथ साथ अनदेखी के चलते इनकी हालत अब दयीनय हो चुकी है। सामुदायिक केंद्र के चारों ओर गंदगी के ढेर लगे हुए है। दीवारें सीलन के कारण जर्जर हो चुकी है। हॉल के शीशे टूटे पड़े है। इतना ही नहीं छत पर शराब की बोतलें पड़ी रहती हैं। इस सेक्टर में करीब साढ़े 4 हजार आबादी है, जिन्हें किसी भी प्रकार के कार्यक्रम के लिए होटलों में जेब खाली करनी पड़ती है।
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सेक्टर- 4 अमर उजाला टीम ने जब सेक्टर-4 के सामुदायिक केंद्र की स्थिति जांची तो सेक्टरवासियों ने बताया कि यह सामुदायिक केंद्र वर्ष 2008 में बना था। वर्ष 2012 तक तो सब ठीक चला। अब बीते नौ वर्ष से यहां कोई चौकीदार नहीं है, जिस कारण सामुदायिक केंद्र का बहुत सा सामान चोरी हो चुका है। सेक्टर के पूर्व प्रधान रामपाल डाबर ने बताया कि कई बार शिकायतें देने बाद कुछ माह पहले दरवाजे लगाए गए थे, लेकिन देखरेख न होने के कारण यह भी टूटने लगे है। बारिश के दौरान केंद्र की छत भी टपकती है।
सेक्टर 7 के सामुदायिक केंद्र का उद्घाटन 01 अगस्त 1997 को तत्कालीन राज्यपाल महावीर प्रसाद ने किया था। विधायक सहित कई बड़े नेता व अधिकारी इस सेक्टर में रहते है। केंद्र में फर्श पर जमी गंदगी से बदबू आ रही है। बदबू के चलते सामुदायिक केंद्र में अंदर सांस तक लेना मुश्किल हो रहा है। केंद्र में बने भवन के पीछे लीक सीवरेज से पानी मैदान में जा रहा है। इसके अलावा पूरे मैदान पड़ी गंदगी इसकी हालत को ब्यान कर रही है।
नगर परिषद के पास केंद्रों की देखरेख का जिम्मा है, लेकिन अपनी जिम्मेदारी निभाने की बजाए उलटा नप अव्यवस्था फैला रही है। सभी केंद्रों को नगर परिषद द्वारा पार्किंग के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं केंद्रों के हॉल में नगर परिषद का सामान रखा रहता है। कोई शादी समारोह होता तो तब भी यह गाड़ियां यूंही अंदर खड़ी रहती है। सेक्टर आठ के केंद्र में पार्किंग बनाई हुई है वहीं यहां लाइटें खराब पड़ी है और सीवरेज भी अटे रहते हैं।
सेक्टर-13 के केंद्र का उद्घाटन 01 अगस्त 1997 को तत्कालीन राज्यपाल महावीर प्रसाद ने किया था। अब इस केंद्र के छत टपकती है। वहीं हॉल की दिवारें सीलन से भरी हुई है। इतना ही नहीं हॉल में बने कीचन को नगर परिषद ने खुद का स्टोर बना लिया है, जिसमें नप के कूड़ेदान रखे हुए है।
नगर परिषद के सेनेटरी इंस्पेक्टर रूपरविंद्र बिश्नोई ने भी माना कि सेक्टरवासियों द्वारा सामुदायिक केंद्रों का इस्तेमाल न कर पाना उनकी जेब का बोझ बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि वह अधिकारियों के साथ बैठक कर जल्द इन सभी केंद्र को ठीक करवाएंगे। वहीं जिन केंद्रों में चौकीदार नहीं है यहां चौकीदार तैनात किए जाएंगे। सोमवार से साफ सफाई का काम शुरु हो जाएगा।