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रत्नावली महोत्सव में चोको चूरमा, गुड़ का हलवा व देशी दही भल्ले का स्वाद
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केयू में हरियाणवी लोक कला प्रदर्शनी में उमड़ी दर्शकों की भीड़। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग की ओर से आयोजित रत्नावली समारोह में हरियाणवी खाना लोक कलाकारों एवं छात्रों में आकर्षण का केंद्र बना है। समारोह में हरियाणवी खान-पान को प्रोत्साहित करने के लिए इस वर्ष विशेष व्यवस्था की गई है। हरियाणा के लोक पारंपरिक व्यंजनों को रत्नावली में स्थान दिया गया है।
युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक डॉ. महासिंह पूनिया ने बताया कि पर्यटन विभाग की ओर से कसूता चूरमा, चोको चूरमा, गुड़ का हलवा, शाही टुकड़ा, पाणी पताशे, मिठी लास्सी, तड़का लास्सी, गुड़ की चाय, देशी खुराक, देशी दहीभल्ले के साथ-साथ देसी थाली की व्यवस्था भी की गई है, जिसमें सब्जी, रोटी, चटणी, रायता का जायका होगा। इसके साथ ही विभाग की ओर से कॉंबो थाली की व्यवस्था भी की गई है. जिसके माध्यम से हरियाणवी खाणा लोक कलाकारों एवं छात्रों के आकर्षण का केन्द्र बन रहा है।
युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के उपनिदेशक डॉ. गुरचरण सिंह ने बताया कि धरोहर हरियाणा संग्रहालय की ओर से भी खान-पान के लिए व्यवस्था की गई है, जिसमें बाकली, खीर-जलेबी खाने के लिए उपलब्ध रहेगा। इसके साथ ही युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग की ओर से भी हरियाणवी खाना सभी को उपलब्ध करवाया जाएगा, जिसमें मालपूड़े, गुलगुले, घी-कसार, गन्ने के रस की खीर, बाजरे की खिचड़ी, बाजरे की रोटी, हर्या साग, गुड़-शक्कर, गुड़ का हलवा छात्रों एवं कलाकारों को खाने के लिए उपलब्ध होगा।
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग की ओर से आयोजित रत्नावली समारोह में हरियाणवी खाना लोक कलाकारों एवं छात्रों में आकर्षण का केंद्र बना है। समारोह में हरियाणवी खान-पान को प्रोत्साहित करने के लिए इस वर्ष विशेष व्यवस्था की गई है। हरियाणा के लोक पारंपरिक व्यंजनों को रत्नावली में स्थान दिया गया है।
युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक डॉ. महासिंह पूनिया ने बताया कि पर्यटन विभाग की ओर से कसूता चूरमा, चोको चूरमा, गुड़ का हलवा, शाही टुकड़ा, पाणी पताशे, मिठी लास्सी, तड़का लास्सी, गुड़ की चाय, देशी खुराक, देशी दहीभल्ले के साथ-साथ देसी थाली की व्यवस्था भी की गई है, जिसमें सब्जी, रोटी, चटणी, रायता का जायका होगा। इसके साथ ही विभाग की ओर से कॉंबो थाली की व्यवस्था भी की गई है. जिसके माध्यम से हरियाणवी खाणा लोक कलाकारों एवं छात्रों के आकर्षण का केन्द्र बन रहा है।
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युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के उपनिदेशक डॉ. गुरचरण सिंह ने बताया कि धरोहर हरियाणा संग्रहालय की ओर से भी खान-पान के लिए व्यवस्था की गई है, जिसमें बाकली, खीर-जलेबी खाने के लिए उपलब्ध रहेगा। इसके साथ ही युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग की ओर से भी हरियाणवी खाना सभी को उपलब्ध करवाया जाएगा, जिसमें मालपूड़े, गुलगुले, घी-कसार, गन्ने के रस की खीर, बाजरे की खिचड़ी, बाजरे की रोटी, हर्या साग, गुड़-शक्कर, गुड़ का हलवा छात्रों एवं कलाकारों को खाने के लिए उपलब्ध होगा।
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