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Kurukshetra News: पढ़ाई के साथ-साथ बच्चे न हो जाएं हादसे का शिकार, शिक्षक दे रहे पहरा
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कुरुक्षेत्र। राजकीय प्राथमिक पाठशाला बीड़ अमीन के नवीनीकरण किए कक्ष मेें बच्चों को पढ़ाता शिक्
कुरुक्षेत्र। बारिश होते ही वर्षों से तालाब का रूप ले लेने वाले स्कूल परिसर के 20 साल बाद कुछ हालात बदले लेकिन आज भी हादसे की आशंका बनी रहती है। शिक्षा विभाग इतने वर्षों के दौरान भी कंडम घोषित किए जा चुके दो कमरों के भवन को हटा नहीं सका है। ऐसे में यहां शिक्षकों को हर समय बच्चों की निगरानी रखनी पड़ती है। विद्यार्थियों को बार-बार कंडम भवन के पास न जाने के लिए समझाया जाता है।
ये हालात गांव बीड़ अमीन स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय के हैं। बताया जाता है कि करीब 50 वर्ष पहले यह स्कूल बनाया गया था। कभी दो कमरों तक सिमटे रहे इस स्कूल में दो और अतिरिक्त कमरे वर्ष 2003 में बनाए गए थे। इनका नीलोखेड़ी के तत्कालीन विधायक धर्मपाल ने उद्घाटन किया था। लेकिन इसके बाद भी स्कूल परिसर के हालात बदहाल ही रहे। ये कमरे भी इतने गहरे थे कि हल्की बारिश में ही तालाब बन जाते थे। जिला शिक्षा अधिकारी विनोद कौशिक का कहना है कि कंडम भवन को जल्द हटाया जाएगा।
करीब 18 लाख से बदली सूरत : प्रदीप
शिक्षक प्रदीप कुमार बताते हैं कि पिछले वर्ष ही करीब 18 लाख की लागत से विभाग व ग्राम पंचायत के सहयोग से स्कूल की सूरत बदल पाई। वर्ष 2003 में बने कमरों के साथ-साथ पूरे परिसर को नया व आकर्षक स्वरूप दिया गया लेकिन जिन कक्षों में अब कक्षाएं लगाई जा रही हैं उन्हीं से सटी कंडम बिल्डिंग आज भी ज्यों की त्यों खड़ी है।
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नहीं तैयार हुआ कोई भी ठेकेदार : सीमा
स्कूल इंचार्ज सीमा रानी का कहना है कि विभाग ने कंडम भवन की कीमत करीब 97 हजार 633 रुपये तय की है। आज बोली की तिथि थी और कई लोग बोली लगाने भी पहुंचे लेकिन इतनी कीमत देने को कोई तैयार नहीं हुआ। बच्चे इस भवन की ओर न जाएं, यह निगरानी तो रखनी ही पड़ती है।
रिपोर्ट कार्ड
बच्चों की संख्या-- 66
स्वीकृत शिक्षक पद-- 3
वर्तमान शिक्षक-- 2 स्थायी, 1 डेपुटेशन
कमरों की संख्या-- 04
पंखे-- हैं
पीने का पानी-- सबमर्सीबल
शौचालय-- 2
शिक्षकों और ग्रामीणों में यह डर आज भी ज्यों का त्यों बना हुआ है।
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ये हालात गांव बीड़ अमीन स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय के हैं। बताया जाता है कि करीब 50 वर्ष पहले यह स्कूल बनाया गया था। कभी दो कमरों तक सिमटे रहे इस स्कूल में दो और अतिरिक्त कमरे वर्ष 2003 में बनाए गए थे। इनका नीलोखेड़ी के तत्कालीन विधायक धर्मपाल ने उद्घाटन किया था। लेकिन इसके बाद भी स्कूल परिसर के हालात बदहाल ही रहे। ये कमरे भी इतने गहरे थे कि हल्की बारिश में ही तालाब बन जाते थे। जिला शिक्षा अधिकारी विनोद कौशिक का कहना है कि कंडम भवन को जल्द हटाया जाएगा।
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करीब 18 लाख से बदली सूरत : प्रदीप
शिक्षक प्रदीप कुमार बताते हैं कि पिछले वर्ष ही करीब 18 लाख की लागत से विभाग व ग्राम पंचायत के सहयोग से स्कूल की सूरत बदल पाई। वर्ष 2003 में बने कमरों के साथ-साथ पूरे परिसर को नया व आकर्षक स्वरूप दिया गया लेकिन जिन कक्षों में अब कक्षाएं लगाई जा रही हैं उन्हीं से सटी कंडम बिल्डिंग आज भी ज्यों की त्यों खड़ी है।
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नहीं तैयार हुआ कोई भी ठेकेदार : सीमा
स्कूल इंचार्ज सीमा रानी का कहना है कि विभाग ने कंडम भवन की कीमत करीब 97 हजार 633 रुपये तय की है। आज बोली की तिथि थी और कई लोग बोली लगाने भी पहुंचे लेकिन इतनी कीमत देने को कोई तैयार नहीं हुआ। बच्चे इस भवन की ओर न जाएं, यह निगरानी तो रखनी ही पड़ती है।
रिपोर्ट कार्ड
बच्चों की संख्या
स्वीकृत शिक्षक पद
वर्तमान शिक्षक
कमरों की संख्या
पंखे
पीने का पानी
शौचालय
शिक्षकों और ग्रामीणों में यह डर आज भी ज्यों का त्यों बना हुआ है।

कुरुक्षेत्र। राजकीय प्राथमिक पाठशाला बीड़ अमीन के नवीनीकरण किए कक्ष मेें बच्चों को पढ़ाता शिक्

कुरुक्षेत्र। राजकीय प्राथमिक पाठशाला बीड़ अमीन के नवीनीकरण किए कक्ष मेें बच्चों को पढ़ाता शिक्