{"_id":"645e4c065ec91420980d6c17","slug":"cbse-overcoming-the-hurdle-of-blindness-gaganjot-secured-more-than-95-percent-marks-in-12th-2023-05-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"CBSE 12th Result: दृष्टिहीनता की बाधा पार कर गगनजोत ने हासिल किए 95 फीसदी से ज्यादा अंक, परिवार में खुशी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
CBSE 12th Result: दृष्टिहीनता की बाधा पार कर गगनजोत ने हासिल किए 95 फीसदी से ज्यादा अंक, परिवार में खुशी
Fri, 12 May 2023 07:54 PM IST
भूपेंद्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, पिपली, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, पिपली, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Fri, 12 May 2023 07:54 PM IST
सार
लड़की के परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। बधाई देने वालों का तांता लगा है। पिता गुरविंद्र सिंह बताते हैं कि उन्हें अपनी बेटी पर पूरा भरोसा था। गगनजोत ने कड़ी मेहनत कर दृष्टिहीनता को बाधा नहीं बनने दिया।
विज्ञापन
गगनजोत ने 12वीं में हासिल किए 95 फीसदी से ज्यादा अंक
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दृढ़ निश्चय के साथ कड़ी मेहनत की जाए तो बड़ी से बड़ी बाधा पार करते हुए भी बुलंदी तक पहुंचा जा सकता है। ऐसा ही कर दिखाया है हरियाणा के कुरुक्षेत्र के पिपली की रहने वाली गगनजोत ने, जिन्होंने 12वीं की परीक्षा में 95.06 फीसदी अंक हासिल किए हैं। उन्होंने अपनी इस उपलब्धि के आड़े दृष्टिहीनता को भी नहीं आने दिया और परीक्षा परिणाम आते ही उन्हें बधाई देने वालों का तांता लग गया।
विज्ञापन
गगनजोत बचपन से ही दृष्टिहीन है तो पिता गुरविंद्र सिंह अनटेहड़ी गांव के राजकीय प्राथमिक स्कूल में शिक्षक है। मां रूपिंद्र कौर घरेलू महिला है। भाई अमरप्रीत भी दृष्टिहीन के साथ-साथ बोल पाने में भी अक्षम है।
विज्ञापन
गगनजोत ने अपना परीक्षा परिणाम आने पर खुशी जताते हुए कहा कि दृष्टिहीनता के चलते उनके माता-पिता ने चंडीगढ़ के सेक्टर 26 में स्थित इंस्टीटयूट ऑफ ब्लाइंड में उन्हें दाखिला दिलाया, जहां वे 10वीं कक्षा में भी टॉपर रही तो इस बार फिर उसने उक्त अंक हासिल कर यह रिकार्ड कायम रखा। उधर, पिता गुरविंद्र सिंह बताते हैं कि उन्हें अपनी बेटी पर पूरा भरोसा था। गगनजोत ने कड़ी मेहनत कर दृष्टिहीनता को बाधा नहीं बनने दिया और अपनी प्रतिभा साबित कर दी।
विज्ञापन
प्रो. बनकर शिक्षा फैलाना ही ध्येय
गगनजोत बताती है कि वह हर समय पढ़ाई में ही लगी रहती थी और उन्हें खुद पर पूरा भरोसा था। जहां संस्थान में शिक्षक बेहतर पढ़ाई करवाते तो वहीं उन्होंने टयूटर भावना से पिपली में भी बहुत कुछ सीखा। माता-पिता के प्रोत्साहन व अपने सभी शिक्षकों की बदौलत उन्होंने यह सफलता हासिल की है। उन्होंने बताया कि परीक्षा के दिनों में वह घर पर ही आ गई थी और यू ट्यूब से भी अपनी परीक्षा के बारे में बहुत सी तैयारी की। उन्होंने लक्ष्य तय किया था कि 12वीं में 95 फीसदी से ज्यादा अंक हासिल करेगी। अब उनका लक्ष्य आगे पढ़ाई के बाद प्रोफेसर बनना है, ताकि समाज में शिक्षा का प्रकाश फैला सके।