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नजर आई नाराजगी, सम्मेलन में नहीं पहुंचे कई स्थानीय संत
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अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव पर पुरुषोत्तमपुरा बाग में रविवार को संत सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में देशभर से कई विख्यात संत महात्माओं ने शिरकत की, लेकिन कई बड़े स्थानीय संतों ने दूरी बनाकर रखी। सम्मेलन से पहले ही कई स्थानीय संतों ने सम्मेलन का निमंत्रण न मिलने पर नाराजगी जाहिर की थी और कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड पर भेदभाव के आरोप भी लगाए थे।
हालांकि बोर्ड द्वारा सभी नाराज संत महात्माओं को मनाने का दावा किया गया, लेकिन रविवार को आयोजित सम्मेलन में कई स्थानीय संतों ने न पहुंचकर नाराजगी जाहिर कर दी। उधर संत सम्मेलन के मंच से गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि मंच पर कई संतों को आना था, लेकिन सोमवार को वाराणसी में काशी कॉरिडोर का लोकार्पण कार्यक्रम होने के कारण कई संत वहां गए हुए हैं। सम्मेलन के दौरान संतों के लिए लगाई कुर्सियां भी खाली पड़ी रहीं।
जब-जब हुई धर्म की हानि, प्रभु ने लिया अवतार
सम्मेलन में पहुंचे मुख्यातिथि राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि जब-जब धरती पर धर्म की हानि हुई है तब-तब भगवान ने धरती पर अवतार लेकर धर्म की रक्षा की है। कभी-भी व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों से घबराना नहीं चाहिए बल्कि इसका डट कर सामना करना चाहिए और जब कभी उलझन की स्थिति पैदा हो तब प्राप्त गीता के ज्ञान पर अपने विवेक से आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र भारत की पावन भूमि है। यहां के जल, थल व वायु से मुक्ति प्राप्त होती है। भारत युगों-युगों से संस्कृति और सभ्यता में विश्व गुरु के रूप में पहचान रखता है।
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सम्मेलन के बीच से योग गुरु जाने लगे तो पंडाल होने लगा खाली
जैसे ही स्वामी रामदेव अपना सात मिनट का संदेश देने के बाद प्रस्थान करने लगे तो पंडाल में बैठे लोग भी उठकर जाने लगे। इस पर स्वामी रामदेव ने फिर से माइक थामा और उन्हें बैठने की गुजारिश की। उन्होंने पतंजलि के सदस्यों को भी कहा कि मेरे सम्मान में कोई उठकर आया तो यह उनका अपमान होगा, जिस पर पतंजलि के सदस्य वापस पंडाल में लौट गए, लेकिन अन्य कई लोग तब तक पंडाल से निकल चुके थे।
इस धरा से विश्व के कोने-कोने में गीता का उपदेश पहुंचा: ज्ञानानंद
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने सभी संतों का परिचय कराते हुए कहा कि पवित्र ग्रंथ गीता राष्ट्र ही नहीं पूरी मानवता का गौरव है। इस धरा से विश्व के कोने-कोने तक पवित्र ग्रंथ गीता का उपदेश पहुंचा है।
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गीता का प्रकाश तेजी से फैल रहा है: स्वामी अवधेशानंद
स्वामी अवधेशानंद ने कहा कि श्रीमद्भागवत गीता का प्रकाश तेजी से फैल रहा है, जिसकी बदौलत दुनिया भारत को बदलते हुए देख रही है। वहीं हरि चेतना महाराज ने कहा कि गीता ही एक ग्रंथ है जिसकी जयंती मनाई जाती है। हर-हर गीता, घर-घर गीता अभियान से सभी को रूबरू कराना है।
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हालांकि बोर्ड द्वारा सभी नाराज संत महात्माओं को मनाने का दावा किया गया, लेकिन रविवार को आयोजित सम्मेलन में कई स्थानीय संतों ने न पहुंचकर नाराजगी जाहिर कर दी। उधर संत सम्मेलन के मंच से गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि मंच पर कई संतों को आना था, लेकिन सोमवार को वाराणसी में काशी कॉरिडोर का लोकार्पण कार्यक्रम होने के कारण कई संत वहां गए हुए हैं। सम्मेलन के दौरान संतों के लिए लगाई कुर्सियां भी खाली पड़ी रहीं।
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जब-जब हुई धर्म की हानि, प्रभु ने लिया अवतार
सम्मेलन में पहुंचे मुख्यातिथि राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि जब-जब धरती पर धर्म की हानि हुई है तब-तब भगवान ने धरती पर अवतार लेकर धर्म की रक्षा की है। कभी-भी व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों से घबराना नहीं चाहिए बल्कि इसका डट कर सामना करना चाहिए और जब कभी उलझन की स्थिति पैदा हो तब प्राप्त गीता के ज्ञान पर अपने विवेक से आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र भारत की पावन भूमि है। यहां के जल, थल व वायु से मुक्ति प्राप्त होती है। भारत युगों-युगों से संस्कृति और सभ्यता में विश्व गुरु के रूप में पहचान रखता है।
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सम्मेलन के बीच से योग गुरु जाने लगे तो पंडाल होने लगा खाली
जैसे ही स्वामी रामदेव अपना सात मिनट का संदेश देने के बाद प्रस्थान करने लगे तो पंडाल में बैठे लोग भी उठकर जाने लगे। इस पर स्वामी रामदेव ने फिर से माइक थामा और उन्हें बैठने की गुजारिश की। उन्होंने पतंजलि के सदस्यों को भी कहा कि मेरे सम्मान में कोई उठकर आया तो यह उनका अपमान होगा, जिस पर पतंजलि के सदस्य वापस पंडाल में लौट गए, लेकिन अन्य कई लोग तब तक पंडाल से निकल चुके थे।
इस धरा से विश्व के कोने-कोने में गीता का उपदेश पहुंचा: ज्ञानानंद
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने सभी संतों का परिचय कराते हुए कहा कि पवित्र ग्रंथ गीता राष्ट्र ही नहीं पूरी मानवता का गौरव है। इस धरा से विश्व के कोने-कोने तक पवित्र ग्रंथ गीता का उपदेश पहुंचा है।
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गीता का प्रकाश तेजी से फैल रहा है: स्वामी अवधेशानंद
स्वामी अवधेशानंद ने कहा कि श्रीमद्भागवत गीता का प्रकाश तेजी से फैल रहा है, जिसकी बदौलत दुनिया भारत को बदलते हुए देख रही है। वहीं हरि चेतना महाराज ने कहा कि गीता ही एक ग्रंथ है जिसकी जयंती मनाई जाती है। हर-हर गीता, घर-घर गीता अभियान से सभी को रूबरू कराना है।