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कॉलेज में करोड़ों के घोटाले का आरोप

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 25 Apr 2022 01:42 AM IST
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Alleged scam of crores in college, Kurukshetra
पत्रकारों से बातचीत करते पवन शर्मा पम्मी, राजकुमार शर्मा, राजेंद्र भारद्वाज। संवाद - फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। सेक्टर पांच स्थित एक कॉलेज में करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार किए जाने के आरोप लगे हैं। यह आरोप कॉलेज की सोसायटी के पूर्व पदाधिकारियों व आजीवन सदस्यों की ओर से लगाए गए हैं। आरोप लगाने वालों ने रविवार को एक निजी होटल में पत्रकार वार्ता कर निष्पक्ष जांच करने की मांग की। जांच न होने की स्थिति में संघर्ष कमेटी का गठन कर बड़े आंदोलन की भी चेतावनी भी दी।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए सोसायटी के आजीवन सदस्य एवं पूर्व पार्षद पवन शर्मा पम्मी, पूर्व महासचिव राजकुमार शर्मा, आजीवन सदस्य राजेंद्र भारद्वाज, नानू राम शर्मा व पूर्व उपप्रधान सतपाल शर्मा ने कहा कि वे इन घोटालों की शिकायत सीएम व संबंधित अधिकारियों व विभागों को भी कर चुके हैं। बाकायदा विजिलेंस को भी इन घोटालों की शिकायत की गई। इस पर निदेशक हायर एजूकेशन ने एक जांच कमेटी गठित की, जो बीती 22 अप्रैल को कॉलेज में जांच करने के लिए पहुंची, लेकिन प्राचार्य व समस्त कार्यालय स्टॉफ कॉलेज से गायब मिला।
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आरोप लगाया कि प्राचार्य ने तो इस जांच से बचने के लिए पांच दिन का मेडिकल अवकाश ले लिया और टीम को जांच के लिए संबंधित कॉलेज का सारा रिकार्ड भी उपलब्ध नहीं हो पाया। अब यह टीम बुधवार 27 अप्रैल को एक बार फिर दोबारा कॉलेज में जांच के लिए आएगी। सदस्यों ने आरोप लगाया कि प्राचार्य 30 अप्रैल को सेवानिवृत्त हो रहे हैं इसलिए वह रिटायरमेंट के सारे फायदे लेकर इस जांच से बचने की कोशिश कर रहे हैं।
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सदस्यों ने बताया वर्ष 2010 से 2013 तक मैनेजमेंट कमेटी के प्रयासों से कॉलेज की सोसायटी के करीब 7000 आजीवन सदस्य बनाए गए। इस दौरान प्राचार्य ने घोटाले करने शुरू कर दिए। यहां तक कि सोसायटी के संविधान में भी संशोधन करते हुए आजीवन सदस्यों के वोट के अधिकार को भी खत्म करवा दिया और उन सदस्यों को घोटालों का पता भी नहीं चला, जिसके चलते सदस्यों का आंकड़ा घटता चला गया। प्रधान व कमेटी न होने की स्थिति में सरकार ने कॉलेज में प्रशासक नियुक्त किया।

आरोप लगाया कि प्राचार्य ने 31 मार्च से पूर्व मैनेजमेंट कमेटी के चुनाव करवाने की भी योजना बनाई ताकि अपने पसंदीदा सहयोगी को प्रधान बनवा सके, लेकिन जैसे ही वोटों के कटने की जानकारी आजीवन सदस्यों को मिली तो सदस्यों ने उच्च न्यायालय की शरण ली और चुनाव पर रोक लग गई।
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