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मार्केट कमेटी नहीं, अब मार्केटिंग बोर्ड देगा प्रदेश की मंडियों की सफाई का ठेका
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ठेका देगा मार्केटिंग बोर्ड भुगतान करेगी प्रदेशभर की 113 मार्केट कमेटियां...यह नियम 21 अगस्त 2020 को जारी टेंडर प्रक्रिया की नियम शर्तों के तहत तय कर दिये गये हैं। हालांकि पहले से स्थानीय स्तर पर पर मंडियों की सफाई व्यवस्था संभाल रही प्राईवेट एजेंसियों में इस नई योजना से हड़कंप मचा है और इस योजना को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
बता दें कि पहले हरियाणा की 113 मार्केट कमेटियां स्थानीय स्तर पर सब्जी और अनाज मंडियों की सफाई व्यवस्था का ठेका सहकारी समितियों और लोकल फर्मों को ही देती थीं। मगर अब प्रदेशभर की सभी सब्जी और अनाज मंडियों में सफाई व्यवस्था के तीन जोन बना दिये गये हैं। प्रत्येक जोन में एक एजेंसी सफाई व्यवस्था को संभालेगी, यानी अब तक जहां 113 फर्में या एजेंसियां पूरे हरियाणा में लोकल स्तर पर सफाई व्यवस्था संभाल रही थीं, उसे अब खास नियम शर्तों के साथ तीन जोन में तीन फर्में ही इस व्यवस्था को संभाल सकती हैं।
मगर इससे पहले हरियाणा कृषि एवं विपणन बोर्ड को सात दिन के भीतर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में यह जवाब देना होगा कि 8 दिसंबर 2016 में सरकार द्वारा जारी अधिसूचना को बोर्ड ने दरकिनार क्यों किया है। इन एजेंसियों के पदाधिकारियों ने बताया कि देश के प्रधानमंत्री लोकल को वोकल बनाने का नारा दे रहे हैं, लेकिन छोटे और लोकल ठेकेदारों की रोजी रोटी पर कुठाराघात करने का काम मार्केटिंग बोर्ड ने नए नियम शर्तें लगाकर पैदा कर दिया है, क्योंकि इससे लोकल स्तर के छोटे ठेकेदार सफाई व्यवस्था का टेंडर नहीं भर सकेंगे। इनका कहना है कि अब प्रदेश की इन लोकल फर्मों और सहकारी समितियों के हाथ खाली होने जा रहे हैं। अपनी रोजी रोटी को बचाने के लिये सहकारी समितियों ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हुए यह गुहार लगाई है कि इसका असर सहकारी समितियों से जुड़े एक हजार से अधिक लोगों की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ेगा और यह सीधे तौर पर उनके पेट पर लात मारने जैसे हालात पैदा करने जैसे होंगे।
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उल्लेखनीय है कि इसके विरोध में सहकारी समितियों और फर्मों के पदाधिकारी गोहाना में कृषि मंत्री से भी मिले चुके हैं, लेकिन कोई संतोष जनक जवाब नहीं मिला था। मजबूरन उन्हें कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा और 15 सितंबर को कोर्ट ने बोर्ड को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ताओं की बात को सुना जाए। गौरतलब है कि कुरुक्षेत्र की जय हनुमान सहकारी समिति के अध्यक्ष विजय लाला और दादा खेड़ा सहकारी समिति के अध्यक्ष राजेंद्र कुमार ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
अब नये नियम शर्तें
अब वही फर्म टेंडर भर सकती है जो 75 लाख की एक माह में बिलिंग कर चुकी है
- बैंक में 50 लाख रुपये की कम से कम कैश क्रेडिट लिमिट जरूरी है
- 20 ट्रैक्टर ट्राली की व्यवस्था होनी चाहिये
साल 2016 से ये थी व्यवस्था
- ठेके के लिये पंजीकृत सहकारी समिति का होना अनिवार्य
- फर्म, समितियों के लिये तीन साल का अनुभव जरूरी
- सेवाएं देने वालों का पीएफ नंबर और ईएसआई होना जरूरी
- ठेकेदार के लिये भारी भरकम बिलिंग या बैंक सीसी की अनिवार्यता नहीं थी
- ट्रैक्टर ट्राली भी आवश्यकता के अनुसार ही उपलब्ध करानी होती थी
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बता दें कि पहले हरियाणा की 113 मार्केट कमेटियां स्थानीय स्तर पर सब्जी और अनाज मंडियों की सफाई व्यवस्था का ठेका सहकारी समितियों और लोकल फर्मों को ही देती थीं। मगर अब प्रदेशभर की सभी सब्जी और अनाज मंडियों में सफाई व्यवस्था के तीन जोन बना दिये गये हैं। प्रत्येक जोन में एक एजेंसी सफाई व्यवस्था को संभालेगी, यानी अब तक जहां 113 फर्में या एजेंसियां पूरे हरियाणा में लोकल स्तर पर सफाई व्यवस्था संभाल रही थीं, उसे अब खास नियम शर्तों के साथ तीन जोन में तीन फर्में ही इस व्यवस्था को संभाल सकती हैं।
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मगर इससे पहले हरियाणा कृषि एवं विपणन बोर्ड को सात दिन के भीतर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में यह जवाब देना होगा कि 8 दिसंबर 2016 में सरकार द्वारा जारी अधिसूचना को बोर्ड ने दरकिनार क्यों किया है। इन एजेंसियों के पदाधिकारियों ने बताया कि देश के प्रधानमंत्री लोकल को वोकल बनाने का नारा दे रहे हैं, लेकिन छोटे और लोकल ठेकेदारों की रोजी रोटी पर कुठाराघात करने का काम मार्केटिंग बोर्ड ने नए नियम शर्तें लगाकर पैदा कर दिया है, क्योंकि इससे लोकल स्तर के छोटे ठेकेदार सफाई व्यवस्था का टेंडर नहीं भर सकेंगे। इनका कहना है कि अब प्रदेश की इन लोकल फर्मों और सहकारी समितियों के हाथ खाली होने जा रहे हैं। अपनी रोजी रोटी को बचाने के लिये सहकारी समितियों ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हुए यह गुहार लगाई है कि इसका असर सहकारी समितियों से जुड़े एक हजार से अधिक लोगों की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ेगा और यह सीधे तौर पर उनके पेट पर लात मारने जैसे हालात पैदा करने जैसे होंगे।
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उल्लेखनीय है कि इसके विरोध में सहकारी समितियों और फर्मों के पदाधिकारी गोहाना में कृषि मंत्री से भी मिले चुके हैं, लेकिन कोई संतोष जनक जवाब नहीं मिला था। मजबूरन उन्हें कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा और 15 सितंबर को कोर्ट ने बोर्ड को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ताओं की बात को सुना जाए। गौरतलब है कि कुरुक्षेत्र की जय हनुमान सहकारी समिति के अध्यक्ष विजय लाला और दादा खेड़ा सहकारी समिति के अध्यक्ष राजेंद्र कुमार ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
अब नये नियम शर्तें
अब वही फर्म टेंडर भर सकती है जो 75 लाख की एक माह में बिलिंग कर चुकी है
- बैंक में 50 लाख रुपये की कम से कम कैश क्रेडिट लिमिट जरूरी है
- 20 ट्रैक्टर ट्राली की व्यवस्था होनी चाहिये
साल 2016 से ये थी व्यवस्था
- ठेके के लिये पंजीकृत सहकारी समिति का होना अनिवार्य
- फर्म, समितियों के लिये तीन साल का अनुभव जरूरी
- सेवाएं देने वालों का पीएफ नंबर और ईएसआई होना जरूरी
- ठेकेदार के लिये भारी भरकम बिलिंग या बैंक सीसी की अनिवार्यता नहीं थी
- ट्रैक्टर ट्राली भी आवश्यकता के अनुसार ही उपलब्ध करानी होती थी