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जेंडर संवेदनशीलता के लिए सभी वर्गों को मिलकर काम करना होगा : प्रो. मंजुला

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 21 Jul 2022 02:48 AM IST
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All sections will have to work together for gender sensitivity
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की डीन एकेडमिक अफेयर्स और मानव संसाधन विकास केंद्र की निदेशिका प्रो. मंजुला चौधरी ने कहा कि जेंडर संवेदनशीलता विस्तृत विषय है, जिस पर विश्वविद्यालय और समाज के सभी वर्गों को मिलकर काम करना होगा। वे बुधवार को कुवि के महिला अध्ययन शोध केंद्र और यूजीसी मानव संसाधन विकास केंद्र की ओर से पीएचडी शोधार्थियों के लिए तीन दिवसीय ऑनलाइन जेंडर संवेदनशीलता कार्यशाला को संबोधित कर रहीं थी। इससे पहले उन्होंने बतौर मुख्य अतिथि कार्यशाला का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय स्तर पर दो व्यवस्था बनी हुई हैं जो जेंडर संवेदनशीलता विषय पर काम करती हैं।
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उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में महिलाओं के यौन उत्पीड़न के विरुद्ध जेंडर संवेदनशीलता कमेटी सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय का महिला अध्ययन शोध केंद्र समाज के सभी वर्गों के लिए जेंडर संवेदनशीलता पर कार्य करता है। उन्होंने कहा कि समाज में व्याप्त लैंगिक पूर्वाग्रहों को कम करने के लिए हमें अपनी विचार प्रक्रिया को परखना और दुरुस्त करना होगा, ताकि हम लैंगिक समानता की ओर अग्रसर हो सकें।
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इस अवसर पर महिला अध्ययन शोध केंद्र की निदेशिका प्रो. अनिता दुआ ने कहा कि देश की आधी जनसंख्या महिलाओं की है, लेकिन यदि विभिन्न क्षेत्रों में उनकी भागीदारी देंखे तो वह नगण्य है। विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक, शारीरिक और मनोवैज्ञानिक बाधाएं इसके लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र में महिला शोधार्थियों की संख्या बहुत कम है। हमें स्वास्थ्य, तकनीकी ज्ञान का उपयोग वित्तीय साक्षरता आदि विषयों पर भी काम करने की जरूरत है।
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ऑनलाइन कार्यशाला के प्रथम सत्र की मुख्य वक्ता के रूप में मानव संसाधन विकास केंद्र की पूर्व निदेशक प्रो. नीरा वर्मा ने लैंगिक पूर्वाग्रह एवं लैंगिक समानता पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि समानता पर आधारित समाज वह है जहां जेंडर शब्द पर चर्चा ही आवश्यक न हो। उन्होंने विश्व आर्थिक मंच की ओर से प्रकाशित वैश्विक लैंगिक अंतर रिपोर्ट का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि भारत की स्थिति लैंगिक असमानता के संदर्भ में पड़ोसी देशों जैसे नेपाल, भूटान, बंगलादेश से भी पीछे है। अत: हमें इस तथ्य का विश्लेषण करना होगा कि महिलाओं के आगे न आने के कारण उनकी क्षमताओं का सही उपयोग नहीं हो पा रहा है। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में सुषमा स्वराज इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन सर्विस, विदेश मंत्रालय की निदेशक डॉ. हितेषी लोमाश ने नेतृत्व कौशल पर व्याख्यान दिया।
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