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जिले में डीएपी खाद की 2500 एमटी की जरूरत उपलब्ध आधी भी नहीं, 1300 एमटी कम

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 16 Oct 2021 10:30 PM IST
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Allegation: Shopkeepers are selling fertilizers at Rs 200 more
गेहूं व आलू की बिजाई का सीजन सिर पर है, मगर जिलेभर में यूरिया व डीएपी खाद की किल्लत के चलते किसान बेहद परेशान है। किसान दुकानदारों से 200 रुपये महंगी खाद खरीदने को मजबूर है तथा उसके लिए भी मिन्नतें करनी पड़ती है। जानकारी के अनुसार जिलेभर में यूरिया की लागत 20 हजार एमटी है, जबकि सरकार की ओर से 13 हजार एमटी यूरिया उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं जिले भर में 2500 एमटी डीएपी खाद की आवश्यकता है, जबकि आधी भी उपलब्ध नहीं हो रही है। सरकार की ओर 1200 एमटी डीएपी खाद उपलब्ध कराई जा रही है। जिले में खाद की कमी को पूरा करने को लेकर भाकियू के नेतृत्व में किसानों ने करीब 10 दिन पहले मांग पत्र सौंपा था, मगर अभी तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अब भाकियू ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही खाद की कमी को पूरा नहीं किया गया तो किसान बड़ा आंदोलन करने से परहेज नहीं करेंगे। किसान बलदेव शर्मा, गौरव, अमनदीप सिंह, अश्वनी ने बताया कि किसानों को इस समय अगली फसल की बिजाई के लिए डीएपी व यूरिया खाद की बहुत जरूरत है, मगर किसानों को खाद नहीं मिल रही है। इसके कारण आलू, सरसो, बरसीन, गेहूं की बिजाई प्रभावित होगी। किसानों ने आरोप लगाया कि कुछ दुकानदार खाद की कालाबाजारी कर रहे है। उन्होंने खाद को स्टॉक करके रखा है, जिसे सरकारी रेट 1200 रुपये की बजाए 200 रुपये बढ़ाकर बेचा रहा है। इसके साथ किसानों पर दवाइयां व पेस्टीसाइड खरीदने का दबाव बनाया जाता है। दवाइयां व पेस्टीसाइड खरीदने पर ही खाद उपलब्ध कराई जाती है। भाकियू प्रवक्ता प्रिंस वडैच व पूर्व युवा प्रदेशाध्यक्ष संजीव आलमपुर न बताया कि जिलेभर में खाद की कमी को लेकर भाकियू ने डीसी को ज्ञापन सौंपा था। उसे तकरीबन 10 दिन का समय बीत चुका है, मगर खाद की कमी को पूरा नहीं किया जा रहा है। अगर शीघ्र ही इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया तो भाकियू किसानों के साथ मिलकर कोई बड़ा निर्णय लेगी। इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार व प्रशासन की होगी।
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कृषि विभाग के क्वालिटी कंट्रोल इंस्पेक्टर शशिपाल शर्मा ने बताया कि जिले में खाद का संकट चल रहा है। जल्द ही डीएपी खाद का रैक लगने वाला है, जिससे किसानों को कुछ राहत जरूर मिलेगी, लेकिन जरुरत के हिसाब डीएपी खाद की कमी रहेगी। इसके लिए किसानों को डीएपी की जगह एनपीके खाद डालने के लिए जागरूक किया जा रहा है। एपीके खाद में नाइट्रोजन, फास्फेट और पोटेशियम तीनों मौजूद है, जो अंकुरित पौधे के लिए आवश्यक है। अभी तक कालाबाजारी को लेकर कोई शिकायत नहीं मिली है, अगर कोई शिकायत मिलेगी तो कार्रवाई की जाएगी।
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