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Kurukshetra News: पीजी कोर्सों के नए पाठ्यक्रम निर्धारण पर कुटा में गहराया रोष
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कुरुक्षेत्र। कुवि प्रशासन द्वारा मसौदा पाठ्यक्रम तैयार करने का सभी विभागों को जारी किया गया पत्
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में नए सत्र से पीजी कोर्सों में नई शिक्षा नीति 2020 को लागू करने की तैयारी है, जिसके लिए सभी विभागों को पीजी कोर्सों के मसौदा पाठ्यक्रम को नई शिक्षा नीति के मुताबिक तैयार करने के आदेश दिए गए हैं। विश्वविद्यालय के सभी विभागों को यह पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है, ताकि 10 जून को होने वाली एकेडमिक काउंसिल की बैठक में इस पर मुहर लग सके।
वहीं पाठ्यक्रम तैयार करने में इतना कम समय दिए जाने पर कुटा में रोष गहरा गया है। कुटा का कहना है कि इतने कम समय में यह कैसे संभव हो सकता है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के शिक्षक संघ (कुटा) की ओर से कुलपति को पत्र भेजा गया है, जिसमें बताया गया कि पाठ्यक्रम बदलाव को लेकर प्रशासन द्वारा दिए गए आदेशों में अस्पष्टता और विस्तृत दिशा-निर्देशों की कमी है, जिससे शिक्षकों के लिए यह सुनिश्चित करना मुश्किल हो जाता है कि नया पाठ्यक्रम शैक्षणिक कठोरता और प्रासंगिकता बनाए रखते हुए सभी निर्धारित मानकों को पूरा करता है या नहीं।
पत्र में यह भी कहा कि एनईपी के अनुरूप नए पाठ्यक्रम के विकास के लिए पर्याप्त शैक्षणिक और प्रशासनिक संसाधनों की आवश्यकता है। कई विभाग वर्तमान में अपर्याप्त समर्थन से जूझ रहे हैं जो इन परिवर्तनों के कुशल और प्रभावी कार्यान्वयन में बाधा डालता है। नए तैयार किए गए पाठ्यक्रम के कारण प्रति संकाय सदस्य को आवंटित शिक्षण घंटों की संख्या में कमी आई है, खासकर मौजूदा ढांचे के तहत। यह कमी छात्रों के साथ संकाय के समग्र जुड़ाव को प्रभावित करती है और उनके मनोबल और उत्पादकता को प्रभावित करती है। हर कोर्स के लिए एक तिहाई कामकाजी घंटों यानी छह घंटे की कटौती की गई है। कार्यभार कम होने से संकाय के लिए व्यावसायिक विकास गतिविधियों, अनुसंधान और अन्य विद्वतापूर्ण गतिविधियों में संलग्न होने के अवसर भी सीमित हो जाते हैं जो उनके शैक्षणिक विकास और विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा के लिए महत्वपूर्ण हैं।
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शिक्षक संघ ने कुलपति से मांग की है कि पीजी कोर्साें में एनईपी 2020 को लागू करने के लिए स्पष्ट, विस्तृत दिशानिर्देश और अतिरिक्त सहायता प्रदान की जाए और नए पाठ्यक्रम ढांचे में सुचारू परिवर्तन में सहायता के लिए अकादमिक विशेषज्ञों की भागीदारी शामिल की जाए ताकि शिक्षकों को पाठ्यक्रम तैयार करने में आसानी हो सके।
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वहीं पाठ्यक्रम तैयार करने में इतना कम समय दिए जाने पर कुटा में रोष गहरा गया है। कुटा का कहना है कि इतने कम समय में यह कैसे संभव हो सकता है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के शिक्षक संघ (कुटा) की ओर से कुलपति को पत्र भेजा गया है, जिसमें बताया गया कि पाठ्यक्रम बदलाव को लेकर प्रशासन द्वारा दिए गए आदेशों में अस्पष्टता और विस्तृत दिशा-निर्देशों की कमी है, जिससे शिक्षकों के लिए यह सुनिश्चित करना मुश्किल हो जाता है कि नया पाठ्यक्रम शैक्षणिक कठोरता और प्रासंगिकता बनाए रखते हुए सभी निर्धारित मानकों को पूरा करता है या नहीं।
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पत्र में यह भी कहा कि एनईपी के अनुरूप नए पाठ्यक्रम के विकास के लिए पर्याप्त शैक्षणिक और प्रशासनिक संसाधनों की आवश्यकता है। कई विभाग वर्तमान में अपर्याप्त समर्थन से जूझ रहे हैं जो इन परिवर्तनों के कुशल और प्रभावी कार्यान्वयन में बाधा डालता है। नए तैयार किए गए पाठ्यक्रम के कारण प्रति संकाय सदस्य को आवंटित शिक्षण घंटों की संख्या में कमी आई है, खासकर मौजूदा ढांचे के तहत। यह कमी छात्रों के साथ संकाय के समग्र जुड़ाव को प्रभावित करती है और उनके मनोबल और उत्पादकता को प्रभावित करती है। हर कोर्स के लिए एक तिहाई कामकाजी घंटों यानी छह घंटे की कटौती की गई है। कार्यभार कम होने से संकाय के लिए व्यावसायिक विकास गतिविधियों, अनुसंधान और अन्य विद्वतापूर्ण गतिविधियों में संलग्न होने के अवसर भी सीमित हो जाते हैं जो उनके शैक्षणिक विकास और विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा के लिए महत्वपूर्ण हैं।
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शिक्षक संघ ने कुलपति से मांग की है कि पीजी कोर्साें में एनईपी 2020 को लागू करने के लिए स्पष्ट, विस्तृत दिशानिर्देश और अतिरिक्त सहायता प्रदान की जाए और नए पाठ्यक्रम ढांचे में सुचारू परिवर्तन में सहायता के लिए अकादमिक विशेषज्ञों की भागीदारी शामिल की जाए ताकि शिक्षकों को पाठ्यक्रम तैयार करने में आसानी हो सके।