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Kurukshetra News: भूमि विवाद में अपीलकर्ता की पुनरीक्षण याचिका खारिज, प्रतिवादियों के कब्जे की पुष्टि
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कुरुक्षेत्र। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार ने पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया जिसमें जगीर सिंह ने पिहोवा के उप-मंडल मजिस्ट्रेट की ओर से 3 अगस्त 2021 को पारित आदेश को चुनौती दी थी। इस आदेश में नायब तहसीलदार ने विवादित भूमि का कब्जा प्रतिवादियों नीलम व अन्य को सौंपने का निर्देश दिया था।
प्रतिवादियों ने सहायक कलेक्टर प्रथम श्रेणी पिहोवा की अदालत में भूमि बंटवारे का मुकदमा दायर किया था। याचिकाकर्ता जगीर सिंह नोटिस के बावजूद सुनवाई में शामिल नहीं हुए जिसके चलते 25 मार्च 2020 को एकपक्षीय आदेश पारित हुआ। इसके खिलाफ जगीर सिंह ने अंबाला मंडल आयुक्त के समक्ष पुनरीक्षण याचिका दायर की जिसमें 10 मार्च 2021 को यथास्थिति बनाए रखने का अंतरिम आदेश मिला। जगीर सिंह ने दावा किया कि उन्होंने विवादित भूमि पर गेहूं की फसल बोई थी जिसे प्रतिवादी काटने से रोक रहे थे।
उपमंडल मजिस्ट्रेट ने पटवारी की रिपोर्ट और स्थल निरीक्षण के आधार पर शांति भंग की आशंका पाते हुए धारा 146 सीआरपीसी के तहत भूमि कुर्क कर नायब तहसीलदार को रिसीवर नियुक्त किया। 3 अगस्त 2021 के आदेश में प्रतिवादियों को कब्जे में पाया गया। जगीर सिंह ने तर्क दिया कि आदेश प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है और उनकी फसलें मौजूद थी। हालांकि प्रतिवादियों ने बताया कि आयुक्त ने 15 नवंबर 2022 को मामले को पुनर्विचार के लिए वापस भेजा था। नई सुनवाई में जगीर सिंह ने भाग लिया और सहायक कलेक्टर ने 22 जुलाई 2024 को प्रतिवादियों के कब्जे की पुष्टि की। जगीर सिंह की पुलिस के समक्ष गलती को स्वीकार किया था।
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न्यायाधीश ने पाया कि खसरा गिरदावरी और मेरी फसल मेरा ब्योरा में प्रतिवादियों का कब्जा दर्ज है। धारा 145 और 146 सीआरपीसी केवल कब्जे से संबंधित हैं और आदेश साक्ष्यों पर आधारित हैं। इसलिए अंत में याचिका खारिज कर दी गई।
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प्रतिवादियों ने सहायक कलेक्टर प्रथम श्रेणी पिहोवा की अदालत में भूमि बंटवारे का मुकदमा दायर किया था। याचिकाकर्ता जगीर सिंह नोटिस के बावजूद सुनवाई में शामिल नहीं हुए जिसके चलते 25 मार्च 2020 को एकपक्षीय आदेश पारित हुआ। इसके खिलाफ जगीर सिंह ने अंबाला मंडल आयुक्त के समक्ष पुनरीक्षण याचिका दायर की जिसमें 10 मार्च 2021 को यथास्थिति बनाए रखने का अंतरिम आदेश मिला। जगीर सिंह ने दावा किया कि उन्होंने विवादित भूमि पर गेहूं की फसल बोई थी जिसे प्रतिवादी काटने से रोक रहे थे।
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उपमंडल मजिस्ट्रेट ने पटवारी की रिपोर्ट और स्थल निरीक्षण के आधार पर शांति भंग की आशंका पाते हुए धारा 146 सीआरपीसी के तहत भूमि कुर्क कर नायब तहसीलदार को रिसीवर नियुक्त किया। 3 अगस्त 2021 के आदेश में प्रतिवादियों को कब्जे में पाया गया। जगीर सिंह ने तर्क दिया कि आदेश प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है और उनकी फसलें मौजूद थी। हालांकि प्रतिवादियों ने बताया कि आयुक्त ने 15 नवंबर 2022 को मामले को पुनर्विचार के लिए वापस भेजा था। नई सुनवाई में जगीर सिंह ने भाग लिया और सहायक कलेक्टर ने 22 जुलाई 2024 को प्रतिवादियों के कब्जे की पुष्टि की। जगीर सिंह की पुलिस के समक्ष गलती को स्वीकार किया था।
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न्यायाधीश ने पाया कि खसरा गिरदावरी और मेरी फसल मेरा ब्योरा में प्रतिवादियों का कब्जा दर्ज है। धारा 145 और 146 सीआरपीसी केवल कब्जे से संबंधित हैं और आदेश साक्ष्यों पर आधारित हैं। इसलिए अंत में याचिका खारिज कर दी गई।