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Kurukshetra News: मांगों को लेकर दिन भर गरजीं आशा वर्कर
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कुरुक्षेत्र। अपनी मांगाें को लेकर हड़ताल पर उतरी आशा वर्करों का अंदोलन शुक्रवार को भी जारी रहा, इस दाैरान उन्होंने जिला सचिवालय परिसर में जमकर रोष जताया। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं की जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
आशा वर्करों में अपनी मांगों व समस्याओं को लेकर गहरा रोष बना हुआ है और सरकार ने मांग नहीं मानी तो यह आंदोलन और भी तेज होगा। उन्होंने कहा कि उनकी मुख्य मांगों में 26 हजार न्यूनतम वेतन, सफाई कर्मचारी की दर्जा, पीएफ की सुविधा, मंहगाई भत्ता, रेगुलाइजेशन की नीति, सरकार के पैनल अस्पताल में इलाज की सुविधा, 2018 से 2023 तक का रुका भुगतान जारी किया जाना आदि शामिल है।
बाॅक्स
फोटो 42
12 साल से इंसेटिव नहीं : पिंकी
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आशा वर्कर्स यूनियन की जिला प्रधान पिंकी का कहना है कि समय पर काम का पैसा नही मिल पाता है, जिससे वे गरीबी रेखा से नीचे जीने को मजबूर हो रहे है। सर्वे करने के उन्हें पैसे नही दिये जाते तो वहीं 12 साल से इनसेंटिव भी नही दिया गया है।
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फोटो 43
झेलते हैं बदस्लूकी, मानदेय भी कम : धनदेवी
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आशा वर्कर धनदेवी का कहना है कि गांव में डिलीवरी का चार्ज शहरों के मुकाबले कम दिया जाता है । सर्वे से लेकर मरीज को अस्तपताल तक ले जाने का सारा काम आशा वर्करों से करवाया जाता है । सारे दिन काम करने के बाद भी आशा वर्करों से बदस्लूकी की जाती है।
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फोटो 44
हर गांव में हो सरकारी चिकित्सक : सुखवंती
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आशा वर्कर सुखवंती का कहना है कि हर गांव में एक सरकारी चिकित्सक होना चाहिए और सरकारी अस्पताल के बाहर आशा वर्कर के लिए बैठने की सुविधा हो। अस्पताल में गायनी की एक डाॅक्टर होने के कारण महिलाओं को असुविधा का सामना करना पड़ता है, जिसके लिए अस्पताल में गायनी की एक और डॉक्टर नियुक्त की जाए।
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आशा वर्करों में अपनी मांगों व समस्याओं को लेकर गहरा रोष बना हुआ है और सरकार ने मांग नहीं मानी तो यह आंदोलन और भी तेज होगा। उन्होंने कहा कि उनकी मुख्य मांगों में 26 हजार न्यूनतम वेतन, सफाई कर्मचारी की दर्जा, पीएफ की सुविधा, मंहगाई भत्ता, रेगुलाइजेशन की नीति, सरकार के पैनल अस्पताल में इलाज की सुविधा, 2018 से 2023 तक का रुका भुगतान जारी किया जाना आदि शामिल है।
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12 साल से इंसेटिव नहीं : पिंकी
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आशा वर्कर्स यूनियन की जिला प्रधान पिंकी का कहना है कि समय पर काम का पैसा नही मिल पाता है, जिससे वे गरीबी रेखा से नीचे जीने को मजबूर हो रहे है। सर्वे करने के उन्हें पैसे नही दिये जाते तो वहीं 12 साल से इनसेंटिव भी नही दिया गया है।
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झेलते हैं बदस्लूकी, मानदेय भी कम : धनदेवी
आशा वर्कर धनदेवी का कहना है कि गांव में डिलीवरी का चार्ज शहरों के मुकाबले कम दिया जाता है । सर्वे से लेकर मरीज को अस्तपताल तक ले जाने का सारा काम आशा वर्करों से करवाया जाता है । सारे दिन काम करने के बाद भी आशा वर्करों से बदस्लूकी की जाती है।
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हर गांव में हो सरकारी चिकित्सक : सुखवंती
आशा वर्कर सुखवंती का कहना है कि हर गांव में एक सरकारी चिकित्सक होना चाहिए और सरकारी अस्पताल के बाहर आशा वर्कर के लिए बैठने की सुविधा हो। अस्पताल में गायनी की एक डाॅक्टर होने के कारण महिलाओं को असुविधा का सामना करना पड़ता है, जिसके लिए अस्पताल में गायनी की एक और डॉक्टर नियुक्त की जाए।