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Kurukshetra News: पंजाब की ओर से पानी रोके जाने के बाद नरवाना ब्रांच नहर का घटा 50 फीसदी जलस्तर
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कुरुक्षेत्र। पंजाब सरकार की ओर से भाखड़ा नहर का हरियाणा को मिलने वाला पानी रोके जाने का असर धर्मनगरी में भी पड़ा है। हालांकि यह असर सीधे तौर पर दिखाई नहीं दिया लेकिन यहां से बहने वाली नरवाना ब्रांच नहर में करीब दो हजार क्यूसिक तक पानी घट गया है। सामान्य दिनों में जहां करीब 2500 क्यूसिक तक पानी रहता था अब यह घटकर 1200 क्यूसिक से भी कम रह गया है। इसका सीधा असर दक्षिण हरियाणा पर माना जा रहा है।
पंजाब द्वारा उठाए गए इस कदम के बाद जहां हरियाणा सरकार हरकत में आई हुई है तो वहीं अधिकारी भी अलर्ट मोड पर है। सरकार की ओर से मिलने वाले आदेश पर हर अधिकारी की नजरें टिकी हैं। आमजन भी प्रदेश सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदम के इंतजार में है।
जिले से मुख्य तौर पर नरवाना ब्रांच व एसवाईएल नहरें ही हैं, जिनमें से नरवाना ब्रांच नहर ही सामान्य तौर पर बहती है। एसवाईएल केवल बारिश के सीजन में ही बहने लगती है। नरवाना ब्रांच नहर से छह से ज्यादा जलधारा निकलती है, जिनके जरिए खेतों तक पानी पहुंचता है। जिले में किसान ज्यादातर सबर्मिसेबल ट्यूबवेल के आधार पर ही खेती करते हैं और महज 17 फीसदी सिंचाई नहरी पानी से होती है। ऐसे में करीब 500 क्यूसिक नहरी पानी की ही जिले में जरूरत होती है, जिसकी आपूर्ति फिलहाल सामान्य है। वहीं नरवाना ब्रांच नहर का पानी मूनक हेड तक पहुंचता है और यह दक्षिण हरियाणा के किसानों के लिए बड़े स्तर पर काम आता है।
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सरकार के आदेशानुसार उठाए जाएंगे कदम : एक्सईएन
एक्सईएन मुनीष बब्बर का कहना है कि कुरुक्षेत्र में पंजाब सरकार के फैसले का सीधे तौर पर कोई असर नहीं है लेकिन सरकार के जो भी आदेश होंगे, उसी अनुसार अगला कदम उठाया जाएगा। उच्च स्तर के अधिकारियों द्वारा इस मामले के संबंध में बैठकों का दौर जारी है।
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पंजाब द्वारा उठाए गए इस कदम के बाद जहां हरियाणा सरकार हरकत में आई हुई है तो वहीं अधिकारी भी अलर्ट मोड पर है। सरकार की ओर से मिलने वाले आदेश पर हर अधिकारी की नजरें टिकी हैं। आमजन भी प्रदेश सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदम के इंतजार में है।
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जिले से मुख्य तौर पर नरवाना ब्रांच व एसवाईएल नहरें ही हैं, जिनमें से नरवाना ब्रांच नहर ही सामान्य तौर पर बहती है। एसवाईएल केवल बारिश के सीजन में ही बहने लगती है। नरवाना ब्रांच नहर से छह से ज्यादा जलधारा निकलती है, जिनके जरिए खेतों तक पानी पहुंचता है। जिले में किसान ज्यादातर सबर्मिसेबल ट्यूबवेल के आधार पर ही खेती करते हैं और महज 17 फीसदी सिंचाई नहरी पानी से होती है। ऐसे में करीब 500 क्यूसिक नहरी पानी की ही जिले में जरूरत होती है, जिसकी आपूर्ति फिलहाल सामान्य है। वहीं नरवाना ब्रांच नहर का पानी मूनक हेड तक पहुंचता है और यह दक्षिण हरियाणा के किसानों के लिए बड़े स्तर पर काम आता है।
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सरकार के आदेशानुसार उठाए जाएंगे कदम : एक्सईएन
एक्सईएन मुनीष बब्बर का कहना है कि कुरुक्षेत्र में पंजाब सरकार के फैसले का सीधे तौर पर कोई असर नहीं है लेकिन सरकार के जो भी आदेश होंगे, उसी अनुसार अगला कदम उठाया जाएगा। उच्च स्तर के अधिकारियों द्वारा इस मामले के संबंध में बैठकों का दौर जारी है।