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मेरे यार सुदामा रे, बड़े दिनों में आया...भजन पर भक्ति रस में डूबे श्रद्धालु
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कथा के दौरान प्रवचन देते कथाव्यास शुकदेवाचार्य।
- फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। दुख भंजन महादेव मंदिर में कार्तिक मास के उपलक्ष्य में चल रही श्रीमद्भागवद कथा को विश्राम दिया गया। इसमें कथा व्यास शुकदेव आचार्य ने श्री कृष्ण-सुदामा मित्रता, श्रीकृष्ण की कुरुक्षेत्र यात्रा, श्रीकृष्ण-उद्धव संवाद, भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरु प्रसंग और भागवत की शिक्षाएं विस्तार से बताई।
कथा व्यास ने कहा कि मित्रता में कोई ऊंच-नीच व भेदभाव नहीं होता। मुसीबत में साथ निभाने वाला ही सच्चा मित्र होता है। श्रीकृष्ण ने अपने मित्र सुदामा के जीवन की परिस्थितियों को भांपते हुए बिना कुछ पूछे ही सभी सुख प्रदान किए, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। इसी तरह सुदामा ने भी मित्रता धर्म निभाते हुए अपने सखा श्रीकृष्ण को अपनी दयनीय स्थिति के बारे में कुछ नहीं बताया। गायक सीताराम कश्यप और अरुण शर्मा ने भजन मेरे यार सुदामा रे, बड़े दिनों में आए ... सुनाया।
कथावाचक ने बताया कि कथा सुनना तभी सार्थक होगा जब उसकी शिक्षाओं पर भी अमल किया जाए। कथा समाप्ति पर सभी भक्तों ने व्यासपीठ की परिक्रमा करके आशीर्वाद लिया। इस अवसर परभंडारे का आयोजन भी किया गया। यजमान रामपाल गुप्ता, राज गौड़, कश्मीरी लाल, गोवर्धन दास, कृष्ण लाल व ठाकुर नीलमणि ने भागवद जी पर पत्र-पुष्प-दक्षिणादि भेंट करके कथा को विश्राम दिया। यजमानों ने हवन में आहुतियां दी और भक्तों ने भंडारे में भोजन-प्रसाद ग्रहण किया। इस मौके पर हेमराज, अनिल गुप्ता, डॉ. अनिल शर्मा, देवेंद्र कुमार, दीपक शर्मा, पार्थ पाठक, सुरेश शर्मा, अशोक आश्री, गोपाल शर्मा, ज्ञानचंद शर्मा, जगन्नाथ शर्मा आदि मौजूद रहे।
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कुरुक्षेत्र। दुख भंजन महादेव मंदिर में कार्तिक मास के उपलक्ष्य में चल रही श्रीमद्भागवद कथा को विश्राम दिया गया। इसमें कथा व्यास शुकदेव आचार्य ने श्री कृष्ण-सुदामा मित्रता, श्रीकृष्ण की कुरुक्षेत्र यात्रा, श्रीकृष्ण-उद्धव संवाद, भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरु प्रसंग और भागवत की शिक्षाएं विस्तार से बताई।
कथा व्यास ने कहा कि मित्रता में कोई ऊंच-नीच व भेदभाव नहीं होता। मुसीबत में साथ निभाने वाला ही सच्चा मित्र होता है। श्रीकृष्ण ने अपने मित्र सुदामा के जीवन की परिस्थितियों को भांपते हुए बिना कुछ पूछे ही सभी सुख प्रदान किए, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। इसी तरह सुदामा ने भी मित्रता धर्म निभाते हुए अपने सखा श्रीकृष्ण को अपनी दयनीय स्थिति के बारे में कुछ नहीं बताया। गायक सीताराम कश्यप और अरुण शर्मा ने भजन मेरे यार सुदामा रे, बड़े दिनों में आए ... सुनाया।
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कथावाचक ने बताया कि कथा सुनना तभी सार्थक होगा जब उसकी शिक्षाओं पर भी अमल किया जाए। कथा समाप्ति पर सभी भक्तों ने व्यासपीठ की परिक्रमा करके आशीर्वाद लिया। इस अवसर परभंडारे का आयोजन भी किया गया। यजमान रामपाल गुप्ता, राज गौड़, कश्मीरी लाल, गोवर्धन दास, कृष्ण लाल व ठाकुर नीलमणि ने भागवद जी पर पत्र-पुष्प-दक्षिणादि भेंट करके कथा को विश्राम दिया। यजमानों ने हवन में आहुतियां दी और भक्तों ने भंडारे में भोजन-प्रसाद ग्रहण किया। इस मौके पर हेमराज, अनिल गुप्ता, डॉ. अनिल शर्मा, देवेंद्र कुमार, दीपक शर्मा, पार्थ पाठक, सुरेश शर्मा, अशोक आश्री, गोपाल शर्मा, ज्ञानचंद शर्मा, जगन्नाथ शर्मा आदि मौजूद रहे।
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