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Kurukshetra News: धमाल मचा रहे कलाकार, गदगद हो रहे पयर्टक
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के चलते ब्रह्मसरोवर पर लगे शिल्प व सरस मेले के दौरान ब्रह्मसरोवर तट शिल्प व लोक कला का संगम बना हुआ है। कहीं हाथों की हैरान कर देने वाली कारीगरी तो कहीं ढोल की थाप तो कहीं बैंजू व अन्य वाद्य यंत्रों से सुर निकल रहे हैं। मेले में कलाकारों के धमाल से पर्यटक भी गदगद हो रहे हैं।
उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक कला केंद्र पटियाला (एनजेडसीसी) की ओर से हर वर्ष की भांति इस बार भी शिल्पकारों व कलाकारों को बुलाया गया है, जहां 23 राज्यों के शिल्पकार ब्रह्मसरोवर तट पर पहुंचे हुए हैं तो वहीं हर रोज छह से ज्यादा राज्यों के कालकार पर्यटकों का मनोरजंन करने के लिए पहुंच रहे हैं। अभी तक असम, पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, अरूणाचल प्रदेश, उत्तरप्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के कालाकार अपने-अपने प्रदेश की लोक कला के रंग यहां बिखेर चुक हैं। जिसे ब्रह्मसरोवर तट पर लोक कला का अनूठा जमघट देखने को मिल रहा है।
मंगलवार को भी विभिन्न राज्यों के लोक कलाकारों ने पर्यटकों का जमकर मनोरंजन किया। पयर्टक कहीं ढोल की थाप पर तो कहीं बंजारों द्वारा निकाली जा रही धुनों पर थिरकते दिखाई दिए। लोक कलाकारों का भी पयर्टकों के इस उत्साह को देख हौंसला बढ़ रहा है। देर शाम तक यह सिलसिला चलता रहा। उधर शिल्पकला को देख कर भी पर्यटक हैरान है। एक से बढ़कर एक शिल्प कला लेकर शिल्पकार 23 राज्यों से यहां पहुंचे हैं। पर्यटक न केवल इन्हें देख हैरान है बल्कि जमकर खरीदारी भी कर रहे हैं।
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कोरोना काल के बाद ब्रह्मसरोवर पर रौनक
कोरोना काल के बाद अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में पहली बार ऐसी रौनक देखने को मिल रही है, जिसमें देश भर से शिल्पकार व कलाकार अपनी-अपनी कला को प्रदर्शित कर रहे हैं, जिससे ब्रह्मसरोवर तट पर ही लघु भारत का नजारा दिखाई दे रहा है। छह दिसंबर तक चलने वाले शिल्प और सरस मेले का आयोजन रहेगा और और 29 नवंबर से चार दिसंबर तक मुख्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के लिए विभिन्न कमेटियों का गठन किया गया है।
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कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के चलते ब्रह्मसरोवर पर लगे शिल्प व सरस मेले के दौरान ब्रह्मसरोवर तट शिल्प व लोक कला का संगम बना हुआ है। कहीं हाथों की हैरान कर देने वाली कारीगरी तो कहीं ढोल की थाप तो कहीं बैंजू व अन्य वाद्य यंत्रों से सुर निकल रहे हैं। मेले में कलाकारों के धमाल से पर्यटक भी गदगद हो रहे हैं।
उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक कला केंद्र पटियाला (एनजेडसीसी) की ओर से हर वर्ष की भांति इस बार भी शिल्पकारों व कलाकारों को बुलाया गया है, जहां 23 राज्यों के शिल्पकार ब्रह्मसरोवर तट पर पहुंचे हुए हैं तो वहीं हर रोज छह से ज्यादा राज्यों के कालकार पर्यटकों का मनोरजंन करने के लिए पहुंच रहे हैं। अभी तक असम, पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, अरूणाचल प्रदेश, उत्तरप्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के कालाकार अपने-अपने प्रदेश की लोक कला के रंग यहां बिखेर चुक हैं। जिसे ब्रह्मसरोवर तट पर लोक कला का अनूठा जमघट देखने को मिल रहा है।
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मंगलवार को भी विभिन्न राज्यों के लोक कलाकारों ने पर्यटकों का जमकर मनोरंजन किया। पयर्टक कहीं ढोल की थाप पर तो कहीं बंजारों द्वारा निकाली जा रही धुनों पर थिरकते दिखाई दिए। लोक कलाकारों का भी पयर्टकों के इस उत्साह को देख हौंसला बढ़ रहा है। देर शाम तक यह सिलसिला चलता रहा। उधर शिल्पकला को देख कर भी पर्यटक हैरान है। एक से बढ़कर एक शिल्प कला लेकर शिल्पकार 23 राज्यों से यहां पहुंचे हैं। पर्यटक न केवल इन्हें देख हैरान है बल्कि जमकर खरीदारी भी कर रहे हैं।
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कोरोना काल के बाद ब्रह्मसरोवर पर रौनक
कोरोना काल के बाद अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में पहली बार ऐसी रौनक देखने को मिल रही है, जिसमें देश भर से शिल्पकार व कलाकार अपनी-अपनी कला को प्रदर्शित कर रहे हैं, जिससे ब्रह्मसरोवर तट पर ही लघु भारत का नजारा दिखाई दे रहा है। छह दिसंबर तक चलने वाले शिल्प और सरस मेले का आयोजन रहेगा और और 29 नवंबर से चार दिसंबर तक मुख्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के लिए विभिन्न कमेटियों का गठन किया गया है।