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Kurukshetra News: चेक बाउंस के मामले में दोषी की अपील खारिज
Sun, 30 Nov 2025 01:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sun, 30 Nov 2025 01:26 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार की अदालत ने धारा-138 नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत चेक बाउंस के एक मामले में दोषी प्रदीप कुमार की अपील शुक्रवार को खारिज कर दी। इसके साथ ही निचली अदालत का फैसला पूरी तरह बरकरार रहेगा, जिसमें दोषी को एक साल की साधारण कैद और चेक की रकम का दोगुना करीब 5.76 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया है।
करनाल जिला के घोलपुरा गांव के रहने वाले शिकायतकर्ता प्रिंस ने 2017 में आरोप लगाया था कि उसने प्रदीप कुमार से सफारी गाड़ी खरीदी थी। बाद में गाड़ी का ट्रांसफर नहीं हो सका तो गाड़ी लौटाई गई और कीमत वापस मांगी गई। प्रदीप ने एक लाख 42 हजार रुपये नगद और बाकी एक लाख 46 हजार रुपये के दो चेक दिए, जो कई बार पेश करने पर भी खाते में धन राशि और हस्ताक्षर सही नहीं मिलने के कारण बाउंस हो गए। कानूनी नोटिस के बाद भी पेमेंट नहीं हुआ। निचली अदालत ने 14 नवंबर 2022 को प्रदीप को दोषी ठहराते हुए एक साल जेल व चेक राशि का दोगुना मुआवजा देने की सजा सुनाई। मुआवजा तीन महीने में न देने पर अतिरिक्त तीन माह की कैद का प्रावधान भी रखा गया।
अपील में प्रदीप कुमार का पक्ष था कि उसने कोई कर्ज नहीं लिया था और चेक चोरी होकर दुरुपयोग किए गए। लेकिन अपील न्यायालय ने पाया कि चेक पहले रुपयों की कमी से बाउंस हुए थे, बाद में हस्ताक्षर अलग होने का कारण जोड़ा गया। दोषी ने न तो बैंक को स्टॉप पेमेंट के निर्देश दिए और न ही चेक चोरी की कोई शिकायत की। कानूनी नोटिस और समन मिलने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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कुरुक्षेत्र। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार की अदालत ने धारा-138 नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत चेक बाउंस के एक मामले में दोषी प्रदीप कुमार की अपील शुक्रवार को खारिज कर दी। इसके साथ ही निचली अदालत का फैसला पूरी तरह बरकरार रहेगा, जिसमें दोषी को एक साल की साधारण कैद और चेक की रकम का दोगुना करीब 5.76 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया है।
करनाल जिला के घोलपुरा गांव के रहने वाले शिकायतकर्ता प्रिंस ने 2017 में आरोप लगाया था कि उसने प्रदीप कुमार से सफारी गाड़ी खरीदी थी। बाद में गाड़ी का ट्रांसफर नहीं हो सका तो गाड़ी लौटाई गई और कीमत वापस मांगी गई। प्रदीप ने एक लाख 42 हजार रुपये नगद और बाकी एक लाख 46 हजार रुपये के दो चेक दिए, जो कई बार पेश करने पर भी खाते में धन राशि और हस्ताक्षर सही नहीं मिलने के कारण बाउंस हो गए। कानूनी नोटिस के बाद भी पेमेंट नहीं हुआ। निचली अदालत ने 14 नवंबर 2022 को प्रदीप को दोषी ठहराते हुए एक साल जेल व चेक राशि का दोगुना मुआवजा देने की सजा सुनाई। मुआवजा तीन महीने में न देने पर अतिरिक्त तीन माह की कैद का प्रावधान भी रखा गया।
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अपील में प्रदीप कुमार का पक्ष था कि उसने कोई कर्ज नहीं लिया था और चेक चोरी होकर दुरुपयोग किए गए। लेकिन अपील न्यायालय ने पाया कि चेक पहले रुपयों की कमी से बाउंस हुए थे, बाद में हस्ताक्षर अलग होने का कारण जोड़ा गया। दोषी ने न तो बैंक को स्टॉप पेमेंट के निर्देश दिए और न ही चेक चोरी की कोई शिकायत की। कानूनी नोटिस और समन मिलने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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