{"_id":"62d70f64cc18e21b53682769","slug":"build-an-educated-and-capable-india-kurukshetra-kurukshetra-news-knl115186829","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिक्षित और सक्षम भारत का निर्माण करें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिक्षित और सक्षम भारत का निर्माण करें
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। उन्नत भारत अभियान ग्रामीण क्षेत्रों को समृद्ध करने के लिए तैयार किया गया मानव संसाधन विकास मंत्रालय का एक प्रमुख कार्यक्रम है, जिसका मुख्य उद्देश्य शिक्षित भारत, सक्षम भारत, स्वस्थ भारत, संपन्न भारत तथा आत्मनिर्भर निर्भर भारत का निर्माण करना है। यह बातें उन्नत भारत अभियान के राष्ट्रीय समन्वयक प्रो. वीरेंद्र कुमार विजय कहीं। वे मंगलवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, नई दिल्ली की ओर से प्रायोजित उन्नत भारत अभियान 2.0 के तहत आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में बोल रहे थे।
प्रो. वीरेंद्र ने कहा कि उन्नत भारत अभियान का मिशन उच्च शिक्षण संस्थानों को ग्रामीण भारत के लोगों के साथ काम करने में सक्षम बनाना है ताकि विकास चुनौतियों की पहचान की जा सके और सतत विकास में तेजी लाने के लिए उपयुक्त समाधान विकसित किया जा सके ।उन्होंने कहा कि हमारा भारत देश गांव में बसता है और भारत के विकास के लिए सबसे जरूरी है की हम यहां का विकास पहले करें।
उन्होंने बताया कि अभियान के तहत गांव को उन्नत बनाने के लिए वहां के बुनियादी विकास और शिक्षा पर जोर दिया गया है। शिक्षण संस्थानों की ओर गांवों के विकास से संबंधित स्थानीय आर्थिक, सामाजिक व अन्य समस्याओं का भी समाधान किया जाएगा। इस बात का भी प्रयास रहेगा की जो भी गांव अभी तक विकसित नहीं हो पाए है या आज भी बाकी गांव की अपेक्षा पिछड़े हैं, उनके विकास पर जोर दिया जाए।
विज्ञापन
प्रो. राजेश टंडन, पार्टिसिपेटरी रिसर्च इन एशिया के फाउंडर प्रेसिडेंट व यूजीसी एक्सपर्ट मेंबर ने बतौर मुख्य रिसोर्स पर्सन कहा कि कोरोना काल में कष्ट तो बहुत हुआ, लेकिन बहुत कुछ सीखने को भी मिला। उन्होंने कहा कि दुनिया का अधिकांश ज्ञान लोगों के रोजमर्रा के अनुभवों में है। उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय अनुभव के आधार पर समस्याओं को समाधान नहीं होगा तो पर्यावरण परिवर्तन जैसी समस्याओं को सामना करना पडेगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि ग्रामीण विकास पर आधारित पाठ्यक्रम समय की मांग है जिससे उन्नत भारत अभियान पूर्ण होगा। भारत कृषि प्रधान देश है जिसकी 70 प्रतिशत जनसंख्या गांवों में रहती है। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्र की तरह ग्रामीण क्षेत्र के समग्र विकास के लिए काम करने की जरूरत है।डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. मंजुला चौधरी, यूजीसी की उप-सचिव डॉ. दीक्षा राजपूत तथा प्रो. नटराजन ने भी विचार रखे। इस दौरान कुलसचिव डॉ. संजीव शर्मा सहित शिक्षक प्रतिभागी मौजूद रहे।
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। उन्नत भारत अभियान ग्रामीण क्षेत्रों को समृद्ध करने के लिए तैयार किया गया मानव संसाधन विकास मंत्रालय का एक प्रमुख कार्यक्रम है, जिसका मुख्य उद्देश्य शिक्षित भारत, सक्षम भारत, स्वस्थ भारत, संपन्न भारत तथा आत्मनिर्भर निर्भर भारत का निर्माण करना है। यह बातें उन्नत भारत अभियान के राष्ट्रीय समन्वयक प्रो. वीरेंद्र कुमार विजय कहीं। वे मंगलवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, नई दिल्ली की ओर से प्रायोजित उन्नत भारत अभियान 2.0 के तहत आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में बोल रहे थे।
प्रो. वीरेंद्र ने कहा कि उन्नत भारत अभियान का मिशन उच्च शिक्षण संस्थानों को ग्रामीण भारत के लोगों के साथ काम करने में सक्षम बनाना है ताकि विकास चुनौतियों की पहचान की जा सके और सतत विकास में तेजी लाने के लिए उपयुक्त समाधान विकसित किया जा सके ।उन्होंने कहा कि हमारा भारत देश गांव में बसता है और भारत के विकास के लिए सबसे जरूरी है की हम यहां का विकास पहले करें।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि अभियान के तहत गांव को उन्नत बनाने के लिए वहां के बुनियादी विकास और शिक्षा पर जोर दिया गया है। शिक्षण संस्थानों की ओर गांवों के विकास से संबंधित स्थानीय आर्थिक, सामाजिक व अन्य समस्याओं का भी समाधान किया जाएगा। इस बात का भी प्रयास रहेगा की जो भी गांव अभी तक विकसित नहीं हो पाए है या आज भी बाकी गांव की अपेक्षा पिछड़े हैं, उनके विकास पर जोर दिया जाए।
विज्ञापन
प्रो. राजेश टंडन, पार्टिसिपेटरी रिसर्च इन एशिया के फाउंडर प्रेसिडेंट व यूजीसी एक्सपर्ट मेंबर ने बतौर मुख्य रिसोर्स पर्सन कहा कि कोरोना काल में कष्ट तो बहुत हुआ, लेकिन बहुत कुछ सीखने को भी मिला। उन्होंने कहा कि दुनिया का अधिकांश ज्ञान लोगों के रोजमर्रा के अनुभवों में है। उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय अनुभव के आधार पर समस्याओं को समाधान नहीं होगा तो पर्यावरण परिवर्तन जैसी समस्याओं को सामना करना पडेगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि ग्रामीण विकास पर आधारित पाठ्यक्रम समय की मांग है जिससे उन्नत भारत अभियान पूर्ण होगा। भारत कृषि प्रधान देश है जिसकी 70 प्रतिशत जनसंख्या गांवों में रहती है। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्र की तरह ग्रामीण क्षेत्र के समग्र विकास के लिए काम करने की जरूरत है।डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. मंजुला चौधरी, यूजीसी की उप-सचिव डॉ. दीक्षा राजपूत तथा प्रो. नटराजन ने भी विचार रखे। इस दौरान कुलसचिव डॉ. संजीव शर्मा सहित शिक्षक प्रतिभागी मौजूद रहे।