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Kurukshetra News: इस्माईलाबाद में मारकंडा और लाडवा में राक्षी नदी के टूटे तटबंध

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 10 Jul 2023 01:27 AM IST
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Broken embankment of Rakshi river in Markanda and Ladwa in Ismailabad
संवाद न्यूज एजेंसी
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इस्माईलाबाद/लाडवा। बारिश के चलते मारकंडा व राक्षी नदी उफान पर है। इस कारण इस्माईलाबाद में मारकंडा तो लाडवा में राक्षी नदी के तटबंध टूट गए, जिससे दर्जनों गांवों के हजारों एकड़ क्षेत्र में पानी घुस गया। इस्माईलाबाद में गांव नैसी के निकट मारकंडा नदी का तटबंध टूटने से कई डेरे पूरी तरह से डूब गए। पुलिस ने डेरों में फंसे लोगों को मशक्कत के बाद सुरक्षित निकाला। नहरी विभाग के अधिकारियों की टीम ने भी मौका मुआयना कर आवश्यक इंतजाम किए।
पहाड़ी क्षेत्रों में हुई बरसात के चलते मारकंडा नदी में उफान पर है। कई घंटों तक पानी खतरे के निशान से ऊपर चलता रहा। इसको लेकर डेरों में रहने वाले लोगों में तटबंध टूटने का भय पहले से ही बना हुआ था जो सच साबित हुआ। इससे गांव नैसी, मडाडो, शेरगढ़, जंधेड़ी, जैतपुर आदि गांवों की हजारों एकड़ फसल जलमग्न हो गई। लोगों ने जेसीबी की मदद से तटबंध को दोबारा बनाने का प्रयास भी किया, लेकिन पानी के तेज बहाव के कारण सफल नहीं हो सके। गांव नैसी के समाजसेवी विरेंद्र शर्मा के मुताबिक गांव के लोग तटबंध पर नजर बनाए हुए थे। तटबंध के टूटते ही विभाग और प्रशासन को सूचित कर दिया गया था। उन्होंने बताया कि मारकंडा नदी का पानी वर्षों से क्षेत्र में तबाही मचाता आ रहा है।
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वहीं लाडवा लाडवा में भी राक्षी नदी का तटबंध टूट गया, जिससे आसपास के एरिया में बाढ़ जैसे हालात बन गए। सूचना मिलने पर सरस्वती हैरिटेज बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच व सिंचाई विभाग के अधिकारी भी पहुंचे। धुम्मन सिंह ने बताया कि मानसून के मौसम में अत्यधिक बारिश होने पर सारा पानी राक्षी नदी में आ जाता है। मानसून के दौरान यह स्थिति सरस्वती, घग्गर, मारकंडा आदि सभी नदियों की भी होती है। राक्षी नदी का करीब तीन किलोमीटर का क्षेत्र लाडवा के शहरी क्षेत्र में पड़ता है। बोर्ड द्वारा इस क्षेत्र में नदी के दोनों तरफ के तटों को पक्का किया जाएगा, ताकि अत्यधिक पानी आने से बारिश का पानी शहर में ना आ सके।
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पहले भी मारकंडा के पानी की मार झेल चुके किसान
किसानों ने बताया कि मारकंडा नदी में उफान पहले भी गांव नैसी, मडाडो, जंधेडी, जोधपुर, जैतपुरा, बालापुर, दानीपुर, कलावड़, जलबेहडा, शेरगढ़, जखवाला, तंगोली आदि गांवों की सैकड़ों एकड़ धान की फसल को बर्बाद कर चुका है।
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