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Kurukshetra News: भरत ने उठाई राम की खड़ाऊं, दर्शक भाव विभोर
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लाडवा। श्री राम हनुमान रामलीला समिति द्वारा रामलीला के सातवें दिन भरत मिलाप का मंचन हुआ। जिसमें मुख्यातिथि के रूप में श्री अग्रवाल सभा के प्रधान दुर्गेश गोयल ने परिवार सहित भगवान राम, सीता माता और लक्ष्मण यति की आरती करके शुभारंभ किया। दुर्गेश गोयल ने कहा कि भरत मिलाप केवल एक रामलीला का मंचन या किसी धार्मिक नाटक का हिस्सा मात्र नहीं है बल्कि पूरी जिंदगी की सीख है क्योंकि इसमें दो भाइयों का अपने अपने धर्म का पालन करने का दृढ़ निश्चय मंचित किया गया है, जिससे वर्तमान युग में चल रहे पारिवारिक वाद विवाद पर बहुत बड़ा कटाक्ष प्रदर्शित होता है।
सातवें दिन के मंचन में भरत को ख्वाब में राम, लक्ष्मण व सीता का वन गमन दिखना और अयोध्या पहुंच कर अयोध्या के हालात देख कर चिंता में पढ़कर कैकेयी के महल पहुंचना और अपनी माता कैकेयी से पूरी हकीकत सुनने के बाद कैकेयी को ताने देने जैसे दृश्यों ने माहौल को पूरा जीवंत बना दिया। भरत का माता कौशल्या के साथ विलाप व राम के प्रति समर्पण देख कर कौशल्या सहित सभी माताओं, गुरु जी व नगरवासियों सहित वन जाना और भरत का राम के पास पहुंच कर बिलख बिलख कर रोने के दृश्यों ने भरत मिलाप को एक वास्तविक रूप दे दिया।
राम, लक्ष्मण व सीता का पिता दशरथ के निधन की खबर सुनकर शोक मनाना व भरत का राम को अयोध्या लौटने की जिद को दर्शकों ने बड़े ध्यान से देखा और उसके बाद भरत व राम का अपने अपने धर्म का पालन करने की दलीलों ने मंचन को ज्ञानवर्धक व मंत्रमुग्ध बना दिया। अंत में भरत का राम भक्त ले चला रे राम की निशानी गीत पर रोते हुए राम की खड़ाऊं लेकर जाने वाले दृश्य ने दर्शकों को रोते हुए घर जाने पर मजबूर कर दिया।
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भरत मिलाप मंचन में राम का पात्र अमित सिंघल, लक्ष्मण का पात्र राजेश वर्मा, सीता का पात्र विवेक शर्मा, भरत का पात्र पंकज कम्बोज, शत्रुघ्न का पात्र शिवांश कम्बोज, योधाजीत का पात्र हेमंत सैनी, दूत का पात्र सोमी, कैकेयी का पात्र सौरभ शर्मा, कौशल्या का पात्र इम्ना कटारिया, सुमित्रा का पात्र अभिनव गोयल और गुरु वशिष्ठ का पात्र केशव तायल ने बेहतरीन ढंग से निभाया।
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सातवें दिन के मंचन में भरत को ख्वाब में राम, लक्ष्मण व सीता का वन गमन दिखना और अयोध्या पहुंच कर अयोध्या के हालात देख कर चिंता में पढ़कर कैकेयी के महल पहुंचना और अपनी माता कैकेयी से पूरी हकीकत सुनने के बाद कैकेयी को ताने देने जैसे दृश्यों ने माहौल को पूरा जीवंत बना दिया। भरत का माता कौशल्या के साथ विलाप व राम के प्रति समर्पण देख कर कौशल्या सहित सभी माताओं, गुरु जी व नगरवासियों सहित वन जाना और भरत का राम के पास पहुंच कर बिलख बिलख कर रोने के दृश्यों ने भरत मिलाप को एक वास्तविक रूप दे दिया।
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राम, लक्ष्मण व सीता का पिता दशरथ के निधन की खबर सुनकर शोक मनाना व भरत का राम को अयोध्या लौटने की जिद को दर्शकों ने बड़े ध्यान से देखा और उसके बाद भरत व राम का अपने अपने धर्म का पालन करने की दलीलों ने मंचन को ज्ञानवर्धक व मंत्रमुग्ध बना दिया। अंत में भरत का राम भक्त ले चला रे राम की निशानी गीत पर रोते हुए राम की खड़ाऊं लेकर जाने वाले दृश्य ने दर्शकों को रोते हुए घर जाने पर मजबूर कर दिया।
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भरत मिलाप मंचन में राम का पात्र अमित सिंघल, लक्ष्मण का पात्र राजेश वर्मा, सीता का पात्र विवेक शर्मा, भरत का पात्र पंकज कम्बोज, शत्रुघ्न का पात्र शिवांश कम्बोज, योधाजीत का पात्र हेमंत सैनी, दूत का पात्र सोमी, कैकेयी का पात्र सौरभ शर्मा, कौशल्या का पात्र इम्ना कटारिया, सुमित्रा का पात्र अभिनव गोयल और गुरु वशिष्ठ का पात्र केशव तायल ने बेहतरीन ढंग से निभाया।