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चैत्र चौदस मेला : श्रद्धालुओं पर भारी पड़ सकती है प्रशासन की लापरवाही
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वाल्मीकि घाट के बीच में दोनों तरफ टूट चुकी रेलिंग। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र/पिहोवा। चैत्र चौदस मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की जान की प्रशासन को कोई परवाह नहीं है। मेले में श्रद्धालुओं के लिए सुविधा और पुख्ता प्रबंध देने के नाम पर मात्र खानापूर्ति की जा रही है। वाल्मीकि घाट पर टूटी रेलिंग और बाहर निकले सरिये हादसों को न्योता दे रहे हैं। घाट के बीच में बनी रेलिंग जर्जर होकर कई जगह से टूटी है। इसके सरिये बाहर हैं। घाट में पानी भरने के बाद सरिये दिखाई नहीं देंगे, जिस कारण कोई भी श्रद्धालु जख्मी हो सकता है।
मेला आरंभ (30 मार्च) होने में एक सप्ताह का समय शेष है। इस सप्ताह में प्रशासन सभी इंतजाम पूरे करने का दम भर रहा है। वाल्मीकि घाट पर लगी रेलिंग दोनों तरफ 15 से ज्यादा जगह से टूटी हुई है। लगातार पानी की मार के कारण रेलिंग भी जर्जर हो चुकी है और कभी भी गिर सकती है। वहीं रेलिंग से 20 से ज्यादा कई ऐसी जगह है जहां से एक-एक फीट तक सरिये बाहर निकले हुए हैं। यह सरिए किसी के लिए भी प्राण घातक सिद्ध हो सकते हैं।
अब इस सप्ताह में रेलिंग का पुनर्निर्माण और मरम्मत करना संभव नहीं है, क्योंकि अभी वाल्मीकि घाट से इंजन लगाकर पानी निकाला जा रहा है। उसके बाद घाट की सफाई होगी और इन काम में ही एक सप्ताह का समय बीत जाएगा। उधर, वाल्मीकि पंचायत सभा और समाज के लोगों ने प्रशासन परअनदेखी करने के आरोप लगाए हैं। इससे समाज में प्रशासन के खिलाफ रोष पनप रहा है। उनका आरोप है कि हर बड़े आयोजन पर वाल्मीकि घाट की तरफ ध्यान नहीं दिया जाता है। हर बार सरस्वती के मुख्य घाट की सफाई, मरम्मत व अन्य कार्य किए जाते हैं, मगर यहां गुहार लगाने के बाद भी काम नहीं होता।
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अधिकारियों ने नहीं सुनी गुहार : किशोरी लाल
किशोरी लाल ने बताया कि घाट की मरम्मत को लेकर कई बार अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं। वह लोग खुद घाट का रखरखाव करते हैं। मेले में उनके समाज के एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु इस घाट पर स्नान, पिंडदान और तर्पण करेंगे। रेलिंग की हालत खस्ता हो चुकी है। घाट में पानी भरने के बाद रेलिंग और सरिये नीचे छिप जाएंगे और बगैर दिखे यह किसी के लिए भी घातक सिद्ध हो सकते हैं।
नदी में छोड़ दिया घाट का गंदा पानी : सुरेंद्र तिवारी
पंडित सुरेंद्र तिवारी ने बताया कि घाट में स्नान के दौरान श्रद्धालुओं पर नजर रखना बेहद मुश्किल है। कई श्रद्धालु रेलिंग के पार भी चले जाते हैं। तब कोई भी हादसा हो सकता है। वहीं घाट के गंदे और दूषित पानी को साथ लगती सरस्वती नदी में छोड़ा जा रहा है। नदी में पानी जमा होने से आसपास का वातावरण दूषित होगा और दुर्गंध के कारण यहां बैठना मुश्किल हो जाएगा।
2019 में भी दी शिकायत: अनिल बागड़ी
वाल्मीकि पंचायत सभा के प्रधान अनिल बागड़ी ने बताया कि साल 2019 में भी घाट की दशा को लेकर अधिकारियों को अवगत कराया गया था। उस समय भी प्रशासन ने कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए थे। इस बार प्रशासन से गुहार लगाई गई थी, मगर कोई कार्रवाई नहीं की गई। अब वे अपने स्तर पर व्यवस्था बनाने में जुटे हैं।
इस बारे में कल बात करते हैं : एसडीएम
मेले में इस प्रकार की लापरवाही के बारे जब पिहोवा के एसडीएम सोनू राम से संपर्क किया गया तो उन्होंने व्हाट्सएप पर मैसेज भेजकर कहा कि इस बारे में कल दिन में बात करते हैं।
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कुरुक्षेत्र/पिहोवा। चैत्र चौदस मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की जान की प्रशासन को कोई परवाह नहीं है। मेले में श्रद्धालुओं के लिए सुविधा और पुख्ता प्रबंध देने के नाम पर मात्र खानापूर्ति की जा रही है। वाल्मीकि घाट पर टूटी रेलिंग और बाहर निकले सरिये हादसों को न्योता दे रहे हैं। घाट के बीच में बनी रेलिंग जर्जर होकर कई जगह से टूटी है। इसके सरिये बाहर हैं। घाट में पानी भरने के बाद सरिये दिखाई नहीं देंगे, जिस कारण कोई भी श्रद्धालु जख्मी हो सकता है।
मेला आरंभ (30 मार्च) होने में एक सप्ताह का समय शेष है। इस सप्ताह में प्रशासन सभी इंतजाम पूरे करने का दम भर रहा है। वाल्मीकि घाट पर लगी रेलिंग दोनों तरफ 15 से ज्यादा जगह से टूटी हुई है। लगातार पानी की मार के कारण रेलिंग भी जर्जर हो चुकी है और कभी भी गिर सकती है। वहीं रेलिंग से 20 से ज्यादा कई ऐसी जगह है जहां से एक-एक फीट तक सरिये बाहर निकले हुए हैं। यह सरिए किसी के लिए भी प्राण घातक सिद्ध हो सकते हैं।
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अब इस सप्ताह में रेलिंग का पुनर्निर्माण और मरम्मत करना संभव नहीं है, क्योंकि अभी वाल्मीकि घाट से इंजन लगाकर पानी निकाला जा रहा है। उसके बाद घाट की सफाई होगी और इन काम में ही एक सप्ताह का समय बीत जाएगा। उधर, वाल्मीकि पंचायत सभा और समाज के लोगों ने प्रशासन परअनदेखी करने के आरोप लगाए हैं। इससे समाज में प्रशासन के खिलाफ रोष पनप रहा है। उनका आरोप है कि हर बड़े आयोजन पर वाल्मीकि घाट की तरफ ध्यान नहीं दिया जाता है। हर बार सरस्वती के मुख्य घाट की सफाई, मरम्मत व अन्य कार्य किए जाते हैं, मगर यहां गुहार लगाने के बाद भी काम नहीं होता।
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अधिकारियों ने नहीं सुनी गुहार : किशोरी लाल
किशोरी लाल ने बताया कि घाट की मरम्मत को लेकर कई बार अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं। वह लोग खुद घाट का रखरखाव करते हैं। मेले में उनके समाज के एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु इस घाट पर स्नान, पिंडदान और तर्पण करेंगे। रेलिंग की हालत खस्ता हो चुकी है। घाट में पानी भरने के बाद रेलिंग और सरिये नीचे छिप जाएंगे और बगैर दिखे यह किसी के लिए भी घातक सिद्ध हो सकते हैं।
नदी में छोड़ दिया घाट का गंदा पानी : सुरेंद्र तिवारी
पंडित सुरेंद्र तिवारी ने बताया कि घाट में स्नान के दौरान श्रद्धालुओं पर नजर रखना बेहद मुश्किल है। कई श्रद्धालु रेलिंग के पार भी चले जाते हैं। तब कोई भी हादसा हो सकता है। वहीं घाट के गंदे और दूषित पानी को साथ लगती सरस्वती नदी में छोड़ा जा रहा है। नदी में पानी जमा होने से आसपास का वातावरण दूषित होगा और दुर्गंध के कारण यहां बैठना मुश्किल हो जाएगा।
2019 में भी दी शिकायत: अनिल बागड़ी
वाल्मीकि पंचायत सभा के प्रधान अनिल बागड़ी ने बताया कि साल 2019 में भी घाट की दशा को लेकर अधिकारियों को अवगत कराया गया था। उस समय भी प्रशासन ने कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए थे। इस बार प्रशासन से गुहार लगाई गई थी, मगर कोई कार्रवाई नहीं की गई। अब वे अपने स्तर पर व्यवस्था बनाने में जुटे हैं।
इस बारे में कल बात करते हैं : एसडीएम
मेले में इस प्रकार की लापरवाही के बारे जब पिहोवा के एसडीएम सोनू राम से संपर्क किया गया तो उन्होंने व्हाट्सएप पर मैसेज भेजकर कहा कि इस बारे में कल दिन में बात करते हैं।

टूटी पड़ी रेलिंग के निकले सरिये। संवाद- फोटो : Kurukshetra

वाल्मीकि घाट पर टूटी पड़ी रेलिंग। संवाद- फोटो : Kurukshetra

घाट में जमा गंदा पानी और टूटी पड़ी रेलिंग। संवाद- फोटो : Kurukshetra